प्रयागराज के नाजरेथ हॉस्पिटल में चार दिन के इलाज का बिल तीन लाख रुपये से अधिक होने का दावा, परिजन ने उठाए दवाओं की कीमत पर सवाल

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👉 नीरज ने स्वास्थ्य विभाग से जांच कराने की मांग की; अस्पताल प्रबंधन का पक्ष आना बाकी..

👉 अखिल पटनायक और डॉ0 आर0पी शुक्ला से भी नहीं हो सकी बात, स्टाफ डाक्टरों का नम्बर बताने से है कतराते …

प्रयागराज। नाजरेथ हॉस्पिटल में भर्ती रहीं सुशीला देवी के इलाज के खर्च को लेकर उनके परिजन नीरज ने सवाल उठाए हैं। नीरज के मुताबिक, सुशीला देवी के चार दिनों के इलाज के दौरान दवाओं और अस्पताल के अन्य खर्चों का कुल बिल तीन लाख रुपये से अधिक बना। उन्होंने दवाओं और चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की कीमतों की जांच कराने की मांग की है।
नीरज का आरोप है कि इलाज के दौरान प्रतिदिन दवाएं लिखी जाती थीं और अस्पताल के भीतर उपलब्ध कराई जाने वाली कुछ दवाओं की कीमत बाजार में मिलने वाली दवाओं की तुलना में काफी अधिक थी। उनका दावा है कि बाहर लगभग पांच हजार रुपये में मिलने वाली एक दवा के लिए अस्पताल में करीब 25 हजार रुपये तक लिए गए। उन्होंने इंजेक्शन, ग्लव्स और अन्य चिकित्सा सामग्री की कीमतों में भी अंतर होने का आरोप लगाया।
परिजन का कहना है कि चार दिनों में इतना अधिक खर्च होना उनके लिए चिंता का विषय है। नीरज ने संबंधित अधिकारियों से अस्पताल के बिल, दवाओं की सूची, प्रति यूनिट कीमतों और चिकित्सा सामग्री के शुल्क की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि मरीज से लिया गया खर्च उचित था या नहीं।
स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग…
नीरज ने स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले बिलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि मरीजों के परिजनों को दवाओं और अन्य चिकित्सा सामग्री के शुल्क का स्पष्ट विवरण मिलना चाहिए।
इस मामले में जब अस्पताल प्रबंधन से बात किया तो 05322407337 कोई संतोष जनक जवाब नहीं मिला डाक्टरों का फोन भी नहीं उठता है। महंगे इलाज के बाद जब मरीज को आराम नहीं मिला तो पीड़ित ने रेफर कराकर नारायण स्वरूप हॉस्पिटल मुंडेरा में ले गया और कुछ घंटों के बाद वहां से लखनऊ ले गया। फिलहाल इन प्राइवेट हॉस्पिटलों में मरीजों से दवा के नाम पर जो लूट हो रही है उस पर रोक लगनी चाहिए और बाहर वही दवा सस्ती मिलती हैं और अंदर कई गुना में दिया जा रहा है। यदि पीड़ित ने बाहर की दवा मंगा ली तो कहेंगे यह अलाउ नहीं है ।

अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415

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