जमीन-मकान खरीदते समय फ्रॉड से ऐसे बचें:एक क्लिक में पता करें जमीन पर केस, लोन या कोई कानूनी विवाद तो नहीं

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जमीन-मकान खरीदते समय फ्रॉड से ऐसे बचें:एक क्लिक में पता करें जमीन पर केस, लोन या कोई कानूनी विवाद तो नहीं

प्रॉपर्टी खरीदते समय सबसे बड़ा खतरा फर्जी रजिस्ट्री, विवादित जमीन या एक ही प्लॉट को कई लोगों को बेचने का होता है। इस तरह फंसने से लाखों रुपए का नुकसान हो सकता है। अब घर बैठे बस 5 मिनट में किसी भी जमीन या मकान का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है। इससे प्रॉपर्टी की सही जानकारी लेकर धोखाधड़ी से बचा जा सकेगा। रजिस्ट्री से पहले इन डॉक्यूमेंट्स की जांच करें जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले उसके सभी जरूरी कागजात अच्छी तरह जांच लें। सबसे पहले ओरिजिनल बैनामा देखें, इससे पता चलता है कि मौजूदा मालिक ने यह प्रॉपर्टी कब और किससे खरीदी थी। इसके बाद होल्डिंग टैक्स की रसीद जरूर चेक करें। इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी का टैक्स सही तरीके से जमा हो रहा है और रिकॉर्ड किसके नाम पर है। सिर्फ रजिस्ट्री होना ही काफी नहीं है। खारिज-दाखिल (म्यूटेशन) भी जरूर देखें। इससे पता चलेगा कि सरकारी रिकॉर्ड में जमीन या मकान मौजूदा मालिक के नाम पर दर्ज है या नहीं। रजिस्ट्री होने के बाद खारिज-दाखिल 90 दिनों के भीतर करा लें। जब तक खतौनी में पुराने मालिक का नाम हटकर आपका नाम दर्ज नहीं होता, तब तक सरकारी रिकॉर्ड में जमीन आपके नाम नहीं मानी जाती। कई बार ठग इसी कमी का फायदा उठाकर उसी जमीन को किसी और को भी बेच देते हैं। आखिर में भारमुक्त प्रमाण पत्र जरूर जांचें। इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, बकाया या कानूनी विवाद तो नहीं है। अगर ये सभी डॉक्यूमेंट सही मिलते हैं, तभी प्रॉपर्टी खरीदने का फैसला करें। फर्जी रजिस्ट्री की पहचान ऐसे करें प्रॉपर्टी खरीदने से पहले यह जरूर जांच लें कि उसकी रजिस्ट्री असली है या नकली। इसके लिए कुछ आसान तरीके अपनाएं। सबसे पहले igrsup.gov.in पर जाएं। यहां ‘संपत्ति खोजें’ ऑप्शन में जाकर रजिस्ट्री नंबर और रजिस्ट्रेशन का साल दर्ज करें। इससे पता चल जाएगा कि रजिस्ट्री सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं। अगर जमीन पहले भी कई बार खरीदी-बेची गई है, तो उसकी पुरानी सभी रजिस्ट्री को मिलाकर देखें। अगर बीच में कोई कड़ी गायब है या रिकॉर्ड मेल नहीं खाता, तो सौदा करने से पहले पूरी जांच कर लें। रजिस्ट्री में दर्ज गवाहों की भी जांच करें। आसपास के लोगों या स्थानीय स्तर पर पता करें कि जिन लोगों ने गवाह के तौर पर सिग्नेचर किए हैं, वे वास्तव में मौजूद हैं या नहीं। फर्जी रजिस्ट्री में कई बार नकली गवाह भी दिखाए जाते हैं। बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले पब्लिक नोटिस दें अगर आप महंगी जमीन, मकान या बड़ा प्लॉट खरीद रहे हैं, तो अपने वकील के जरिए एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार में पब्लिक नोटिस जरूर पब्लिश कराएं। इसमें लिखें कि आप यह प्रॉपर्टी खरीदने जा रहे हैं और अगर किसी व्यक्ति, बैंक या संस्था का इस पर कोई दावा या आपत्ति है, तो वह 15 दिन के भीतर सबूत के साथ संपर्क करे। इससे बाद में कोई विवाद होने पर कोर्ट में यह साबित करना आसान हो जाता है कि आपने पूरी जांच-पड़ताल के बाद प्रॉपर्टी खरीदी थी। इससे खरीदार की कानूनी स्थिति मजबूत होती है। जमीन पर लोन या कोर्ट केस तो नहीं? ऐसे पता लगाएं कई बार ठग ऐसी जमीन बेच देते हैं जिस पर बैंक से भारी-भरकम लोन लिया गया होता है या कोर्ट में मालिकाना हक का मुकदमा चल रहा होता है। इसे जांचने के दो तरीके हैं: पहला : upbhulekh.gov.in पोर्टल पर जाकर जमीन की खतौनी निकालें। खतौनी में ‘डिटेल/कमेंट’ कॉलम देखें। अगर जमीन किसी बैंक के पास गिरवी है या उस पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर है, तो इसकी जानकारी यहीं दर्ज होती है। दूसरा : सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में उस जमीन की गाटा संख्या से ‘इंडेक्स सर्च’ करवाएं। यह काम किसी वकील या डीड राइटर के जरिए भी कराया जा सकता है। इससे पता चल जाएगा कि जमीन पर पहले कितनी रजिस्ट्री हुई हैं। बैंक का लोन है या कोई कानूनी विवाद चल रहा है। प्रॉपर्टी खरीदते समय इन 9 गलतियों से बचें —————- आपके काम की ये खबरें भी पढें- आयुष्मान और आभा कार्ड कितना जरूरी:डॉक्टर की फीस, ICU का खर्च और ऑपरेशन मुफ्त, ₹5 लाख तक फ्री इलाज; जानें घर बैठे कैसे बनाएं गरीब और मिडिल क्लास परिवारों को बीमारी में आर्थिक सहायता देने के लिए सरकार आयुष्मान भारत योजना चला रही है। मेडिकल इमरजेंसी में ₹5 लाख तक का मुफ्त कैशलेस इलाज मिलता है। जरूरी है कि परिवार के हर पात्र सदस्य का आयुष्मान कार्ड बना हो। सरकार लोगों का आभा कार्ड भी बना रही है। यह एक डिजिटल हेल्थ आईडी है, जिसमें आपकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी सुरक्षित रहती है। पढ़िए पूरी खबर…

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