थाना संदीपन घाट में अपराध के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता, अधिकतर मामलों के खुलासे का इंतजार, कार्रवाई के अभाव पर सवालों के घेरे मे थाना प्रभारी की भूमिका
👉 अगस्त में 43, सितंबर में 32 और अक्टूबर के 20 दिनों में 26 मुकदमे दर्ज होने का दावा, चोरी और अपहरण के मामलों में कार्रवाई न होने से थाना प्रभारी पर उठे गंभीर सवाल ,2 माह 20 दिनों में 96 मुकदमे दर्ज, अधिकतर मामलों में खुलासे का इंतजार…
👉 थाना संदीपनघाट क्षेत्र में बढ़े अपराध, पीड़ितो की नहीं लिखी जा रही रिपोर्ट…
👉 मूरतगंज चौकी के बहरा गांव में महिला से मारपीट कर दबंगों ने तोड़ दिया 9 पिलर , रूसमा और ब्रजकली को गया पीटा , थाना प्रभारी नहीं दर्ज कर रहे रिपोर्ट., थाना प्रभारी कर रहे आरोपियो का बचाव आखिर क्यों ….
कौशाम्बी। अमरनाथ झा
कौशाम्बी जिले के संदीपन घाट थाना क्षेत्र में लगातार दर्ज हो रहे आपराधिक मुकदमों ने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में 43, सितंबर में 32 और अक्टूबर के पहले 20 दिनों में 26 मुकदमे दर्ज हुए हैं। इनमें अपहरण, चोरी, छिनैती और फिरौती जैसे गंभीर अपराध भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके बावजूद कई मामलों में न तो आरोपियों की गिरफ्तारी स्पष्ट है और न ही खुलासे की ठोस जानकारी सामने आई है।
लगातार बढ़ते अपराध और लंबित कार्रवाई से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि थाना प्रभारी अपराध नियंत्रण और विवेचनाओं की निगरानी में कितने गंभीर हैं। यदि मुकदमे दर्ज होने के बाद भी पीड़ितों को न्याय, बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भटकना पड़ रहा है, तो थाना स्तर पर जवाबदेही तय करना जरूरी हो गया है। पूरे मामले में थाना प्रभारी की कार्यशैली की उच्चस्तरीय जांच और लापरवाही मिलने पर विभागीय कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।
अगस्त में पांच अपहरण और चार चोरी के मामले
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अगस्त महीने में संदीपन घाट थाने में कुल 43 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें पांच अपहरण और चार चोरी के मामले शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा नाबालिग लड़कियों के लापता होने की घटनाएं भी सामने आईं। चोरी की घटनाओं में बदलेपुर निवासी मानती देवी के घर लाखों रुपये के सामान की चोरी का मामला प्रमुख है। दो और तीन अगस्त की रात हुई इस घटना में गुड्डू के नामजद होने की बात कही गई है। मामले में अपराध संख्या 182/26 दर्ज बताई गई है।
छह अगस्त को सहायता पावर हाउस के पास हड्डी मिल के निकट एक मकान से फार्मा कंपनी के 26 पीस सामान चोरी होने का मामला दर्ज हुआ। इसकी अपराध संख्या 188/26 बताई गई है। वहीं, 13 अगस्त को श्याम नारायण तिवारी के घर का ताला तोड़कर स्टार्टर और बैटरी चोरी किए जाने की शिकायत दर्ज हुई। इस मामले में अपराध संख्या 201/26 बताई गई है। 19 अगस्त को क्रांति देवी के इंजन से करीब 30 किलो काला पाइप और इंजन का अन्य सामान चोरी होने का मामला भी दर्ज हुआ, जिसकी अपराध संख्या 209/26 बताई गई है।
इन मामलों में पुलिस की अब तक की कार्रवाई, बरामदगी और गिरफ्तारी का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक न होना थाना प्रभारी की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। यदि नामजदगी के बावजूद आरोपी खुले घूम रहे हैं, तो यह पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी है।
नाबालिगों के लापता होने के मामले भी चर्चा में
अगस्त में नाबालिगों के लापता होने और उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाने के आरोपों से जुड़े कई मामले दर्ज होने की जानकारी है। आठ अगस्त को धनी निवासी मां गौतम की 16 वर्षीय बहन को लवकुश पुत्र नंदलाल निवासी उज्जैनी खालसा द्वारा ले जाने का आरोप लगाया गया। इस मामले में अपराध संख्या 179/26 दर्ज बताई गई है।
19 अगस्त को आंचल पुत्री श्रवण कुमार घर से दवा लेने मूरतगंज गई थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। उसकी उम्र करीब 16 वर्ष बताई गई है। इस मामले में अपराध संख्या 205/26 दर्ज होने की जानकारी है। इसी दिन रामबाबू पटेल की 18 वर्षीय बेटी के लापता होने का मामला भी सामने आया, जिसकी अपराध संख्या 211/26 बताई गई है।
20 अगस्त को अलामचंद स्थित माहेश्वरी इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में पढ़ने वाली 14 वर्षीय आकांक्षा घर से स्कूल जाने के लिए निकली, लेकिन वापस नहीं लौटी। इस मामले में अपराध संख्या 206/26 दर्ज बताई गई है। वहीं, 22 अगस्त को मुजाहिदपुर निवासी सुनीता सरोज की 16 वर्षीय बेटी को नवनीत कुमार पटेल निवासी इब्राहिमपुर द्वारा ले जाने का आरोप लगाया गया। शिकायत में 10 हजार रुपये साथ ले जाने की बात भी कही गई है। इस मामले में अपराध संख्या 218/26 दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है। ऐसे मामलों में देरी या लापरवाही को सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता। यदि इन प्रकरणों में अब तक ठोस प्रगति नहीं हुई है, तो थाना प्रभारी समेत जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
सितंबर में तीन अपहरण, एक चोरी और फिरौती,एक छिनैती का मामला
सितंबर 2026 में संदीपन घाट थाने में कुल 32 मुकदमे दर्ज होने का दावा किया गया है। इनमें तीन अपहरण, एक चोरी, एक छिनैती और एक फिरौती का मामला शामिल बताया गया है। गंभीर अपराधों की इस श्रेणी के बीच यह जानना महत्वपूर्ण है कि संबंधित मामलों में पुलिस ने कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया, कितनी बरामदगी हुई और कितने मामलों में विवेचना पूरी हो चुकी है।
यदि इतने गंभीर मामलों के बावजूद पुलिस की कार्रवाई केवल मुकदमा दर्ज करने तक सीमित है, तो यह थाना प्रभारी की निगरानी और नेतृत्व क्षमता पर सीधा सवाल है। उच्चाधिकारियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि लंबित मामलों की समीक्षा कब हुई, विवेचकों से क्या प्रगति रिपोर्ट ली गई और दोषियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।
अक्टूबर के 20 दिनों में 26 मुकदमे
अक्टूबर के शुरुआती 20 दिनों में थाने में 26 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी दी गई है। इनमें चार अपहरण और पांच चोरी के मामले शामिल बताए गए हैं। कम समय में दर्ज हुए इन मुकदमों ने क्षेत्र में अपराध नियंत्रण और पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
लगातार सामने आ रहे मामलों के बावजूद यदि अपराधियों में पुलिस का भय नहीं दिख रहा है, तो यह थाना स्तर पर कानून-व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। ऐसे हालात में थाना प्रभारी को केवल आंकड़े प्रस्तुत करने के बजाय अपराधों के खुलासे और आरोपियों की गिरफ्तारी का ठोस हिसाब देना चाहिए।
थाना प्रभारी पर कार्रवाई की उठी मांग
तीन महीनों के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि संदीपन घाट थाना क्षेत्र में चोरी और अपहरण जैसे गंभीर अपराधों की शिकायतें लगातार दर्ज हो रही हैं। ऐसे में केवल मुकदमे दर्ज होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी, चोरी गए सामान की बरामदगी और लापता लोगों की सुरक्षित बरामदगी भी जरूरी है।
यदि पुलिस इन बुनियादी जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल रहती है, तो थाना प्रभारी को पद पर बनाए रखने का औचित्य भी सवालों के घेरे में आता है। उच्चाधिकारियों को मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यह तय करना चाहिए कि किन मामलों में लापरवाही हुई, किन विवेचनाओं में अनावश्यक देरी हुई और किन अधिकारियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया। दोष सिद्ध होने पर थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन समेत कठोर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि पीड़ितों को न्याय और क्षेत्र के लोगों को सुरक्षा का भरोसा मिल सके।
बता दे कि थाना प्रभारी नागेन्द्र कुमार नागर का आम जनता और पीड़ितो के प्रति व्यव्हार भी संतोषजनक नहीं है , फरियादियों को डांटकर बात करना और उनको थाने से भक्तदेन आम बात चर्च का विषय बन गया है। रूसमा देवी को एसपी कार्यालयिम शिकायत करने गई थी जिसको डांट दिया राउर उसकी घटना को झूठी बताया थाना प्रभारी ने और आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। दबंगों ने उसके क्षेत्रमें लगे 9 पिलर तोड़ दिया और उसके साथ मारपीट की गई है । मंती देवी निवासी बदलेपुर के यहां चोरी हुई है महीने अड़ शिकायत करने गई तो उसको भी डांट कर भगाया गया है। ऐसे तमाम लोगों की शिकायत है कि थाना प्रभारी का रवैया ठीक नहीं है।
हालांकि, दर्ज मुकदमों की संख्या और उनके खुलासे की वास्तविक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है। संबंधित मामलों में पुलिस का पक्ष और कार्रवाई का विवरण सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कितने मामलों का खुलासा हो चुका है और कितने मामलों में कार्रवाई लंबित है। फिलहाल जब उस मामले में थाना प्रभारी संदीपन घाट से फोन कर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा है।
