रामलला के गर्भगृह में ताजी हवा के लिए खिड़की लगेगी:सेवा में 2 बदलाव- जगाने-सुलाने के लिए भजन गा रहे; अब नए ड्रेस में पुजारी

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रामलला के गर्भगृह में ताजी हवा के लिए खिड़की लगेगी:सेवा में 2 बदलाव- जगाने-सुलाने के लिए भजन गा रहे; अब नए ड्रेस में पुजारी

अयोध्या राम मंदिर में बाल रूप में विराजमान रामलला की सेवा, सुरक्षा और सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाओं में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। राम मंदिर ट्रस्ट में नए लोगों की जिम्मेदारी के साथ अब रामलला की रोज की सेवा को और व्यवस्थित करने पर जोर दिया जा रहा है। अब गर्भगृह में एक खिड़की लगाई जाएगी, जिससे रात में दरवाजा बंद हो तो रामलला को बाहर की ताजी हवा मिल सके। ऐसा इसलिए किया जाएगा कि रामलला को अंदर घुटन महसूस न हो। इसके अलावा दो और बदलाव कर दिए गए हैं। पहला- अब पुजारी पीले रंग का रेशमी अचला और उत्तरीय पहन रहे हैं। इससे पहले पुजारी चौबंदी पहनते थे। दूसरा- रामलला की रोज की पूजा-अर्चना को भी अधिक भक्तिमय बनाया गया है। अब भगवान को जगाने, भोजन कराने से लेकर रात का शयन आरती तक अलग-अलग अवसरों पर भक्ति पद सुनाए जाते हैं। भजन गाकर उन्हें सुलाया जाता है, दुलारते हुए जगाया जाता है। इन तीनों व्यवस्थाओं को विस्तार से जानिए- 1. गर्भगृह में ताजी हवा के लिए खिड़की लगाई जाएगी पांच साल के बाल स्वरूप में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब धार्मिक समिति के मन में विचार आया कि रात में गर्भगृह का दरवाजा बंद होने पर भगवान को घुटन महसूस होती होगी। ऐसे में गर्भगृह के अंदर शुद्ध हवा जाने की व्यवस्था कराई जाए। इसके लिए खिड़की लगाई जाए, ताकि बाहर की ताजी हवा अंदर जा सके। अब इस पर विचार किया जा रहा है। मंदिर की सेवा व्यवस्था से जुड़े लोगों के मुताबिक, बाल स्वरूप रामलला की सेवा में किसी तरह की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है। धार्मिक समिति के सदस्य स्वामी राजकुमार दास के सुझाव पर ट्रस्ट के महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने सुविधाओं को लेकर जरूरी निर्देश दिए हैं। ट्रस्ट के सहयोगी जगदीश आफले को इन व्यवस्थाओं को अमल में लाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके साथ ही गर्भगृह में दो टावर AC लगाने का फैसला पहले ही लिया जा चुका है। यानी रामलला के गर्भगृह में तापमान और हवा की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों विकल्पों पर काम किया जा रहा है। 2. भक्ति पद गुनगुनाकर रामलला को जगाने-सुलाने लगे पुजारी रामलला की रोज की पूजा-अर्चना और आरती व्यवस्था को भी अधिक भक्तिमय बनाया गया है। अब भगवान को सुबह जगाने, फिर दिन में भोग यानी भोजन करने से लेकर रात में शयन तक अलग-अलग मौकों पर निर्धारित भक्ति पदों और भजनों को गाया जाता है। ये व्यवस्था शनिवार (5 सितंबर) से शुरू हुई। जगाते समय रामलला को प्रेमपूर्वक नींद से उठने वाले पद गाए जाते हैं। इसके बाद श्रृंगार और भोग के मौके पर भक्ति पदों का गायन होता है। रात में शयन आरती के समय भगवान को सोने के लिए पद गाए जाते हैं। इन पदों के जरिए रामलला की बाल स्वरूप में सेवा और लीलाओं का भाव प्रस्तुत किया जाता है। इससे मंदिर की पूजा पद्धति में सिर्फ आरती और मंत्रोच्चार ही नहीं, बल्कि पारंपरिक भक्ति संगीत का भाव भी जुड़ गया है। 3. पुजारियों अब नई ड्रेस पहनने लगे रामलला की पूजा-अर्चना और सेवा करने वाले पुजारियों के लिए निर्धारित नई ड्रेस भी शुक्रवार यानी जन्माष्टमी के दिन से लागू कर दी गई है। अब पुजारियों के वस्त्र मंदिर की धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय मर्यादा की तरह रखे गए हैं। पुजारी पीले रंग का रेशमी अचला और उत्तरीय पहन रहे हैं, यानी धोती और ऊपर कंधे से वस्त्र लपेट रहे हैं। इससे पहले पुजारी चौबंदी पहनते थे। नई ड्रेस का उद्देश्य मंदिर की पूजा व्यवस्था में एकरूपता और अनुशासन लाना भी है। रामलला की सेवा में शामिल सभी पुजारी अब निर्धारित ड्रेस कोड के अनुसार ही पूजा-अर्चना कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रसाद वितरण के दौरान रामभक्तों का तिलक लगाकर स्वागत करने पर भी सहमति बनाई जा रही है। यानी मंदिर में दर्शन के साथ श्रद्धालुओं के स्वागत की धार्मिक परंपरा को भी और व्यवस्थित किया जा रहा है। रामलला की सेवा, धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं के अनुभव से बदलाव राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से किए जा रहे ये बदलाव सिर्फ सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं। इनमें रामलला की बाल स्वरूप सेवा, मंदिर की धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं के अनुभव, तीनों को ध्यान में रखा जा रहा है। गर्भगृह में हवा के बेहतर आवागमन की तैयारी रामलला की सुविधा से जुड़ी है। पुजारियों की नई वेशभूषा पूजा व्यवस्था में एकरूपता लाने की दिशा में कदम है। वहीं जागरण से शयन तक पद गायन दैनिक सेवा को और भक्तिमय बनाने की कोशिश है। अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर अब केवल दर्शन का केंद्र नहीं, बल्कि रामानंदीय परंपरा के अनुरूप नियमित पूजा, सेवा और धार्मिक अनुशासन का बड़ा केंद्र भी बन रहा है। रामलला की सेवा से जुड़े ये तीन बदलाव इसी व्यवस्था को लगातार विकसित करने की दिशा में उठाए जा रहे कदम हैं। ————————– ये खबर भी पढ़िए- राममंदिर के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा: चंपत राय की जगह गोविंद देव गिरि महासचिव बने; ट्रस्ट में 3 नए सदस्य शामिल पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को इसका ऐलान किया। मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया और एयरफोर्स में 39 साल काम किया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है। बैठक में ट्रस्टी बनाए गए महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष का चार्ज दिया गया। नए CEO और कोषाध्यक्ष महासचिव गोविंद देव गिरि को ही रिपोर्ट करेंगे। पढ़ें पूरी खबर…

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