हाथों से चलकर बरसाना की परिक्रमा कर रहा बच्चा:2 दिन में पूरी की 5 किमी की दूरी, बोला- 5 साल से प्रैक्टिस कर रहा था
मथुरा के बरसाना में 13 साल का बच्चा 3 दिन से हाथों के बल चलकर परिक्रमा कर रहा है। शनिवार को उसकी तबीयत बिगड़ गई, फिर भी वह परिक्रमा करता रहा। उसने करीब डेढ़ किलोमीटर तक हैंड वॉकिंग की। आगरा के प्रतीक विहार फेस-2 में रहने वाला आराध्य गुप्ता 9वीं कक्षा के छात्र है। उसने गुरुवार को बरसाना की परिक्रमा शुरू की थी। परिक्रमा मार्ग करीब 7 किलोमीटर का है। आराध्य अब तक 5 किलोमीटर की दूरी पूरी कर चुका है। आराध्य ने बताया- मैं अपनी दादी का सपना पूरा करने के लिए परिक्रमा कर रहा हूं। राधारानी की कृपा से ढाई दिन में साढ़े 5 किलोमीटर चल चुका हूं। अगर तबीयत ठीक रही, तो कल तक परिक्रमा पूरी कर लूंगा। आराध्य की इच्छा थी कि वह गोवर्धन या वृंदावन की परिक्रमा भी हाथों के बल पर पूरी करे। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए उसने यह संकल्प लिया है। पहले 2 तस्वीरें देखिए… 25 जून से शुरू की परिक्रमा पिता कमलेश ने बताया कि आराध्य पहले गोवर्धन और वृंदावन की परिक्रमा करना चाहता था। गोवर्धन की परिक्रमा 21 किलोमीटर और वृंदावन की 15 किलोमीटर की होती है, जो काफी कठिन मानी जाती है। परिवार ने उसे समझाया और बरसाना की परिक्रमा के बारे में बताया। बरसाना की परिक्रमा करीब 7 किलोमीटर की है। इसके बाद आराध्य ने राधारानी की परिक्रमा करने का संकल्प लिया। 25 जून को आराध्य ने बरसाना के शिवराम चौक से हाथों के बल पर परिक्रमा शुरू की। अब तक वह 5 किलोमीटर की दूरी पूरी कर चुका है। परिक्रमा करते हुए मान मंदिर पहुंच गया है। रोज करीब 2 किलोमीटर तक चलता आराध्य आराध्य ने पहले दिन करीब ढाई किलोमीटर की दूरी पूरी की। इसके बाद शुक्रवार को उसकी तबीयत थोड़ी खराब हो गई, जिसके चलते वह सिर्फ 1 किलोमीटर ही परिक्रमा कर सका। शनिवार को स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद आराध्य ने फिर से परिक्रमा शुरू की। अब उसका लक्ष्य है कि वह रविवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर बरसाना की 7 किलोमीटर की परिक्रमा पूरी कर ले। स्थानीय लोग जगह-जगह कर रहे स्वागत परिक्रमा के दौरान स्थानीय लोग आराध्य का उत्साह बढ़ा रहे हैं। जगह-जगह लोग उसका स्वागत कर रहे हैं और हौसले की सराहना कर रहे हैं। आराध्य की मां सीमा गुप्ता भी हर कदम पर उसका साथ दे रही हैं। वह लगातार उसका हौसला बढ़ा रही हैं। परिवार के मुताबिक आराध्य ने इस परिक्रमा के लिए पहले से तैयारी और अभ्यास किया था। आराध्य का कहना है कि वह यह परिक्रमा अपनी दिवंगत दादी की पावन स्मृति को समर्पित कर रहा है। उसके लिए यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और आस्था से जुड़ा संकल्प है। 8 साल की उम्र से ही हाथों के बल चलने का अभ्यास शुरू किया आराध्य की मां सीमा गुप्ता ने बताया कि आराध्य बचपन से ही धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है। उसकी जुड़वा बहन आराध्या गुप्ता भी धार्मिक गतिविधियों में रुचि रखती है। परिवार के धार्मिक माहौल के कारण आराध्य के मन में बचपन से ही भक्ति और सेवा की भावना विकसित हुई। उसने करीब 8 साल की उम्र से ही हाथों के बल चलने का अभ्यास शुरू कर दिया था। इसी अभ्यास और आस्था के चलते उसने बरसाना की परिक्रमा हाथों के बल पूरी करने का संकल्प लिया है। ………………… यह खबर भी पढ़िए…. राममंदिर चढ़ावा चोरी पर धीरेंद्र शास्त्री भावुक, बोले-भगवान महादंड देंगे:केजरीवाल को VIP ट्रीटमेंट पर भड़के अजय राय, पूछा- ये रिश्ता क्या कहलाता है अयोध्या राम मंदिर चोरी पर पंडित धीरेंद्र शास्त्री भावुक हो गए। इंडोनेशिया के जकार्ता में शुक्रवार को कहा- रावण तो ये भी हैं बस रूप बदल गए हैं। रावण ने तो केवल माता जानकी जी की चोरी की थी। यहां पढ़ें पूरी खबर
