राज्यपाल ने ACS के लिए क्यों कहा-फाइल इधर-उधर घुमाते हैं:सच्चाई- 8 बड़े प्रोजेक्ट्स पर लगा ब्रेक; चुनाव से पहले विधायक बेचैन
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बेटियों को स्कूटी देने में हुई देरी पर उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) एमपी अग्रवाल को जिम्मेदारी ठहराया। कहा- ये फाइल को इधर से उधर घुमाते हैं। राज्यपाल के इन तीखे तेवरों के बाद दैनिक भास्कर ने राज्य सरकार के प्रोजेक्ट्स की पड़ताल की। जो अफसरों की लेटलतीफी या आपसी खींचतान के कारण या तो शुरू नहीं हो पाए या अधर में लटके हैं। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे विधायकों को इन प्रोजेक्ट की लेटलतीफी पर लोगों को समझाना होगा। ऐसे ही 8 प्रोजेक्ट को जानिए… 1. रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना एक साल में सिर्फ ‘नियम’ बने, उनमें भी गांव की छात्राओं को जगह नहीं घोषणा : भाजपा ने 2022 के संकल्प पत्र में मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने का वादा किया था। बजट 2025-26 में इसके लिए 400 करोड़ रुपए बजट भी रखा गया। ब्यूरोक्रेसी का अड़ंगा : अफसरों ने एक साल तक योजना की नियमावली ही नहीं बनाई। अब जब बनाई, तो उसमें 90% अंक की अनिवार्य शर्त रख दी। असर : राज्यपाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि इस नियम से सिर्फ शहरों की उन बेटियों को फायदा होगा, जो प्राइवेट स्कूलों और ट्यूशन में पढ़ती हैं। गांव की बेटियां, जिन्हें 10-12 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, वे इस योजना से वंचित रह जाएंगी। 2. बस स्टैंड (पीपीपी मोड) अफसरों की आपसी लड़ाई में अटके टेंडर प्रोजेक्ट : यूपी के 49 बस स्टैंड को PPP (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर आधुनिक रूप से विकसित किया जाना है। ब्यूरोक्रेसी का अड़ंगा : नियम के मुताबिक, टेंडर दाखिल होने के अगले दिन ही खुल जाने चाहिए। लेकिन, विभाग की अपर मुख्य सचिव अर्चना अग्रवाल और परिवहन निगम के एमडी पीएन सिंह के बीच चल रही आपसी खींचतान के चलते पहले चरण के टेंडर एक महीने और दूसरे चरण के टेंडर 11 दिन से दबे पड़े हैं। असर : विभागीय मंत्री दयाशंकर सिंह की बैठक के बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी। चुनाव नजदीक देख विधायक चाहते हैं कि उनके क्षेत्र में काम जल्दी शुरू हो जाए। कौशल विकास मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने तो इस संबंध में सरकार को पत्र भी लिखा है। 3. स्मार्टफोन और टैबलेट योजना 5 साल में 2 करोड़ का लक्ष्य, 4 साल में बंटे सिर्फ 60 लाख वादा : 5 साल में 2 करोड़ छात्रों को स्मार्टफोन/टैबलेट देने का लक्ष्य था। बजट 2025-26 में 40 लाख छात्रों के लिए 2,374 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। ब्यूरोक्रेसी का अड़ंगा : नियमावली बनाने से लेकर टेंडर प्रक्रिया में इतनी देरी हुई कि 4 साल में सिर्फ 60 लाख गैजेट्स ही बांटे जा सके। नोडल एजेंसी यूपीडेस्को और औद्योगिक विकास विभाग अब भी टेंडर और नेगोशिएशन (सौदेबाजी) के फेर में उलझे हैं। असर : चुनाव से पहले विधायक चाहते हैं कि उनके हाथों से 18 साल से ऊपर के युवाओं को टैबलेट मिलें, जिससे चुनाव में इसका सीधा फायदा हो। लेकिन, कंपनियों द्वारा इतनी बड़ी सप्लाई में अब समय लगना तय है। 4. आउटसोर्स भर्ती निगम एक साल से एमडी तैनात, भर्तियां शून्य घोषणा : 2025 के बजट के बाद सीएम योगी ने आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम मानदेय 16 हजार रुपए करने और उनके लिए ‘आउटसोर्स सेवा निगम’ बनाने की घोषणा की थी। सितंबर, 2025 में शासनादेश जारी कर आईएएस अमृता सोनी को इसका एमडी बनाया गया था। ब्यूरोक्रेसी का अड़ंगा : निगम बने और एमडी की तैनाती हुए करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन इस निगम के जरिए अभी तक एक भी भर्ती शुरू नहीं हो सकी है। असर : कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, पीएफ कटौती और ग्रेच्युटी को लेकर तस्वीर अब तक साफ नहीं है। प्रदेश के 3 लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मचारी मानदेय बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं। इन 4 अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स की रफ्तार भी थमी ————————- ये पढ़ें- यूपी में 50 हजार बेटियों को फ्री स्कूटी मिलेगी:ये पहली बार की वोटर, पेट्रोल मॉडल या EV, ये अभी तय नहीं योगी सरकार यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बड़ा दांव खेलने जा रही है। इस साल 50 हजार से ज्यादा मेधावी बेटियों को फ्री स्कूटी देने की तैयारी है। सरकार 2022 विधानसभा चुनाव के वक्त किए गए वादे को पूरा करने जा रही है। इसके लिए 400 करोड़ रुपए का बजट भी तय हो चुका है। पढ़िए पूरी खबर…
