यूपी पुलिस विभाग सिपाहियों से 8 लाख जमा करवा रहा:परीक्षा देकर दरोगा बने; विभाग की शर्त- ट्रेनिंग-सैलरी का खर्च लौटाना होगा

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यूपी पुलिस विभाग सिपाहियों से 8 लाख जमा करवा रहा:परीक्षा देकर दरोगा बने; विभाग की शर्त- ट्रेनिंग-सैलरी का खर्च लौटाना होगा

यूपी में पुलिस विभाग के करीब 1700 जवान सिपाही की नौकरी छोड़ना चाहते हैं। इनका सिलेक्शन दरोगा, कंप्यूटर ऑपरेटर के अलावा अन्य भर्तियों में हो चुका है। इनमें से 75% अभ्यर्थियों का सिलेक्शन तो दरोगा के पद पर ही हुआ है। अब पुलिस विभाग इन्हें रिलीविंग लेटर नहीं दे रहा। विभाग की शर्त है कि ट्रेनिंग में हुए खर्च और वेतन की रकम लौटानी होगी। इस कंडीशन में हर जवान को औसतन करीब 8 लाख रुपए विभाग को वापस देने होंगे। पुलिस विभाग में इतनी बड़ी संख्या में जवानों पर रिकवरी डालने का यह पहला मामला माना जा रहा है। एक बैच के जवानों के 2 पदों पर सिलेक्शन से फंसा पेंच यूपी पुलिस ने 2023 में 60 हजार 244 पदों पर भर्ती निकाली थी। करीब 57 हजार अभ्यर्थी परीक्षा में सिलेक्ट हो गए। इनकी ट्रेनिंग 21 जून, 2025 से शुरू हुई। ट्रेनिंग 20 अप्रैल, 2026 तक अलग-अलग रिक्रूट सेंटरों में चलती रही। इस दौरान यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने दरोगा (सब-इंस्पेक्टर) के 4 हजार 543 पद, कंप्यूटर ऑपरेटर और लेखपाल के पदों पर भर्तियां निकालीं। इसमें सिपाही की ट्रेनिंग ले रहे हजारों जवानों ने अप्लाई कर दिया। जुलाई- 2026 में दरोगा भर्ती का फाइनल रिजल्ट आया। साथ ही, कंप्यूटर ऑपरेटर और दूसरी भर्तियों के नतीजे भी आ गए। इनमें सिपाही की ट्रेनिंग ले रहे करीब 1700 जवानों के नाम मेरिट लिस्ट में थे। इसे बागपत के उदाहरण से समझिए। यहां 21 सिपाहियों का सिलेक्शन दरोगा पद के लिए हुआ। ऐसे ही गाजीपुर, जौनपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज, कानपुर, लखनऊ, मुरादाबाद, वाराणसी, आगरा शहरों के जवानों के नाम लिस्ट में थे। बॉन्ड में लिखा- प्रोबेशन पूरा किए बिना नौकरी छोड़ी, तो वेतन लौटाना होगा ये जवान सिपाही की नौकरी छोड़ना चाहते हैं। लेकिन, पुलिस विभाग के एक नियम ने पेंच फंसा दिया है। इसमें विभाग ने कहा- सिपाही की नौकरी जॉइन करते समय अभ्यर्थियों से एक बॉन्ड साइन कराया गया था। इसमें लिखा था कि ट्रेनिंग और प्रोबेशन पूरे किए बिना नौकरी छोड़ने पर ट्रेनिंग पर हुआ खर्च और वेतन-भत्ते लौटाने होंगे। ट्रेनिंग का खर्च और प्रोबेशन के दौरान मिले वेतन-भत्ते मिलाकर कुल रकम करीब 8 लाख रुपए हो रही है। चयनित जवानों को यह पैसा उसी जिले के पुलिस कप्तान (SP/SSP व पुलिस कमिश्नर) के कार्यालय में जमा करना होगा, जहां उनकी तैनाती है। अगर पैसा जमा नहीं किया गया, तो उनका इस्तीफा मंजूर नहीं होगा और मामला पेंडिंग रहेगा। 1700 जवानों को विभाग को करीब 136 करोड़ रुपए वापस करने हैं। ऐसे में जवान रिकवरी की रकम में छूट या राहत देने की मांग कर रहे हैं। ₹8 लाख रुपए वेतन-भत्ते का गणित समझिए 1. ट्रेनिंग का खर्च (लगभग ₹2.58 लाख) पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह के मुताबिक, ट्रेनिंग के दौरान एक सिपाही पर रोजाना औसतन 863 रुपए खर्च होते हैं। इसमें बैरक (रहने की जगह), खाना, यूनिफॉर्म, ट्रेनिंग का सामान, हथियार, स्टाफ और शिक्षकों का वेतन शामिल है। 10 महीने यानी करीब 300 दिन की ट्रेनिंग में एक सिपाही पर करीब 2 लाख 58 हजार रुपए खर्च होते हैं। 2. वेतन और भत्ते (लगभग ₹5.42 लाख) नियम के मुताबिक, सिपाही भर्ती होने के बाद 2 साल तक प्रोबेशन पर रहता है। इस दौरान उसे मूल वेतन के साथ महंगाई भत्ता (DA), वर्दी भत्ता और दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं। प्रोबेशन पूरा होने से पहले नौकरी छोड़ने पर इस दौरान मिले वेतन और भत्ते वापस करने होते हैं। इसके अलावा प्रोविडेंट फंड और पेंशन फंड में कटा पैसा भी लौटाना होता है। ट्रेनिंग का खर्च, प्रोबेशन के दौरान मिले वेतन-भत्ते और पेंशन को मिलाकर कुल रकम करीब 8 लाख रुपए हो रही है। पुलिस अधिनियम 1861 की धारा- 9 के मुताबिक, कोई पुलिसकर्मी बिना अनुमति या दो महीने का लिखित नोटिस दिए ड्यूटी नहीं छोड़ सकता। इस्तीफा मंजूर करना नियुक्ति अधिकारी के अधिकार में है। इसके साथ जॉइनिंग के समय साइन किए गए बॉन्ड की शर्तें भी लागू होती हैं। पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह लंबे समय तक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। वह कहते हैं- यह नियम केवल पुलिस ही नहीं, हर सरकारी विभाग में लागू होता है। प्रोबेशन पीरियड का मतलब ही यह है कि सरकार आपको तैयार कर रही है। आपसे नियमित काम नहीं ले रही। इसलिए उस दौरान हुआ खर्च वापस लिया जाता है। सिपाहियों ने कहा- ट्रेनिंग का खर्च ले लो, सैलरी न मांगें चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि वे किसी प्राइवेट कंपनी या दूसरे राज्य में नौकरी करने नहीं जा रहे। वे यूपी सरकार की ही दूसरी और बेहतर नौकरी में जा रहे हैं। सिपाहियों का कहना है कि वे ट्रेनिंग का खर्च यानी 2.58 लाख रुपए जमा करने को तैयार हैं। लेकिन, 2 साल का पूरा वेतन वापस मांगना ठीक नहीं, क्योंकि इस दौरान उन्होंने ड्यूटी भी की है। ज्यादातर अभ्यर्थी साधारण परिवारों से आते हैं। अचानक 8 लाख रुपए का इंतजाम करना उनके और उनके परिवारों के लिए बहुत मुश्किल है। हालांकि, पुलिस मुख्यालय का कहना है कि स्थापना विभाग का पुराना आदेश लागू रहेगा। विभाग के मुताबिक, दूसरी नौकरी मिलना अभ्यर्थी के लिए फायदे की बात है। इसलिए इस आधार पर बॉन्ड की शर्तों में छूट नहीं दी जा सकती। अगर इन सिपाहियों ने विभाग से आई रिकवरी का रुपया नहीं दिया, तो वे दूसरे पदों पर जॉइनिंग नहीं ले सकेंगे। सुलखान सिंह कहते हैं कि विभाग से नौकरी छोड़ने पर और पैसे जमा न करने पर जिलाधिकारी के माध्यम से भी रिकवरी कराई जा सकती है। फिर से खाली होंगे 1700 पद यूपी पुलिस ने 60 हजार 244 पदों की भर्ती पर करोड़ों रुपए खर्च किए। पहले ही 3 हजार से अधिक सिपाहियों ने जॉइन नहीं किया था। अब 1700 ट्रेंड सिपाही अचानक कम हो जाएंगे, तो वे पद फिर से खाली हो जाएंगे। यानी सरकार को उन पदों पर फिर से नई भर्ती और ट्रेनिंग का खर्च उठाना पड़ेगा। ————————– ये खबर भी पढ़ें- UP की सरकारी भर्तियों में ‘वेटिंग लिस्ट’ नहीं, खाली रह जाते हैं पद; 6 राज्यों में 25% तक बनती है ‘एक्स्ट्रा लिस्ट’ यूपी में सरकारी नौकरियों की भर्ती में ‘वेटिंग लिस्ट’ का नियम नहीं है। इससे हर भर्ती में हजारों पद खाली रह जाते हैं। यूपी में भी सरकारी भर्तियों में वेटिंग लिस्ट लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। इसे लेकर अभ्यर्थी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मिल चुके हैं। पढ़िए पूरी खबर…

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