गिरफ्तारी के नियमों पर डीजीपी की सख्ती, कौशाम्बी के कई थानों पर उठते रहे सवाल

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Kaushambi voice

👉 गिरफ्तारी में मनमानी पर डीजीपी सख्त, कौशाम्बी के कई थानों पर उठे सवाल
👉 BNSS धारा 35(3) के उल्लंघन पर घिरी पुलिस, गिरफ्तारी मेमो में गड़बड़ी उजागर
👉 करारी से महेवाघाट ,थाना कड़ाधाम तक गिरफ्तारी नियमों की अनदेखी, मानवाधिकार हनन के आरोप
👉 अब सिर्फ FIR नंबर नहीं चलेगा, लिखना अनिवार्य होगा गिरफ्तारी की वजह ..
👉 सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद यूपी पुलिस अलर्ट, कौशाम्बी के थानों पर निगरानी बढ़ी…

रिपोर्ट – अमरनाथ झा कौशाम्बी…

कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा गिरफ्तारी और तलाशी मेमो को लेकर जारी किए गए नए निर्देशों ने एक बार फिर पुलिस कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के सवालों को चर्चा में ला दिया है। डीजीपी मुख्यालय ने साफ किया है कि अब गिरफ्तारी मेमो में आरोपी की गिरफ्तारी की स्पष्ट वजह लिखना अनिवार्य होगा। सिर्फ एफआईआर नंबर या धाराएं लिखना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। आदेश का पालन न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।
यह निर्देश ऐसे समय में जारी हुए हैं जब कौशाम्बी जिले के कई थानों पर लंबे समय से गिरफ्तारी के नियमों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। जिले के करारी थाना, सराय अकिल थाना, पिपरी थाना, चरवा थाना, पैइंसा थाना, सैनी थाना, कड़ाधाम थाना और महेवाघाट थाना में गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं का आरोप है कि कई मामलों में पुलिस बिना स्पष्ट कारण दर्ज किए लोगों को थाने ले जाती है, जबकि गिरफ्तारी मेमो मौके पर भरा ही नहीं जाता है या फिर अधूरा भर दिया जाता है या बाद में तैयार किया जाता है।

👉 BNSS की धारा 35(3) क्या कहती है….
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत पुलिस को यह स्पष्ट करना अनिवार्य है कि आरोपी की गिरफ्तारी क्यों आवश्यक है। कानून कहता है कि केवल मुकदमा दर्ज होना ही गिरफ्तारी का आधार नहीं हो सकता। पुलिस को यह भी बताना होगा कि आरोपी के भागने, साक्ष्य मिटाने, गवाहों को प्रभावित करने या अपराध दोहराने की आशंका क्यों है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पुलिस गिरफ्तारी का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं करती तो यह व्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों तथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पहले भी जता चुके नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और इलाहाबाद हाईकोर्ट कई बार गिरफ्तारी प्रक्रिया में अनियमितताओं पर सख्त टिप्पणी कर चुके हैं। अदालतों ने कहा है कि पुलिस बिना उचित आधार के गिरफ्तारी नहीं कर सकती और गिरफ्तारी का पूरा रिकॉर्ड लिखित रूप में होना चाहिए।
अदालतों ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी मेमो में समय, स्थान, कारण और गवाह की जानकारी सही तरीके से दर्ज होना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो अदालत गिरफ्तारी को अवैध मान सकती है।
👉 गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को किन नियमों का पालन करना जरूरी…
कानून के अनुसार गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को कई अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन करना होता है—
आरोपी को गिरफ्तारी का स्पष्ट कारण बताना अनिवार्य है।
गिरफ्तारी मेमो मौके पर ही तैयार किया जाना चाहिए।
मेमो पर स्वतंत्र गवाह या परिवार के सदस्य के हस्ताक्षर जरूरी हैं।
 आरोपी के परिवार या परिचित को गिरफ्तारी की सूचना देना आवश्यकहै…
गिरफ्तारी का समय और स्थान स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए।
आरोपी को वकील से संपर्क का अधिकार है।
महिला आरोपी की गिरफ्तारी में विशेष नियम लागू होते हैं।
गैर जरूरी मामलों में सीधे गिरफ्तारी के बजाय नोटिस देने का प्रावधान भी है।
👉 कौशाम्बी में क्यों उठते रहे सवाल….
जिले में कई बार ऐसे आरोप सामने आए हैं कि पुलिस पहले व्यक्ति को थाने लाती है और बाद में गिरफ्तारी दर्शाई जाती है। कुछ मामलों में परिवारों ने आरोप लगाया कि घंटों तक हिरासत में रखने के बावजूद गिरफ्तारी मेमो नहीं दिया गया। अधिवक्ताओं का कहना है कि कई थानों में अब भी पुराने तरीके से कार्रवाई की जा रही है, जबकि BNSS लागू होने के बाद प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी होना जरूरी हो गया है।
“कौशाम्बी वॉइस” भी पहले कई रिपोर्टों में BNSS की धारा 35(3) और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा चुका है। अब डीजीपी मुख्यालय के नए आदेश के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जिले के थानों में गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर जवाबदेही बढ़ेगी।
👉 अधिकारियों को दी गई चेतावनी…
डीजीपी मुख्यालय ने साफ कहा है कि गिरफ्तारी और तलाशी मेमो में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी जिलों को नए प्रारूप का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है। नियमों की अनदेखी करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि इन निर्देशों का सही तरीके से पालन हुआ तो इससे न सिर्फ पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की भी बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

AMARNATH JHA KAUSHAMBI .9415254415

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