नहीं रुक रहा थाना करारी में पुलिसिया शोषण, विनीत सिंह द्वारा होता है वर्दी का दुरुपयोग ,लोगो के मौलिक अधिकारों तथा जीवन और निजी स्वतंत्रता पर रोक लगाना आम बात,नहीं हो रहा कानून का पालन,नौकरशाही हुई बेलगाम
कौशांबी के करारी थाने की पुलिस पर शोषण और मनमानी के गंभीर आरोप, मानवाधिकार उल्लंघन का भी सवाल
कौशांबी। जिले के करारी थाना प्रभारी विनीत सिंह पर आम जनता के मौलिक अधिकारों के शोषण और तानाशाही रवैये के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि थाने में बिना वजह कई-कई घंटे और कई दिनों तक लोगों को बंद रखा जाता है, रिपोर्ट दर्ज नहीं की जाती और बिना सुविधा शुल्क के किसी की भी सुनवाई नहीं होती।
स्थानीय निवासियों के मुताबिक, करारी थाने में दलालों के माध्यम से ही काम होता है, और रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस विपक्षी से वसूली के लिए सक्रिय हो जाती है। यह भी आरोप है कि पुलिस छोटे-छोटे मामलों में भी जब चाहती है, लोगों को घर से उठा लाती है और कई दिनों तक थाने में रखकर परेशान करती है।
सबसे गंभीर मामला रमेश मौर्य नामक व्यक्ति का सामने आया है, जिसे करीब 8 दिन तक थाने में रखा गया। इस दौरान उसकी पत्नी रोजाना थाने आकर खाना देती रही। इस घटना से जुड़े वीडियो, फोटो और जीपीएस लोकेशन भी वायरल हुए, लेकिन उच्च अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। मीडिया में मामला उछलने के बाद सपा ने इस पर जांच के आदेश दिए, परंतु कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करारी पुलिस ना तो डीके बासु गाइडलाइंस का पालन करती है, ना ही गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने का नियम मानती है। पुलिस पर आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद ना तो अरेस्ट मेमो भरा जाता है, ना परिजनों को सूचना दी जाती है। यही नहीं, पुलिस द्वारा मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देकर अवैध वसूली करने के भी आरोप हैं।
विधि विशेषज्ञों का कहना है कि यह सब भारतीय संविधान के आर्टिकल 20 और 21, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन की सुरक्षा की गारंटी देते हैं, का सीधा उल्लंघन है। इसके बावजूद, अब तक किसी भी उच्च अधिकारी ने थाना प्रभारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की है।
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि करारी पुलिस की कार्यशैली की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि लोगों के मौलिक अधिकारों और मानवाधिकारों की रक्षा हो सके।
