👉 कौशांबी में शत्रु संपत्तियों पर भू-माफियाओं का कब्जा जारी, प्रशासन बेखबर
👉 मंझनपुर की 88 गाटा शत्रु संपत्तियों में फर्जी रजिस्ट्री और निर्माण का खुलासा
👉 आराजी संख्या 1914, 1430/1, 1432 और 1988 पर अवैध कब्जे की पुष्टि
👉 सैकड़ों फर्जी रजिस्ट्री हुई रद्द, तीन आरोपी जेल में, बाकी अब भी खुलेआम
👉 तहसील के कर्मचारी रत्तू पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने का आरोप
👉 प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल, जनता ने की कार्रवाई की मांग
रिपोर्ट – अमरनाथ झा (8318977396 )
कौशांबी । जनपद कौशांबी के सदर तहसील क्षेत्र अंतर्गत पाता और मंझनपुर में स्थित दर्जनों शत्रु संपत्तियों पर भू-माफियाओं द्वारा कब्जे और अवैध निर्माण का खेल जारी है। प्रशासनिक जानकारी और पुरानी कार्रवाइयों के बावजूद स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है। यह मामला अब जिले में चर्चित हो गया है और प्रशासन की भूमिका पर सवालिया निशान लगने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, मंझनपुर के आराजी संख्या 1914 और 1914/1, कुल 2 बीघा 10 बिस्वा भूमि में से 8 बिस्वा क्षेत्र शत्रु संपत्ति के अंतर्गत आता है, जो तनवीर अहमद और इरशाद अहमद के नाम दर्ज है। इस भूमि पर फर्जी तरीके से हारून, सखावत उल्ला उर्फ जोखू, भोला रिज़वी सहित अन्य लोगों द्वारा कुल 28 लोगों के नाम रजिस्ट्री कर दी गई थी। जब मामला उजागर हुआ, तो तीनों आरोपियों को जेल भेजा गया और लगभग 150 फर्जी रजिस्ट्री रद्द की गईं, बावजूद इसके शेष आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी प्रकार गाटा संख्या 1430/1 (14 बिस्वा), जो दुर्गा मंदिर चौराहे के समीप स्थित है और शत्रु संपत्ति है, पर भी अवैध निर्माण कार्य जारी है। इससे सटे गाटा संख्या 1431 और 1432 (16 बिस्वा) पर भी फर्जी रजिस्ट्री कर मकान निर्माण हो रहा है। वहीं गाटा संख्या 1988, जो वशिष्ठ बालिका स्कूल के पास स्थित है, वहां मिट्टी डालकर निर्माण की तैयारी की जा रही है। यह भी शत्रु संपत्ति है।
खास बात यह है कि तहसील मंझनपुर क्षेत्र में कुल 88 गाटा शत्रु संपत्तियों की पहचान की गई है। पिछले वर्ष कार्रवाई के बाद कुछ भू-माफिया जेल भेजे गए थे, लेकिन उसके बाद से प्रशासन ने इन संपत्तियों को चिन्हित कर संरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मौजूदा समय में 1430/1 और 1432 पर खुलेआम निर्माण जारी है, जिससे सरकारी तंत्र की निष्क्रियता उजागर हो रही है।
सूत्रों का दावा है कि तहसील कार्यालय में तैनात एक चालक रत्तू की इस पूरे खेल में संलिप्तता है, जो भू-माफियाओं को अंदरूनी मदद उपलब्ध करा रहा है। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर प्रकरण पर क्या कार्रवाई करेगा? क्या शत्रु संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी या भू-माफियाओं का कब्जा इसी तरह चलता रहेगा?