8 बार विधायक रहे सपा नेता रामगोविंद चौधरी का निधन:लखनऊ PGI में अंतिम सांस ली; बिस्तर से कहा था- अखिलेश को सीएम बनाना है
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने लखनऊ के संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PGI) में अंतिम सांस ली। वे 74 साल के थे। उनके निधन पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शोक जताया। अखिलेश ने लिखा- “समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी जी का निधन अत्यंत दुखद है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें। शोकाकुल परिवार को यह दुख सहने की शक्ति मिले। भावपूर्ण श्रद्धांजलि।” सितंबर 2025 में राम गोविंद चौधरी लखनऊ के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती थे। अखिलेश यादव उनसे मिलने गए थे। इस दौरान राम गोविंद चौधरी ने बिस्तर पर पड़े-पड़े डॉक्टरों से अखिलेश के सामने कहा था- चुनाव जीतना है। अखिलेश को मुख्यमंत्री बनाना है। आप लोग भी सुन लो।” लखनऊ PGI में चल रहा था इलाज परिवार के मुताबिक, वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनका लखनऊ के PGI में इलाज चल रहा था। शुक्रवार देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। उनके परिवार में पत्नी कलावती देवी और एक बेटा है। निधन की खबर मिलते ही बलिया और लखनऊ में उनके समर्थकों और सपा नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई। सपा नेता और कार्यकर्ता उनके आवास और अस्पताल पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। सीएम योगी ने जताया दुख सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम गोविंद चौधरी के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि यूपी विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का निधन बेहद दुखद है। प्रभु श्रीराम से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की। शोकाकुल परिवार को यह दुख सहने की शक्ति दें। सपा महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने भी उनके निधन पर शोक जताया। छात्र जीवन से समाजवादी आंदोलन से जुड़े राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1946 को बलिया जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम द्वारिका चौधरी और मां का नाम तिलेश्वरी देवी था। उन्होंने टीडी कॉलेज, बलिया से पोस्ट ग्रेजुएशन और एलएलबी की पढ़ाई की। चौधरी छात्र जीवन से ही समाजवादी विचारधारा से जुड़ गए थे। आपातकाल के दौरान उन्होंने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल भी गए। उस समय बलिया के ज्यादातर कार्यकर्ता 19 महीने बाद जेल से बाहर आए थे, लेकिन राम गोविंद चौधरी 25 महीने बाद रिहा हुए थे। 2022 में बांसडीह सीट से चुनाव हार गए 2022 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी बांसडीह सीट से भाजपा की केतकी सिंह से चुनाव हार गए थे। राम गोविंद चौधरी को समाजवादी आंदोलन का प्रमुख नेता माना जाता था। वे मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के करीबी रहे। शिक्षा और पिछड़े वर्गों से जुड़े मुद्दे वे लगातार उठाते रहे। हाल के सालों में भी वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के तौर पर सक्रिय रहे। वे सरकार की नीतियों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे। चंद्रशेखर से मुलाकात के बाद तेज हुआ राजनीतिक सफर 1977 के लोकसभा चुनाव के दौरान राम गोविंद चौधरी की मुलाकात पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से हुई। जेल से रिहा होने के बाद चंद्रशेखर उनके काम से प्रभावित हुए और उन्हें अपना करीबी साथी बनाया। इसके बाद चौधरी का राजनीतिक सफर तेजी से आगे बढ़ा। राम गोविंद चौधरी कई बार विधायक रहे। उन्होंने बांसडीह विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सरकार में वे बेसिक शिक्षा और बाल विकास एवं पोषण मंत्री रहे। इसके बाद 2017 से 2022 तक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे। —————————- ये खबर भी पढ़ें… मां-भाई का शव नहीं मिला तो लिपटकर रोए:किसी ने पायल से पहचाना तो कोई कंकाल देखता रहा; नोएडा में जिंदा जले 9 लोग कोई जली लाश के जेवर देखकर अपनों की पहचान कर रहा था, तो कोई कंकाल के ढांचे से। गुरुवार (24 सितंबर) को पूरा दिन नोएडा के जिला अस्पताल स्थित पोस्टमॉर्टम हाउस की यही हाल रहा। रोते-बिलखते लोग अपने घरवालों के बारे में जानने के लिए इधर से उधर भटकते रहे।दरअसल, नोएडा में बुधवार रात यमुना एक्सप्रेस-वे पर चलती स्लीपर AC बस में आग लगने से 9 यात्री जिंदा जल गए थे। पढ़ें पूरी खबर…
