कौशाम्बी में मिलावटखोरी चरम पर, फूड विभाग की भूमिका पर उठे सवाल , हर महीने लाखों की वसूली में जुटे अधिकारी

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Kaushambi voice

👉 कौशाम्बी में मिलावट का साम्राज्य, फूड विभाग बना मूक दर्शक 👉 जहरीला दूध और मिठाइयों से बीमार हो रही जनता, डीएम से निष्पक्ष जांच की उठी मांग । जिला मुख्यालय सहित फैला है सिराथू,चायल में मिलावट का कारोबार 

कौशाम्बी । जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है। सूत्रों के अनुसार, फूड विभाग की लापरवाही और मिलावटखोरों से कथित साठगांठ के चलते आम जनता को जहरीले और मिलावटी खाद्य पदार्थों का सेवन करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर जिला मुख्यालय तक मिलावटी दूध, मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्री की बिक्री खुलेआम हो रही है। चायल क्षेत्र के कसेंदा, रेही, बल्हेपुर, नेवादा और आलमपुर , तिल्हापुर, सराय,चरवा समेत कई गांवों में मिलावटी दूध का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है। वहीं, मंझनपुर के कादीपुर पेट्रोल पंप के आसपास भी मिलावटी मिठाई बनाने की शिकायतें सामने आई हैं, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

 

खतरनाक केमिकल्स से तैयार हो रहा है ‘दूध’

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि मिलावटी दूध में निरमा पाउडर, रिफाइंड तेल, डालडा, यूरिया, आरारोट पाउडर और अन्य केमिकल मिलाए जा रहे हैं। यह जहरीला दूध न केवल शरीर के पाचन तंत्र को प्रभावित कर रहा है, बल्कि लीवर, किडनी, हृदय और आंतों से संबंधित गंभीर बीमारियों का कारण भी बन रहा है।

जिले भर में संचालित सैकड़ों से अधिक दूध कलेक्शन सेंटरों से हर महीने हजारों रुपये की कथित वसूली की जा रही है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक सेंटर से औसतन ₹6000 की मासिक अवैध वसूली की जा रही है। इसके अलावा, खोवा, पनीर, किराना दुकानों, मिठाई की दुकानों, होटलों, ढाबों, तेल मिलों, आइसक्रीम फैक्ट्रियों और आटा चक्कियों से भी सालाना करोड़ों रुपये की वसूली की जा रही है।

कार्रवाई वहीं जहां ‘हिस्सा’ नहीं मिलता

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि विभागीय कार्रवाई केवल उन्हीं दुकानों और प्रतिष्ठानों पर की जाती है, जहां से विभागीय कर्मचारियों को ‘महीना’ नहीं मिल रहा। छापेमारी के बाद जल्द ही सौदेबाजी हो जाती है और कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाती है। इससे मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं और विभाग की साख पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग

जिले में बढ़ती मिलावटखोरी और फूड विभाग की संदिग्ध भूमिका को लेकर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश व्याप्त है। आमजन की मांग है कि जिलाधिकारी स्तर से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि दोषी अधिकारियों और मिलावटखोरों पर कठोर कार्रवाई हो सके।

यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो जिले में खाद्य सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ सकती है और आम जनमानस की सेहत गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

अमरनाथ झा पत्रकार , 8318977396

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