प्रयागराज: सदर तहसील में सात बीघा तालाब पर कब्जे का आरोप, राजस्व विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

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👉 आराजी संख्या 924 का तालाब अभिलेखों में दर्ज, मौके पर अस्तित्व को लेकर सवाल; अतिक्रमण हटाने और निष्पक्ष जांच की मांग
प्रयागराज। सदर तहसील क्षेत्र के अबू बकरपुर, नीवा उपरहार स्थित आराजी संख्या 924 के तालाब पर कथित कब्जे का मामला सामने आया है। आरोप है कि करीब सात बीघा क्षेत्रफल में दर्ज तालाब की जमीन पर धीरे-धीरे अतिक्रमण कर लिया गया, जिससे तालाब का अस्तित्व मौके पर समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है। इस मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी तालाबों की जमीन की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करीब 40 वर्ष पहले माधो निषाद निवासी नीवा को आजीविका के लिए तालाब के लगभग दो बीघा हिस्से का पट्टा दिया गया था। आरोप है कि बाद में तालाब की जमीन पर मिट्टी डालकर पाटने का प्रयास किया गया। उस समय तत्कालीन एसडीएम संगीता सिंह ने कार्रवाई की थी। हालांकि, उनके स्थानांतरण के बाद दोबारा तालाब की जमीन पर अतिक्रमण किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
मामले में राजस्व अभिलेखों में दर्ज तालाब की जमीन और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान कराए जाने की जरूरत है। यदि तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा हुआ है, तो यह पता लगाना भी जरूरी है कि अतिक्रमण कब और किन परिस्थितियों में हुआ तथा संबंधित राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों ने क्या कार्रवाई की।
जांच और कार्रवाई का इंतजार…
सवाल यह है कि यदि आराजी संख्या 924 तालाब के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज है, तो उसकी जमीन को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी निभाई गई या नहीं? क्या भूमि की पैमाइश कराकर सीमांकन कराया गया? पूर्व में हुई कार्रवाई का क्या परिणाम निकला? इन बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन से मांग है कि तालाब की भूमि की राजस्व अभिलेखों के आधार पर पैमाइश कराई जाए, कथित कब्जे की जांच हो और अवैध अतिक्रमण की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए तालाब को कब्जामुक्त कराया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराता है या तालाब की जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला फाइलों तक ही सीमित रह जाता है।
— अमरनाथ झा, पत्रकार -9415254415

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