भूदान समिति की जमीनों का रिकॉर्ड गायब? वर्षों से आरटीआई के बावजूद नहीं मिली जानकारी, जांच की उठी मांग

0
9c316fcc-f8d2-4654-9dd4-45dbc2440214

कौशांबी। जिले में भूदान समिति की जमीनों का समुचित और केंद्रीकृत रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिस प्रकार शत्रु संपत्ति, कब्रिस्तान और अन्य सरकारी भूमि का अलग-अलग अभिलेख तैयार किया जाता है, उसी प्रकार भूदान समिति की सभी जमीनों का भी पृथक रजिस्टर तैयार कर उनका डिजिटल अभिलेखीकरण कराया जाए, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की तीनों तहसीलों में भूदान समिति की भूमि का एकीकृत और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इससे भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती और विवाद, अतिक्रमण तथा अभिलेखों में संभावित गड़बड़ियों की आशंका बनी रहती है। हालांकि, इन आशंकाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि वर्षों से भूदान भूमि का व्यापक सर्वेक्षण और सत्यापन नहीं कराया गया है। ऐसे में राजस्व अभिलेखों से मिलान कर यदि सभी भूदान भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए तो भविष्य में होने वाले विवादों और कथित अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

इस मामले में पत्रकार अमरनाथ झा ने दावा किया है कि पिछले 8 से 10 वर्षों के दौरान उन्होंने भूदान समिति की जमीनों से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कई बार आवेदन किए, लेकिन आज तक उन्हें संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। उनका कहना है कि रिकॉर्ड सार्वजनिक होने से भूदान भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और यदि कहीं अनियमितताएं हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच संभव होगी।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भूदान समिति की सभी जमीनों का सर्वेक्षण, सत्यापन और डिजिटल अभिलेखीकरण कराया जाए। साथ ही प्रत्येक तहसील में इन जमीनों का अलग रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जाए तथा जहां भी अनियमितताओं की शिकायतें हैं, वहां निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

फिलहाल इस मामले पर जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रशासन स्तर पर जांच कराई जाती है तो भूदान समिति की जमीनों की वास्तविक स्थिति और रिकॉर्ड से जुड़े तथ्यों का स्पष्ट रूप सामने आ सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुख्य ख़बरें