ओवैसी के टारगेट पर पूर्वांचल की 37 सीटें:2022 में बिना तैयारी लड़े तो आजमगढ़ में 3% वोट मिले; क्या सपा को नुकसान होगा

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ओवैसी के टारगेट पर पूर्वांचल की 37 सीटें:2022 में बिना तैयारी लड़े तो आजमगढ़ में 3% वोट मिले; क्या सपा को नुकसान होगा

सपा से गठबंधन नहीं होने के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी की नजर उन मुस्लिम बहुल सीटों पर है, जो सपा का गढ़ मानी जाती हैं। 11 अक्टूबर को ओवैसी आजमगढ़ में लोगों के बीच रहे। इससे पहले मुरादाबाद में भी जनसभा कर चुके हैं। मुस्लिमों के मुद्दों पर राजनीति करते हुए ओवैसी ने साल-2022 में आजमगढ़ में 62 हजार 831 वोट हासिल किए थे। ये कुल वोट का 3% था। उस वक्त आजमगढ़ की सीटों पर AIMIM का कोई मजबूत संगठन भी नहीं था। यही वजह है कि 2027 चुनाव से पहले ओवैसी आजमगढ़ पहुंचे। वो जानते हैं कि 2022 के चुनाव में आजमगढ़ में जिन 5 सीटों पर हार-जीत का मार्जिन 17 हजार वोट या उससे कम रहा था, उनके नतीजे आसानी से बदले जा सकते हैं। मुस्लिम वोटर एकजुट हुए, तो हवा का रुख AIMIM की तरफ मुड़ सकता है। ओवैसी सिर्फ आजमगढ़ नहीं, आसपास के जिले जौनपुर, बलिया, गाजीपुर, मऊ की कुल 37 सीटों पर एक्टिव हैं। 2022 के चुनाव में AIMIM ने इन 37 सीटों में से 12 पर कैंडिडेट उतारे थे। इनमें 9 कैंडिडेट सपा के खिलाफ थे, जिन्होंने जीत का मार्जिन कम कर दिया था। तब यूपी में AIMIM 95 सीटों पर लड़ी थी। 2027 में ओवैसी 200 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्वांचल की इन 37 सीटों पर भी कैंडिडेट उतारने की तैयारी कर रहे हैं। 2027 विधानसभा चुनाव में इसका क्या असर हो सकता है, पढ़िए रिपोर्ट… सपा का असर : 2022 में 29 सीटों पर कब्जा किया 2022 के चुनाव में सपा का सुभासपा के साथ गठबंधन था। दोनों ने मिलकर आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर और जौनपुर की 37 सीटों में से 29 सीटों पर कब्जा कर लिया था। 37 में से 12 सीटों पर हार-जीत का अंतर 10 हजार से कम था। लेकिन, इस बार 2 बदलाव हुए हैं, जो सपा के लिए चुनौती बन सकते हैं- अब अगर ओवैसी फैक्टर चला, तो सीधा नुकसान सपा का होना तय है। क्योंकि, सपा के लिए पूर्वांचल में मुस्लिम-यादव फैक्टर ही जिताऊ साबित होता है। अगर मुस्लिम वोटर का एक हिस्सा सपा से AIMIM की तरफ छिटकता है, तो सपा के लिए मुश्किल हो सकती है। इसको और डिटेल में आजमगढ़ के उदाहरण से समझते हैं- राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार कहते हैं- AIMIM सिर्फ अपनी सीटें जीतना नहीं चाहती, सपा के M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण को कमजोर करना भी उनके लक्ष्य में है। हालांकि, सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी प्रवक्ताओं को नसीहत दी है कि AIMIM के खिलाफ खुलकर नहीं बोलना है। क्योंकि, ऐसा होने पर भाजपा फायदा उठा सकती है। इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- आजमगढ़ समेत आसपास के जिलों में सपा क्यों पावरफुल, 2022 के विधानसभा चुनाव के नतीजों से समझिए- इन सीटों पर AIMIM बदल सकती है समीकरण ————————— यह खबर भी पढ़ें – यूपी कांग्रेस कार्यालय में हंगामा, जूते चले, धक्का-मुक्की,अजय राय और ममता चौधरी भिड़े यूपी कांग्रेस कार्यालय में रविवार को पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। जूते-चप्पल चले और धक्का-मुक्की हुई। 30 मिनट तक हंगामा चलता रहा। विवाद तब शुरू हुआ, जब यूपी कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण समारोह में पूर्व अध्यक्ष अजय राय पहुंचे। पूरी खबर पढ़िए…

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