करारी थाना परिसर में खड़ा संदिग्ध जिप्सी वाहन, RTO में नहीं मिला पंजीकरण;थाना प्रभारी कर रहे उपयोग, जांच की उठी मांग

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Kaushambi voice

👉 करारी थाना परिसर में खड़ी संदिग्ध जिप्सी वाहन नंबर UP70A 0846,वाहन का पंजीकरण देश के किसी भी RTO में दर्ज नहीं।

👉 जिप्सी का निजी उपयोग कर रहे हैं थाना प्रभारी विनीत सिंह,वाहन फर्जी नंबर या चोरी की होने की आशंका।

👉 BNS की धारा 318 और 336 के तहत मामला गंभीर अपराध, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 39 व 192 भी लागू।

👉 जनता ने SP व DM से निष्पक्ष जांच की मांग की,थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज।

2 कथित पत्रकारों को दलाली का मिला ठेका,उन्हीं के  माध्यम से होती है वसूली, झूठ मुकदमा दिखाना ,पैसा वसूली करना ,थाने में बैठाए रखना आदि का दिया गया ठेका,चर्चा में है 2 नाम खुलेआम

कौशांबी। जनपद के करारी थाना परिसर में खड़ा एक जिप्सी वाहन इन दिनों चर्चा और संदेह का विषय बना हुआ है। इस वाहन का नंबर UP70A 0846 है, जिसकी जांच जब परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट और विभिन्न राष्ट्रीय वाहन डेटाबेस पर की गई, तो पाया गया कि यह नंबर भारत के किसी भी आरटीओ में पंजीकृत नहीं है। इसका अर्थ यह हुआ कि या तो यह वाहन बिना रजिस्ट्रेशन के चलाया जा रहा है या फिर इस पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई है।

चौंकाने वाली बात यह है कि इस वाहन का निजी उपयोग करारी थाने के प्रभारी विनीत सिंह द्वारा किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि थानेदार के दबंग और प्रभावशाली रवैये के कारण कोई भी इस वाहन के वैधता पर सवाल उठाने का साहस नहीं कर पा रहा है। हालांकि वाहन का नंबर कहीं भी पंजीकृत नहीं है, फिर भी इसका लगातार थाने में उपयोग किया जाना कई सवाल खड़े करता है।

कानूनी दृष्टिकोण से गंभीर मामला – भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 के अनुसार, इस मामले में दो महत्वपूर्ण धाराएं सीधे तौर पर लागू होती हैं।

BNS की धारा 318: कूट रचित दस्तावेज या फर्जी जानकारी के उपयोग को लेकर 3 से 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान।

BNS की धारा 336: किसी लोक सेवक द्वारा अपने पद का दुरुपयोग कर सरकारी संसाधनों का अवैध उपयोग करना या पद की मर्यादा भंग करना। इसके तहत सख्त कानूनी कार्रवाई, सेवा से निलंबन और न्यायिक सजा का प्रावधान है।

इसके अलावा, मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 39 और 192 के तहत बिना पंजीकरण के वाहन सड़क पर चलाना और उसका संचालन करना पूर्णत: गैरकानूनी है। इस स्थिति में वाहन को तत्काल जब्त किया जाना चाहिए तथा चालान के साथ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

क्या है संभावित सच्चाई? – चूंकि वाहन न तो पंजीकृत है और न ही किसी अधिकृत सरकारी अभिलेख में अंकित है, इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि यह वाहन या तो चोरी का हो सकता है, या किसी पुराने वाहन की फर्जी नंबर प्लेट लगाकर इसका अवैध इस्तेमाल किया जा रहा है। वाहन का सत्यापन न होना, और उसका थाना प्रभारी द्वारा निजी उपयोग में लाया जाना, इसे एक गंभीर प्रशासनिक और कानूनी चूक की श्रेणी में डालता है।

कौन करेगा कार्रवाई ? इस मामले में पुलिस अधीक्षक (SP), पुलिस महानिरीक्षक अधीक्षक (ig), जिला मजिस्ट्रेट (DM), आरटीओ अधिकारी और लोकायुक्त स्वतः संज्ञान लेकर जांच करा सकते हैं। यदि प्रमाण सामने आते हैं, तो थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय जांच, वाहन जब्ती, निलंबन और न्यायिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।स्थानीय नागरिकों ने पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने और BNS एवं मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि कानून सबके लिए समान रूप से लागू हो सके और पुलिस विभाग की विश्वसनीयता बरकरार रह सके ।

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