यमुना का सीना छलनी! अवैध बालू खनन पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, अधिकारियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
कौशाम्बी। जिले में यमुना नदी के विभिन्न घाटों पर कथित अवैध बालू खनन को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि खनन माफिया खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाकर यमुना नदी का सीना छलनी कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों के अनुसार दलेलागंज, महेवाघाट, पभोषा, भवंसुरी, कटैया, महिला, तिल्हापुर और केवट का पूरा समेत कई घाटों पर दिन-रात बालू का अवैध खनन किया जा रहा है। आरोप है कि निर्धारित मानकों और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करते हुए भारी मशीनों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल कर यमुना की प्राकृतिक संरचना को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध खनन के कारण यमुना नदी की धारा प्रभावित हो रही है। कई स्थानों पर नदी का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरणीय असंतुलन की स्थिति पैदा हो रही है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर नदी की धारा मोड़कर खनन किया जा रहा है, जबकि अन्य स्थानों पर नावों और विशेष उपकरणों के माध्यम से बालू निकाली जा रही है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अवैध खनन का सीधा असर पशुपालकों और किसानों पर पड़ रहा है। नदी में पानी की उपलब्धता प्रभावित होने से पशुओं को पानी पिलाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में यमुना नदी के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों पर खनन माफियाओं के साथ कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष जांच कराए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है।
अवैध खनन के विरोध में ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और यमुना नदी को अवैध खनन से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यमुना को बचाने के लिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी कार्रवाई की जरूरत है।
“यमुना बचाओ, पर्यावरण बचाओ” की मांग के साथ ग्रामीण अब प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
