चिल्ला शहबाजी में शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में 31 वर्ष पहले कथित हेरफेर का आरोप, कब्रिस्तान की भूमि पर कब्जे की भी जांच की मांग

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कौशाम्बी। चायल तहसील क्षेत्र के चिल्ला शहबाजी गांव में शत्रु संपत्ति और कब्रिस्तान की भूमि से जुड़े अभिलेखों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करीब 31 वर्ष पहले शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई और बाद में उस पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार यह मामला पेट्रोल पंप के सामने गैस एजेंसी के पास स्थित आराजी संख्या-22 से जुड़ा है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से कूटरचित तरीके से नाम में बदलाव कर शत्रु संपत्ति की भूमि का हस्तांतरण कराया गया। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व अभिलेखों में गंभीर अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है।

इसके अलावा ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आराजी संख्या-341, खाता संख्या-650 तथा आराजी संख्या-343, खाता संख्या-771, जिन्हें राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान की भूमि बताया जाता है, उन पर भी कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। ग्रामीणों ने इन भूमि की पैमाइश, अभिलेखों के सत्यापन और मौके पर जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि पूरे प्रकरण में शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेखों और कब्रिस्तान की भूमि के दस्तावेजों का मिलान कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका आरोप है कि करीब 31 वर्ष पूर्व तत्कालीन लेखपाल द्वारा कथित रूप से रिकॉर्ड में कूटरचना कर नाम में बदलाव किया गया, जिसकी भी जांच आवश्यक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जीवाड़ा या भूमि के अवैध हस्तांतरण की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कौशाम्बी। चायल तहसील क्षेत्र के चिल्ला शहबाजी गांव में शत्रु संपत्ति और कब्रिस्तान की भूमि से जुड़े अभिलेखों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करीब 31 वर्ष पहले शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर भूमि की रजिस्ट्री कराई गई और बाद में उस पर कब्जा कर लिया गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों के अनुसार यह मामला पेट्रोल पंप के सामने गैस एजेंसी के पास स्थित आराजी संख्या-22 से जुड़ा है। आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से कूटरचित तरीके से नाम में बदलाव कर शत्रु संपत्ति की भूमि का हस्तांतरण कराया गया। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह राजस्व अभिलेखों में गंभीर अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का मामला हो सकता है।

इसके अलावा ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आराजी संख्या-341, खाता संख्या-650 तथा आराजी संख्या-343, खाता संख्या-771, जिन्हें राजस्व अभिलेखों में कब्रिस्तान की भूमि बताया जाता है, उन पर भी कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। ग्रामीणों ने इन भूमि की पैमाइश, अभिलेखों के सत्यापन और मौके पर जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि पूरे प्रकरण में शत्रु संपत्ति के रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेखों और कब्रिस्तान की भूमि के दस्तावेजों का मिलान कर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका आरोप है कि करीब 31 वर्ष पूर्व तत्कालीन लेखपाल द्वारा कथित रूप से रिकॉर्ड में कूटरचना कर नाम में बदलाव किया गया, जिसकी भी जांच आवश्यक है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जीवाड़ा या भूमि के अवैध हस्तांतरण की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि सामने नहीं आई है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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