दो साल से फाइलों में दबा करोड़ों का धान-चावल घोटाला, CBCID कर रही जांच
अधर में लटका धान खरीद घोटाला, 1.39 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप
कौशांबी। जिले में करीब दो साल पहले सामने आए धान खरीद और सीएमआर से जुड़े कथित घोटाले का मामला अब भी जांच की फाइलों में उलझा हुआ है। पश्चिम शरीरा थाने में 10 अगस्त 2024 को क्राइम नंबर 170/2024 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई, लेकिन करीब दो साल बीतने के बावजूद आरोपित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकी है। शिकायत में धान खरीद और राइस मिल तक धान पहुंचाने से जुड़े दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप लगाया गया है। कथित अनियमितता की रकम करीब 1 करोड़ 39 लाख रुपये बताई जा रही है।
मामला कौशांबी के चम्पाहा बाजार स्थित एक राइस मिल से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि वर्ष 2023-24 में यूपीसीयू के माध्यम से हुई धान खरीद में नियमों की अनदेखी की गई। शिकायत में तत्कालीन एडीएम, डिप्टी आरएमओ सुधांशु शेखर चौबे, जिला प्रबंधक यूपीसीयू श्रद्धानंद पांडे समेत कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की गई है।
वाहनों की क्षमता से अधिक धान लोड दिखाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न क्रय केंद्रों से धान खरीदने के बाद राइस मिल तक पहुंचाने के लिए तैयार किए गए रिकॉर्ड में कई गंभीर विसंगतियां हैं। कुछ वाहनों में उनकी निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक धान लोड किया जाना दर्शाया गया है। वहीं, कुछ मामलों में एक ही वाहन को अलग-अलग तारीखों में इस्तेमाल किए जाने और उसके लोडिंग-अनलोडिंग रिकॉर्ड में भी कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही गई है।
शिकायत के मुताबिक यूपी-77 टी-8687 वाहन की पासिंग क्षमता करीब 160 क्विंटल होने के बावजूद रिकॉर्ड में करीब 300 क्विंटल धान लोड दिखाया गया। इसी तरह यूपी-72 पी-9785 वाहन में भी निर्धारित क्षमता से अधिक धान लोड किए जाने का आरोप लगाया गया है।
एक ही वाहन की एंट्री को लेकर उठे सवाल
शिकायत में यूपी-71 एटी-0161 वाहन के रिकॉर्ड को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। आरोप है कि 5 जनवरी 2024 को इस वाहन की लोडिंग कर चम्पाहा भेजना दर्ज किया गया और 14 जनवरी 2024 को उसे खाली कराया जाना दर्शाया गया। वहीं, इसी वाहन की 8 जनवरी को उसी स्थान से दोबारा लोडिंग और 14 जनवरी को बेहद कम अंतराल में खाली किए जाने की एंट्री दर्ज होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि इन रिकॉर्डों का वास्तविकता से मिलान किए जाने पर मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जांच में वाहनों के जीपीएस रिकॉर्ड, चालान, वाहन नंबर, लोडिंग-अनलोडिंग की तारीख और समय तथा संबंधित क्रय केंद्रों के दस्तावेज अहम साक्ष्य साबित हो सकते हैं।
कई क्रय केंद्र भी जांच के दायरे में
मामले से जुड़ी शिकायत में उमियावा, मवई और शाहपुर देव समेत कई क्रय केंद्रों का उल्लेख किया गया है। साथ ही संबंधित केंद्र प्रभारियों, सचिवों और विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
बताया जा रहा है कि मामले की जांच से संबंधित फाइल उच्च स्तर पर भेजी जा चुकी है और अब सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। करीब दो साल से मामला लंबित होने के कारण यह सवाल उठ रहा है कि जांच कब पूरी होगी और जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
धान खरीद और सीएमआर से जुड़े इस मामले में फिलहाल अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यदि दस्तावेजों में दर्ज कथित अनियमितताएं सही पाई जाती हैं तो धान खरीद व्यवस्था की निगरानी और उससे जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।
रिपोर्ट- अमरनाथ झा
पत्रकार
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