कौशाम्बी: महेवाघाट पुलिस के हत्याकांड खुलासे पर उठे सवाल, पीड़िता ने अवैध हिरासत और झूठी गिरफ्तारी का लगाया आरोप
कौशाम्बी। अलवारा झील चौकीदार श्रवदेव गोसाई हत्याकांड के खुलासे के बाद महेवाघाट पुलिस की कार्रवाई विवादों में घिर गई है। पुलिस ने 24 जून को जारी प्रेस नोट में राजू सरोज की गिरफ्तारी दिखाते हुए उसे हत्या का आरोपी बताया है, लेकिन आरोपी की पत्नी रागिनी देवी ने पुलिस के दावों को पूरी तरह गलत बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
रागिनी देवी का कहना है कि उनके पति राजू सरोज को 20 जून की शाम गांव से कुछ लोग जबरन उठाकर ले गए थे। इसके बाद उन्होंने 21 जून को पुलिस अधीक्षक कौशाम्बी, डायल-112, आईजी प्रयागराज, एडीजी तथा डीजीपी कंट्रोल रूम को शिकायत भेजकर पति के अपहरण और अवैध हिरासत की जानकारी दी थी।
पीड़िता का दावा है कि 22 जून को महेवाघाट थाने पहुंचने पर पुलिस ने उन्हें हिनौता चौकी में बंद उनके पति और एक अन्य व्यक्ति से मिलवाया था। ऐसे में 24 जून को गिरफ्तारी दिखाए जाने पर उन्होंने सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस ने वास्तविक गिरफ्तारी की तारीख छिपाकर अदालत और जनता को गुमराह करने का प्रयास किया है।
रागिनी देवी ने यह भी आरोप लगाया कि मामले में कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
मामले में पुलिस के दावों और पीड़िता के आरोपों के बीच गंभीर विरोधाभास सामने आया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि राजू सरोज की वास्तविक गिरफ्तारी कब हुई और क्या पुलिस की कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप थी। पीड़िता ने न्याय न मिलने पर उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी भी दी है।
