कौशांबी के करारी थाना क्षेत्र में बेलगाम अपराध, पुलिस पर मनमानी, वसूली और लापरवाही के गंभीर आरोप, थाना प्रभारी विनीत सिंह मौलिक अधिकारों का करते उल्लंघन, अरेस्ट मेमो का नहीं होता पालन

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👉 करारी थाना क्षेत्र में जनवरी से अब तक 299 केस दर्ज, 51 विवेचनाएं लंबित। थाना प्रभारी पर अपराध रोकने के बजाय वसूली में व्यस्त रहने का आरोप।

👉 बिना दलालों के थाने में नहीं होती सुनवाई, फरियादियों को जबरन थाने में रोका जाता है। BNS की कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकारों का खुलेआम उल्लंघन।

👉 पिंडरा सहाबनपुर की चौकीदार सुमंती देवी के साथ हुई मारपीट का मुकदमा अब तक दर्ज नहीं। मौली मझियावा में युवक को हफ्तों थाने में बैठाए रखने का आरोप।

👉 सीसीटीवी फुटेज से बड़ा खुलासा संभव। स्थानीय लोग उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की कर रहे मांग।

3 माह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी रमेश मौर्या के मामले नहीं हुई अभी तक कोई कार्यवाही,8 दिन तक थाने के लॉकअप में किया था बंद, जीपीएस वीडियो हुआ था वायरल

कौशांबी। करारी थाना क्षेत्र में अपराधों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। जनवरी 2025 से अब तक करारी थाना में 299 मामले दर्ज हो चुके हैं, जिनमें से 51 विवेचनाएं अभी भी लंबित हैं। थाना प्रभारी विनीत सिंह पर अपराध नियंत्रण में विफल रहने, मनमानी करने और अवैध वसूली में लिप्त रहने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

बिना दलालों के नहीं होती सुनवाई

सूत्रों के अनुसार, करारी थाना में फरियादियों की सुनवाई बिना दलालों के संभव नहीं है। थाने में दिनभर दलालों का जमावड़ा लगा रहता है। आरोप है कि दलालों के माध्यम से ही मुकदमे दर्ज होते हैं, चाहे मामला सही हो या गलत। शिकायत करने आने वाले लोगों को कई-कई दिनों तक थाने में जबरन बैठाकर जांच के नाम पर परेशान किया जाता है।

वसूली न होने तक थाने में रखा जाता है बंद

यह भी आरोप है कि जब तक वसूली की रकम तय नहीं हो जाती, तब तक लोगों को थाने के लॉकअप में बंद रखा जाता है। वसूली न होने की स्थिति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 और 351 में मुकदमा दर्ज कर चालान कर दिया जाता है।

BNS की कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन

सबसे गंभीर आरोप यह है कि करारी थाना में BNS की धारा 35(3)(C) का पालन नहीं किया जा रहा है। कानून के अनुसार, गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस को अरेस्ट मेमो में गिरफ्तारी दर्ज करनी होती है, लेकिन करारी पुलिस कई मामलों में बिना अरेस्ट मेमो के ही लोगों को उठा कर थाने में बंद कर रही है, जो कि मानवाधिकार और मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

खुलेआम हो रहा है मानवाधिकार हनन

थाना प्रभारी पर यह भी आरोप है कि प्रतिदिन आधा दर्जन से अधिक लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लॉकअप में रखा जाता है और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जाता है। थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज से इस पूरे मामले की सच्चाई उजागर हो सकती है।

अन्य घटनाएं जो पुलिस की लापरवाही को उजागर करती हैं:

  1. पिंडरा सहाबनपुर मामला: चौकीदार सुमंती देवी को मोहल्ले के लोगों ने पीट दिया लेकिन पुलिस ने अब तक मुकदमा दर्ज नहीं किया। आज पीड़िता ने एसपी से मिलकर न्याय की गुहार लगाई।
  2. मौली मझियावा प्रकरण: एक सप्ताह पूर्व गांव में एक युवक और युवती का मामला सामने आया था जिसमें युवक को हफ्तों तक थाने में बैठाए रखा गया और बाद में मामले को समझौते में निपटा दिया गया।

स्थानीय लोग कर रहे निष्पक्ष जांच की मांग

थाना प्रभारी विनीत सिंह की कार्यशैली, अवैध वसूली प्रणाली और मनमानी रवैये को लेकर अब स्थानीय लोग उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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