सात भूखंडों पर मिट्टी खनन की अनुमति की जांच जरूरी, साकेत ब्रिक फील्ड के अभिलेखों पर उठे सवाल
👉 पर्यावरणीय स्वीकृति से लेकर खनन परमिट तक की हो पड़ताल; सातों भूखंडों के खसरा नंबर, खुदाई की गहराई और मिट्टी की मात्रा का सत्यापन कराने की जरूरत
कौशाम्बी। ईंट भट्ठों के संचालन के लिए मिट्टी की खुदाई से जुड़े नियमों और पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर साकेत ब्रिक फील्ड के सात भूखंडों की अनुमति संबंधी अभिलेखों की जांच कराए जाने की जरूरत है। सवाल यह है कि संबंधित भूखंडों पर मिट्टी की खुदाई के लिए कौन-कौन सी वैधानिक अनुमतियां जारी की गई हैं और क्या मौके पर हो रही गतिविधियां स्वीकृत शर्तों के अनुरूप हैं। केवल पूरक ईंट भट्ठा प्रमाणपत्र और शुल्क जमा करने के विवरण से सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त होने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
एनजीटी के फैसले में पर्यावरणीय स्वीकृति का महत्वपूर्ण मुद्दा
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 25 फरवरी 2025 को रफहत नईम सिद्दीकी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य मामले में ईंट निर्माण के लिए ऊपरी मिट्टी की खुदाई को खनन गतिविधि के दायरे में माना। अधिकरण ने पर्यावरणीय स्वीकृति की आवश्यकता स्पष्ट करने और मिट्टी संरक्षण, खुदाई के बाद भूमि के पुनर्स्थापन तथा प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े दिशा-निर्देश तैयार करने के निर्देश दिए। आदेश में संबंधित अधिकारियों को पर्यावरणीय अनुपालन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध सहमति के बिना ईंट भट्ठों के संचालन को रोकने के लिए भी निर्देशित किया गया। ऐसे में मिट्टी खनन की अनुमति का परीक्षण केवल भट्ठा प्रमाणपत्र तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं होगा।
16 दिसंबर 2025 के निर्देशों के बाद अनुमति का सवाल अहम..
दिसंबर 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार ने ईंट भट्ठों के लिए मिट्टी निकालने सहित लघु खनन गतिविधियों से संबंधित पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति को लेकर निर्देश जारी किए। 28 मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में भी 16 दिसंबर 2025 के सरकारी आदेश का उल्लेख किया गया है। इसलिए संबंधित भट्ठे के मामले में यह जांचना जरूरी है कि लागू आदेश के अनुसार पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक थी या नहीं, संबंधित अवधि में कौन-से प्रावधान प्रभावी थे और आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की गई थी या नहीं।
सातों भूखंडों के खसरा नंबर और नक्शे का हो मिलान
खनन विभाग और राजस्व विभाग से सातों भूखंडों के खसरा नंबर, क्षेत्रफल, भूमि की प्रकृति, स्वामित्व अथवा भूमि उपयोग से संबंधित अभिलेख और उपलब्ध अनुमतियों का सत्यापन कराने की जरूरत है। मौके पर मिट्टी की खुदाई वाले स्थानों के GPS निर्देशांक का अभिलेखों से मिलान भी किया जाना चाहिए। इससे स्पष्ट होगा कि खुदाई उन्हीं भूखंडों पर हो रही है या नहीं, जिनके संबंध में दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
खुदाई की गहराई और मिट्टी की मात्रा भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी देखा जाना चाहिए कि खुदाई कितनी गहराई तक की गई है, कितने क्षेत्र में मिट्टी निकाली गई और कुल कितनी मिट्टी का उपयोग ईंट निर्माण में किया जा रहा है। मशीनों के इस्तेमाल, खुदाई की प्रकृति और लागू खनन नियमों के अनुसार किसी परमिट या अन्य स्वीकृति की आवश्यकता का परीक्षण भी जरूरी है। केवल खुदाई की गहराई के आधार पर पर्यावरणीय स्वीकृति से छूट मान लेना उचित नहीं होगा; इसके लिए लागू शासनादेश और न्यायिक आदेशों की शर्तों को देखना आवश्यक है।
खनन परमिट, रॉयल्टी और शुल्क का रिकॉर्ड भी खंगाला जाए..
खनन विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सातों भूखंडों के लिए किसी खनन पट्टे, परमिट, रॉयल्टी या अन्य शुल्क की आवश्यकता थी या नहीं। यदि शुल्क जमा किया गया है तो चालान में दर्ज भूखंड, अवधि, मात्रा और उद्देश्य का मूल अभिलेखों से मिलान किया जाना चाहिए। शुल्क जमा होने का प्रमाण अपने आप में पर्यावरणीय स्वीकृति या अन्य वैधानिक अनुमति का विकल्प नहीं माना जा सकता।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति की भी जांच
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से साकेत ब्रिक फील्ड की स्थापना और संचालन संबंधी लागू सहमतियों की जानकारी ली जानी चाहिए। जांच में यह भी देखा जाए कि संबंधित अवधि में स्थापना की सहमति (CTE) और संचालन की सहमति (CTO) आवश्यक थी या नहीं, उनकी वैधता क्या थी और निर्धारित पर्यावरणीय शर्तों का पालन किया जा रहा था या नहीं। एनजीटी के आदेश में वैध संचालन सहमति और पर्यावरणीय अनुपालन पर स्पष्ट जोर दिया गया है।
उपजाऊ मिट्टी और आसपास की कृषि भूमि के संरक्षण का सवाल..
मिट्टी की खुदाई से आसपास के खेतों, मेड़ों और कृषि भूमि पर पड़ने वाले प्रभाव का भी निरीक्षण किया जाना चाहिए। ऊपरी उपजाऊ मिट्टी के संरक्षण, धूल नियंत्रण, भूजल के इस्तेमाल और खुदाई के बाद भूमि के पुनर्स्थापन से संबंधित लागू शर्तों की जांच जरूरी है। यदि खुदाई से कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने या मिट्टी के कटाव की शिकायत है तो राजस्व, खनन और संबंधित पर्यावरणीय अधिकारियों की संयुक्त जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
भट्ठे के सूचना-पट्ट और वार्षिक रिकॉर्ड का हो सत्यापन
एनजीटी के निर्देशों में ईंट भट्ठे पर प्रमुख स्थान पर सूचना-पट्ट के जरिए महत्वपूर्ण परिचालन संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने, मिट्टी खनन तथा ईंट उत्पादन के रिकॉर्ड और पर्यावरणीय अनुपालन की निगरानी जैसे विषय शामिल हैं। इसलिए संबंधित भट्ठे पर उपलब्ध सूचना-पट्ट, मिट्टी की वार्षिक खपत, ईंट उत्पादन, भूजल उपयोग संबंधी अनुमति जहां लागू हो तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति के अभिलेखों का भी सत्यापन कराया जाना चाहिए।
खनन विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति..
साकेत ब्रिक फील्ड के सात भूखंडों पर मिट्टी की खुदाई की वैधता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित अनुमति आदेशों, पर्यावरणीय स्वीकृति और स्थलीय निरीक्षण के आधार पर ही निकाला जा सकता है। खनन विभाग से भूखंडवार अनुमति, खुदाई की स्वीकृत मात्रा, पर्यावरणीय स्वीकृति और निरीक्षण रिपोर्ट की स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा है। यदि जांच में किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
जांच में ये जरूरी नियम और दस्तावेज शामिल कराएं..
1. पर्यावरणीय स्वीकृति (EC)
NGT के 25 फरवरी 2025 के फैसले के अनुसार, ईंट निर्माण के लिए मिट्टी की खुदाई को खनन गतिविधि माना गया और पूर्व पर्यावरणीय स्वीकृति की आवश्यकता बताई गई। इसलिए सातों भूखंडों की EC, उसकी वैधता और शर्तों की जांच कराई जाए।
2. सातों भूखंडों के खसरा नंबर और नक्शे
प्रत्येक भूखंड का खसरा नंबर, क्षेत्रफल, मालिकाना/भूमि उपयोग का विवरण, सहमति या पट्टा संबंधी दस्तावेज और वास्तविक खुदाई स्थल के GPS निर्देशांक मिलाए जाएं। अनुमति किसी दूसरे भूखंड की हो तो उसके आधार पर यहां खुदाई की वैधता नहीं मानी जा सकती।
3. खुदाई की गहराई और मशीनों का इस्तेमाल
मौके पर खुदाई की वास्तविक गहराई, क्षेत्रफल और निकाली गई मिट्टी की मात्रा मापी जाए। दो मीटर तक हाथ से खुदाई के संबंध में पुराने राज्यीय प्रावधानों का हवाला मिलता है, लेकिन NGT के 2025 के फैसले के बाद केवल इस आधार पर पर्यावरणीय स्वीकृति से छूट मान लेना सुरक्षित नहीं है।
4. खनन विभाग का परमिट और रॉयल्टी/शुल्क
यह जांच हो कि लागू नियमों के अनुसार खनन पट्टा, परमिट, रॉयल्टी या अन्य शुल्क देय हैं या नहीं। जमा चालान किस भूखंड, अवधि और मात्रा से संबंधित है, इसका मिलान मूल रिकॉर्ड से किया जाए। शुल्क जमा होना अपने आप में हर दूसरी अनुमति का प्रमाण नहीं है।
5. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से भट्ठे की स्थापना और संचालन संबंधी लागू सहमतियों—CTE और CTO—की प्रतियां, उनकी वैधता और शर्तों का सत्यापन कराया जाए। NGT ने वैध CTO और पर्यावरणीय अनुपालन के बिना भट्ठा संचालित न होने देने के निर्देश दिए थे।
6. कृषि भूमि और ऊपरी उपजाऊ मिट्टी का संरक्षण
यह देखा जाए कि उपजाऊ ऊपरी मिट्टी को अलग संरक्षित किया गया या नहीं, आसपास की कृषि भूमि में कटाव तो नहीं हो रहा और खुदाई के बाद भूमि को बहाल करने की व्यवस्था है या नहीं। NGT ने ऊपरी मिट्टी के संरक्षण और खुदाई वाले क्षेत्र के पुनर्स्थापन पर निर्देश दिए हैं।
7. भट्ठे पर सूचना-पट्ट और वार्षिक रिकॉर्ड
NGT के फैसले में भट्ठे पर नाम, GPS निर्देशांक, मिट्टी खनन स्थल व वार्षिक मात्रा, ईंट उत्पादन, भूजल अनुमति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति संबंधी जानकारी प्रदर्शित करने के निर्देश शामिल हैं। मौके पर इसकी उपलब्धता और अभिलेखों से मिलान की जांच भी कराई जा सकती है।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
