प्रेमानंदजी के 25 साल के शिष्य ने सुसाइड किया:बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदे; प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था, कमरे से ग्राइंडर मिला
मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के 25 साल के शिष्य ने चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी। गुरुवार शाम वह छत पर गए। कुछ देर वहां बैठे और फिर छलांग लगा दी। उन्हें गंभीर हालत में सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस जांच में रसिक दुलारी शरण के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। उनके कमरे से ग्राइंडर भी मिला है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि रसिक ने खुद को चोट पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल तो नहीं किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रसिक दुलारी के शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। मामला वाराह घाट इलाके की गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग का है। यह बिल्डिंग प्रेमानंदजी के पुराने आश्रम केली कुंज से 500 मीटर दूर है। आज शव का पोस्टमॉर्टम होगा। 2 तस्वीरें देखिए… 2 साल पहले प्रेमानंदजी से शिक्षा ली, नाम बदल लिया रसिक दुलारी शरण मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। वह 2 साल पहले वृंदावन आए और प्रेमानंदजी से दीक्षा ली। इसके बाद अपना नाम दीपक लोधी से बदलकर रसिक दुलारी शरण रख लिया। दीपक 2 भाई और एक बहन है। सबसे बड़ी बहन और फिर दीपक थे। सबसे छोटे भाई मनीष हैं। उनकी मां लौंग बाई एक साल पहले वृंदावन आईं। वह दूसरी जगह 5 दिन रहीं, इस दौरान दीपक उनसे मिलते रहते थे। बताया जा रहा है कि वह नर्मदा की भी परिक्रमा कर चुके थे। बिजली का काम करते थे, 3 महीने बिल्डिंग में कमरा मिला था रसिक दुलारी बिजली का काम जानते थे, इसलिए आश्रम में उन्हें इसी सेवा से जोड़ा गया था। 3 महीने पहले रसिक दुलारी को गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल पर रहने के लिए कमरा दिया गया था। इस बिल्डिंग में संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े 50 शिष्य भी रहते हैं। मोबाइल और CCTV से सुराग तलाश रही पुलिस सीओ संदीप सिंह ने बताया- अस्पताल से सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया। कमरे से कुछ संदिग्ध सामान मिला है, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना से पहले रसिक दुलारी की किससे बातचीत हुई थी और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। इसके लिए मोबाइल डेटा और CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। 18 मई से नए आश्रम में रह रहे प्रेमानंदज महाराज संत प्रेमानंद महाराज पहले केली कुंज आश्रम में रहते थे। 18 मई से उन्होंने केली कुंज छोड़ दिया। अब यमुना बिहार कुंज आश्रम में रहते हैं। यह आश्रम केली कुंज से यमुना के रास्ते करीब 3 किलोमीटर और सड़क मार्ग से 18 किलोमीटर दूर है। वेलवन में यमुना किनारे करीब पौने 5 एकड़ में बने इस आश्रम में ज्यादातर जगह पेड़-पौधे लगे हैं। महाराजजी राधा अष्टमी पर केली कुंज आश्रम आए थे। उन्होंने राधा रानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया और दोपहर तक रहे। इसके बाद नए आश्रम चले गए। तब से वह केली कुंज नहीं आए। ———————————- ये खबर भी पढ़ें- कानपुर कारोबारी हत्याकांड, मां ने कहा था- इनका कुछ करो:अय्याशी से परेशान बेटे ने हत्या कराई; अब करोड़ों का व्यापार कौन संभालेगा? करोड़पति परिवार। परिवार में कलह और अविश्वास। पिता-बेटे के बीच बढ़ती दूरी। यह कहानी कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड से जुड़ी है। पुलिस की जांच में परिवार के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान की कई परतें सामने आई हैं। पढ़ें पूरी खबर
