मायावती भतीजे पर भड़कीं, फिर पार्टी से निकाला:कहा- आकाश को ससुर ज्यादा प्रिय, डबल माइंड हो गए; समधी ने संन्यास में देरी की
बसपा सुप्रीमो मायावती भतीजे आकाश आनंद पर फिर भड़क गई हैं। उन्होंने एक बार फिर पार्टी से निकाल दिया है। बुधवार को उन्होंने आकाश की पार्टी में वापसी के लिए उनके ससुर और पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास की शर्त रखी थी। इसके करीब 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया। कहा- संन्यास तो छोटी बात है। बहन जी के लिए जान भी दे सकता हूं। इसके बावजूद मायावती नहीं मानीं और आकाश को बाहर का रास्ता दिखा दिया। गुरुवार सुबह 10 बजे X पर मायावती ने लिखा- आकाश को अपने ससुर से ज्यादा लगाव था। अब वह डबल माइंड हो गए हैं। 3 सितंबर से उन्होंने मेरी पोस्ट को रिपोस्ट तक नहीं किया था। अगर वह पार्टी में स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। इसलिए आज से उन्हें पार्टी से आजाद कर दिया गया है। उनके ससुर ने इस्तीफे में देरी कर दी। 3 साल में यह दूसरा मौका है, जब मायावती ने भतीजे आकाश को पार्टी से बाहर निकाला। मायावती ने 7 दिन पहले पार्टी के नंबर दो पद राष्ट्रीय संयोजक से आकाश को हटाया था। तब कहा था- आकाश को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। आखिर मायावती इतनी नाराज क्यों हुईं पिछले 24 घंटे के 3 बड़े घटनाक्रम 1- मायावती ने आकाश के ससुर के सामने शर्त रखी मायावती ने बुधवार को अशोक सिद्धार्थ के सामने शर्त रखी कि वे राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें। ऐसा होने पर आकाश आनंद स्वतंत्र होकर काम कर सकेंगे। ऐसे में फिर से उन्हें पुरानी जिम्मेदारियां सौंप सकती हूं। उन्होंने दोपहर 2:46 बजे X पर लिखा- अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी के मिशन से ज्यादा अपनी निजी और पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं को महत्व दिया। इसका सीधा खामियाजा उनके दामाद आकाश आनंद को भुगतना पड़ा है। 2- 17 घंटे बाद आकाश के ससुर का इस्तीफा, मायावती को गुरु बताया मायावती के इस बयान के 17 घंटे बाद अशोक सिद्धार्थ ने गुरुवार सुबह 7 बजे राजनीति छोड़ने का ऐलान किया। उन्होंने लिखा- मैं इसी वक्त राजनीतिक और सामाजिक जीवन से संन्यास ले रहा हूं। मेरा जीवन बहनजी का ऋणी है। उन्होंने आकाश जी को गुमराह करने के आरोप को गलत बताया। 3- समधी के इस्तीफे के 3 घंटे बाद मायावती ने भतीजे को निकाला समधी के इस्तीफे के 3 घंटे बाद मायावती ने भतीजे आकाश को पार्टी से निकाल दिया। उन्होंने कहा- अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेना ‘देर आए, दुरुस्त आए’ जैसा है। अगर उन्हें आकाश के भविष्य की चिंता होती तो वे कल ही संन्यास ले लेते। इससे आकाश का पार्टी और आंदोलन के लिए सक्रिय होकर काम करना तय हो सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे लगता है कि अशोक सिद्धार्थ की महत्वाकांक्षा अभी भी बनी हुई है। आकाश का भी अपने ससुर से लगाव कम नहीं हुआ है। उन्होंने मेरी X पोस्ट तक रिपोस्ट नहीं की, जबकि पहले वह मेरी पोस्ट रिपोस्ट करके अपनी वफादारी दिखाते रहे हैं। इससे लगता है कि अशोक और आकाश को पार्टी और आंदोलन से ज्यादा अपने निजी और पारिवारिक हितों की चिंता है। जबकि बीएसपी ने दोनों को आगे बढ़ाया, पहचान दी और जिम्मेदारियां सौंपीं। इसके लिए दोनों जितना आभार मानें, कम है। आकाश को पार्टी से ज्यादा रिश्तों की चिंता है, तो वे पार्टी का भला कैसे कर सकते हैं? इसलिए 3 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारियों से मुक्त करने के बाद अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह आजाद कर दिया गया है। मायावती ने आकाश को कब-कब जिम्मेदारी दी और कब हटाया? जानिए ससुर को 2 अगस्त को पार्टी से निकाला, कहा था- चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरे इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- आकाश के छोटे भाई ईशान को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं मायावती आकाश को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के बाद यह बात लगभग साफ हो गई है कि मायावती ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। साथ ही, अपना उत्तराधिकारी बना सकती हैं। 6 सितंबर को मायावती ने अनुभवहीन ईशान को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर इस तरफ इशारा भी कर दिया है। हालांकि, ईशान को अभी चुनावी राज्य के लिए महत्वपूर्ण यूपी-उत्तराखंड से दूर रखा गया है। एक्सपर्ट मानते हैं कि मायावती अभी संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपकर ईशान की क्षमता परखना चाहती हैं। अगर वे उनकी कसौटी पर खरे उतरे तो यूपी-उत्तराखंड के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती हैं। सरकारी नौकरी छोड़कर बसपा से जुड़े अशोक सिद्धार्थ, राज्यसभा सांसद रहे आकाश ने 2017 में राजनीति में की थी एंट्री ————————————— ये खबर भी पढ़ें- मायावती ने ‘अनुभवहीन’ ईशान को जिम्मेदारी क्यों सौंपी:क्या चुनाव में लॉन्च करेंगी, BSP का उत्तराधिकारी कौन होगा बसपा से आकाश आनंद के बाहर किए जाने और ईशान आनंद की एंट्री ने पार्टी के भविष्य को दोराहे पर खड़ा कर दिया है। बसपा प्रमुख मायावती ने पहले आकाश को आगे बढ़ाकर नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का मॉडल पेश किया। फिर अचानक अपरिपक्व बताकर पर कतर दिए। साथ ही सबको चौंकाते हुए उन्होंने अनुभवहीन ईशान को 19 राज्यों की संगठनात्मक समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपकर नई बहस छेड़ दी है। पढ़ें पूरी खबर
