इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, निर्दोष को जेल भेजने वाले अधिकारी से होगी वसूली
‘शांति भंग’ के नाम पर मनमानी कार्रवाई पर हाईकोर्ट सख्त
अवैध हिरासत को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
रिपोर्ट ..अमरनाथ झा …
कौशाम्बी/प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शांति भंग की धाराओं में पुलिस की मनमानी कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल शांति भंग की आशंका के आधार पर किसी नागरिक को अवैध रूप से हिरासत में लेना या जेल भेजना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और पीड़ित को दिया जाने वाला मुआवजा संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूला जाएगा।
पहले मामले में हंडिया क्षेत्र के निवासी मातांबर मिश्र को घरेलू विवाद के बाद पुलिस द्वारा हिरासत में लेने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। न्यायालय ने पाया कि बिना किसी संज्ञेय अपराध के उन्हें हिरासत में रखा गया और बाद में धारा 107/116 की कार्रवाई दिखाकर इसे सही ठहराने का प्रयास किया गया। कोर्ट ने इसे अवैध मानते हुए पीड़ित को 25 हजार रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया, जिसकी वसूली दोषी पुलिसकर्मी के वेतन से होगी।
वहीं दूसरे मामले में खीरी थाना क्षेत्र के मंसूर अहमद उर्फ लल्लू को आठ दिनों तक अवैध रूप से जेल में रखने पर अदालत ने दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। न्यायालय ने कहा कि बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए किसी नागरिक की स्वतंत्रता से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के इस फैसले को पुलिस की मनमानी पर बड़ी रोक और नागरिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
