राम मंदिर में अभी भी चंपत राय सबसे पावरफुल:खास लोग 1800 करोड़ वाले खाते संभाल रहे, VIP दर्शन कराने का ठेका ले रहे

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राम मंदिर में अभी भी चंपत राय सबसे पावरफुल:खास लोग 1800 करोड़ वाले खाते संभाल रहे, VIP दर्शन कराने का ठेका ले रहे

राम मंदिर परिसर में चंपत राय की हुकूमत अब भी बरकरार है। दैनिक भास्कर की छानबीन में सामने आया है कि ट्रस्ट से बाहर होने के बाद भी वीआईपी पास बांटने में चंपत राय का ही सिक्का चल रहा है। मंदिर के 1800 करोड़ का फंड जिन बैंक अकाउंट में है, उन्हें भी उनके खास लोग संभाल रहे हैं। ऐसा तब है, जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद चंपत राय 26 जून को महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके हैं। 6 जुलाई को उनका इस्तीफा स्वीकार भी हो चुका है। मामले की जांच कर रही एसआईटी की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। माना जा रहा है कि एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में चंपत राय को ‘सेफ एग्जिट’ दे दिया है। चंपत राय ने राम जन्मभूमि परिसर क्यों नहीं छोड़ा? चंपत राय साल 1991 से अयोध्या में रह रहे हैं। मंदिर आंदोलन से लेकर सुप्रीम कोर्ट में रामलला विराजमान केस की पैरवी तक वे सबसे सक्रिय चेहरा रहे। कोर्ट के फैसले के बाद जब भव्य मंदिर का निर्माण शुरू हुआ, तो उन्हें ट्रस्ट का महासचिव बनाया गया। करीब 35 साल तक अयोध्या की राम राजनीति के केंद्र में रहे चंपत राय ने चोरी के आरोपों के बाद पद छोड़ दिया। अब लोगों के बीच बड़ा सवाल यह उठ रहा कि वे अभी भी राम जन्मभूमि परिसर में क्यों रह रहे हैं? खेल 1. बैंक खातों के संचालन में चंपत के ‘दो खास’ 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में बैंक खातों के संचालन के लिए 3 लोगों की कमेटी बनाई गई है। इसमें अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, इंजीनियर जगदीश आफले और सीए चंदन राय शामिल हैं। इनमें से दो नाम सीधे तौर पर चंपत राय के इशारे पर चलते हैं। इन्हें चंपत राय की ही सिफारिश पर ट्रस्ट की मदद के लिए रखा गया था। नियम के मुताबिक, इन तीनों के संयुक्त हस्ताक्षर के बिना बैंक से एक रुपए भी नहीं निकल सकता। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि चंपत राय पद पर न रहकर भी ट्रस्ट की तिजोरी और वित्तीय फैसलों को पूरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। खेल 2. चंपत के 18 और गोपाल के 14 लोग जारी कर रहे VIP पास राम मंदिर में मंगल आरती, श्रृंगार आरती और शयन आरती के लिए फ्री वीआईपी पास जारी होते हैं। इसके लिए ट्रस्ट के जिम्मेदारों को विशेष डिजिटल आईडी दी जाती है। 26 जून को इस्तीफा देने वाले ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की आईडी उसी दिन बंद कर दी गई थी। विशेष आमंत्रित सदस्य से हटाए गए गोपाल नागरकोटे की आईडी भी 7 जुलाई की सुबह बंद हो गई। चंपत राय की आईडी 9 जुलाई तक चल रही थी, जिसे अब बंद कर दिया गया है। दावा- वीआईपी पास के लिए रुपए लिए जा रहे वीआईपी पास कोई भी जारी करें, दिक्कत क्या है? यह सवाल हमने अयोध्या में लंबे समय से राम मंदिर कवर कर रहे पत्रकार इंदुभूषण पांडेय से पूछा। वो कहते हैं- मंदिर में वीआईपी पास जारी करने वालों और होटल मालिकों का एक रैकेट ऐसा है, जो दर्शन से भी रुपए कमा रहा है। वीआईपी पास फ्री होता है। यह बुजुर्ग, महिला और बच्चों के लिए दी गई सुविधा है। एक दिन में 6 से 7 स्लॉट में ये पास जारी होते हैं। एक स्लॉट यानी समय में 300 पास जारी हो सकते हैं। हालांकि, इन आईडी से हर दिन ढाई से तीन हजार पास ऑफलाइन जारी हो सकते हैं। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे दावा करते हैं- दर्शनार्थियों से 1 हजार से तीन हजार रुपए तक लिए जाते हैं। इसमें होटल और पास जारी करने वाले दोनों का हिस्सा शामिल रहता है। खेल 3. SIT ने नहीं लिखा- टिन्नू यादव को अधिकार किसने दिए 6 जुलाई की बैठक में एसआईटी की 9 पन्नों की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट रखी गई। इस रिपोर्ट को देखकर सवाल उठ रहे है कि पूरा ठीकरा डॉ. अनिल मिश्रा पर फोड़ दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉ. अनिल मिश्रा ने चढ़ावा चोरी रोकने की एसओपी ठीक से लागू नहीं की। 20 सितंबर 2024 और 6 फरवरी 2025 को बैंक और ट्रस्ट के बीच बनी जिस एसओपी पर एसबीआई के तत्कालीन मैनेजर गोविंद मिश्रा और डॉ. अनिल मिश्रा के दस्तखत थे, उसे कभी जमीन पर उतारा ही नहीं गया। रिपोर्ट के पेज 6 और 7 पर रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की संदिग्ध भूमिका का जिक्र है। बिना किसी लिखित आदेश के दानपेटियों की चाबियां टिन्नू के पास रहती थीं। वह गणना कक्ष में बिना रोक-टोक आता-जाता था। उसके पास पुलिस वाला ‘वॉकी-टॉकी’ था। उसकी खुद की वीआईपी पास आईडी भी थी। उसने रसूख से अपने भतीजे मनीष यादव को भी गणना कक्ष में लगवा दिया था, जो सीसीटीवी में चोरी करते रंगेहाथ पकड़ा गया है। एसआईटी ने रिपोर्ट में यह तो लिखा कि टिन्नू यादव के पास ये सारे अधिकार थे। लेकिन, यह कहीं नहीं लिखा कि टिन्नू को ये अधिकार दिए किसने थे? अयोध्या में हर कोई जानता है कि टिन्नू यादव कोई और नहीं, बल्कि चंपत राय का ड्राइवर रहा है। उसे चंपत राय ने ही मंदिर की व्यवस्थाओं का सर्वेसर्वा बनाया था। ट्रस्ट में लेखाकार रहे महिपाल सिंह ने दावा किया था कि उन्होंने चढ़ावा चोरी की जानकारी पहले ही डॉ. अनिल मिश्रा, चंपत राय और गोपाल नागरकोटे को दी थी, लेकिन सच बताने पर उन्हें नौकरी से ही निकाल दिया गया। एसआईटी ने महिपाल का बयान तक नहीं लिया। इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने मंदिर निर्माण सामग्री और 40% कार्यों में कमीशनखोरी का आरोप डॉ. अनिल मिश्रा पर लगाया था। इसकी शिकायत चंपत राय से की थी। शिकायत के बाद इन्हें पहले चढ़ावा राशि की गणना के लिए लगाया गया। फिर धमकी देकर अयोध्या से ही भगा दिया गया। एसआईटी ने इनसे भी पूछताछ करना जरूरी नहीं समझा। ———————— ये खबर भी पढ़ें- राममंदिर चंदा चोरी- फर्जी रसीद बुक मिली, आरोपियों को लेकर परिक्रमा मार्ग पहुंची पुलिस, यहां चोरी के नोटों के बंटवारे का शक अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के तीन आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को पुलिस ने 40 घंटे की रिमांड पर लिया है। पूछताछ के दौरान पुलिस को आरोपियों से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की पुरानी फर्जी रसीद बुक मिली है। पूरी खबर पढ़िए…

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