भैला मकदूमपुर गांव में चोरी-छिपे की जा रही नाप-जोख, लेखपाल पर नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप, गलत नाप कराकर गांव कराया विवाद

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👉 कौशाम्बी के भैला मखदुमपुर गांव में लेखपाल ज्वाला सिंह पर गंभीर आरोप, आराजी 781 को गलत नापकर 780 में दिखा कर कराई अवैध दीवारबंदी।

👉 कमिश्नरी में विचाराधीन भूमि पर जबरन कब्जा दिलवाया गया,आराजी 618 सहित कई सरकारी जमीनों पर कब्जे करवाए गए।

👉 लेखपाल बिना आदेश के नाप करता है, रिपोर्ट भी नहीं सौंपता। तालाब, ऊसर, बंजर, खलिहान जैसी सरकारी जमीनों पर कब्जा।

👉 राजस्व रिकॉर्ड में 58 तालाब दर्ज, पर जमीनी हकीकत में एक दर्जन से भी कम बचे,ग्रामीणों ने लेखपाल को हटाने और जांच की मांग की।

कौशाम्बी । जनपद के मंझनपुर तहसील के ग्राम भैला मखदुमपुर में तैनात लेखपाल ज्वाला सिंह की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि लेखपाल बिना किसी पूर्व सूचना, नोटिस या अनुमति के चोरी-छिपे भूमि की नाप-जोख करता है, जिससे भूमि विवाद लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार लेखपाल द्वारा राजस्व विभाग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा 67 एवं राजस्व नाप-जोख नियमावली के अनुसार, किसी भी भूमि की पैमाइश से पूर्व संबंधित पक्षों को पूर्व सूचना देना, सीमांकन करना और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है। साथ ही, नाप के समय दोनों पक्षों की मौजूदगी, गवाहों की उपस्थिति और मौके पर स्पष्ट मुनादी जरूरी होती है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहे।

परंतु गांव के लोगों का कहना है कि लेखपाल ज्वाला सिंह गुपचुप तरीके से नाप कर एक पक्ष विशेष को लाभ पहुंचाते हैं और दूसरे पक्ष को जानकारी तक नहीं दी जाती। कई बार नाप-जोख की रिपोर्ट भी अधिकारियों को नहीं सौंपी जाती।

गांव की आराजी संख्या 781, जो वर्तमान में कमिश्नरी स्तर पर विचाराधीन है, उसमें भी लेखपाल ने बिना नोटिस दिए, इसे आबादी (आराजी 780) दिखाकर संतलाल पुत्र सीताराम को कब्जा करवा दिया और निर्माण कार्य करा दिया। इसी प्रकार सरकारी जमीन आराजी 618 व अन्य स्थानों पर भी चोरी-छिपे नाप कर सरकारी भूमि पर कब्जा करवा दिया गया। गांव के खलिहान , खाद्य गड्ढा, तालाब आदि पर कब्जा करवा रखा है ।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी जमीनें जैसे—तालाब, ऊसर, बंजर, खाद गड्ढा, खलिहान आदि भी लेखपाल की मिलीभगत से कब्जा कराई जा चुकी हैं। गांव में दर्ज 58 तालाबों में से अब एक दर्जन से भी कम ही अस्तित्व में हैं।

ग्रामीणों ने उपजिलाधिकारी से शिकायत कर मांग की है कि लेखपाल के खिलाफ विभागीय जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए और गांव की सभी भूमि की नाप-जोख नियमों के तहत, GPS आधारित, दोनों पक्षों की उपस्थिति में कराई जाए, ताकि पारदर्शिता बहाल हो और विवादों का समाधान हो सके।

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