बेटे का पैर मिला, अब मलबे में शरीर की तलाश:कौशांबी में ब्लास्ट के बाद सदमे में लोग, बच्ची जिंदा बची पर बोल नहीं पा रही

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बेटे का पैर मिला, अब मलबे में शरीर की तलाश:कौशांबी में ब्लास्ट के बाद सदमे में लोग, बच्ची जिंदा बची पर बोल नहीं पा रही

मेरा बेटा सुबह 8 बजे कहकर आया था कि काम पर जा रहे हैं। यहां बूंदी बनाने का काम करता था। ये जो बाइक पड़ी है, मेरे बेटे की है। धमाके से इतनी दूर उड़कर आई है। हम कल से प्रयागराज-कौशांबी में बेटे को ढूंढ रहे हैं। मॉर्च्युरी में बेटे का एक पैर मिला है। उसकी भी प्रशासन पुष्टि नहीं कर रहा। ये दर्द है कौशांबी में असलहा फैक्ट्री में ब्लास्ट के बाद लापता दिव्यांग सुनील के पिता का। ये हाल सिर्फ सुनील के पिता का नहीं है, अपनों की तलाश में दर्जनों लोग भटक रहे हैं। 31 अगस्त की सुबह से लोग रोज की तरह अपने-अपने घरों से काम पर निकले थे। जो घरों में थे वो काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। धमाका हुआ तो काफी देर तक लोगों को समझ नहीं आया कि हुआ क्या है। जब समझ आया तो बाहर भागे। मलबा हटा-हटाकर अपनों को तलाश रहे थे। कोई बचाव टीम के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहा था तो कोई बदहवास इधर-उधर भाग रहा था। एक-एक करके झुलसे हुए लोगों को चारपाई पर रखकर लोग हॉस्पिटल की तरफ भाग रहे थे। दैनिक भास्कर ने वहां मौजूद लोगों से बात की पढ़िए यह खास रिपोर्ट… पहले मामला समझिए… सोमवार को प्रयागराज और कौशांबी बॉर्डर पर एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया। इस हादसे में फैक्ट्री के आसपास के घरों में रहने वाले 8 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई। रेलवे कर्मी का पूरा परिवार खत्म हो गया है। घर सिर्फ एक बेटी जिंदा बची। एक परिवार में मां घायल है, जबकि 4 बच्चों की मौत हो गई है। विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी फैक्ट्री जमींदोज हो गई। 100 मीटर के दायरे में बने 8 मकान क्षतिग्रस्त हो गए। दीवारों में 8 फीट लंबे और चौड़े छेद हो गए। 5-6 मकान पूरी तरह ढह गए। धमाके की आवाज 2 किमी दूर तक सुनाई दी। कुछ ही देर में धुएं का गुबार चारों तरफ छा गया। धमाके के बाद लोगों ने क्या बताया पढ़िए… बेटे की तलाश में दो जिलों में भटक रहा पिता ब्लास्ट के बाद चारो तरफ फैले मलबे को हटाकर सरजू दास अपने बेटे सुनील को ढूंढ रहे हैं। उनसे बात की तो बोले कि कल से कभी प्रयागराज जाते हैं कभी कौशांबी आते हैं। बेटा तो रोज की तरह सुबह काम पर निकला था। मरने वालों और घायलों में उसका नाम नहीं है। मोर्चरी में हमें बेटे का पैर मिला है। मेरी बड़ी बेटी ने सुनील को पाला है। उसने पहचान लिया अपने भाई का पैर। अब मलबा हटाकर बेटे को ढूंढ रहे हैं। बुलडोजर से भी मलबा हटाया जा रहा है, हो सकता है बेटा मिल जाए। सुनील की पत्नी रेखा और 5 बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। 4 बच्चों को खोकर पिता बोला- मेरा कुनबा खत्म हो गया हादसे में गया प्रसाद के 4 बच्चे जाह्नवी, आदित्य, अमित और रवि की भी मौत हुई है। गया प्रसाद की पत्नी अनीता (42) घायल हैं। उन्होंने मामले में फैक्ट्री मालिक के खिलाफ FIR लिखाई है। कहा- हादसे में मेरा पूरा कुनबा समाप्त हो गया। खाना खाने आए बैंककर्मी का परिवार खत्म इसी तरह, रेलकर्मी विक्रम खाना खाने घर आए थे। घटना में विक्रम, पत्नी अंजू, बेटे अंश और शिवांश की जान चली गई। सबसे बड़ी बेटी संजना किराना की दुकान में कुछ सामान लेने गई थी, जिससे वह बच गई। वहीं, मंजीत कुमार के दो बच्चों प्रियांजलि और प्रवीन सिंह की भी मौत हो गई। बच्ची बोली- मेरे मां-पापा और भाई सब दबे हैं पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट में आसपास के 5 से 7 मकान टूट गए। इस दौरान एक बच्ची मकान के मलबे में दबी रही। करीब 15 मिनट बाद किसी तरह बचकर बाहर आई। बोली- मेरे दो छोटे भाई और मम्मी-पापा का पता नहीं चल रहा है। उन्हें मैंने भागते समय नहीं देखा। आज बच्ची को डिस्चार्ज करके घर भेज दिया गया। हादसे का असर ऐसा है कि बच्ची कुछ भी बोल नहीं पा रही है। पड़ोसी बोला- मैं परिवार को लेकर भागा पटाखा फैक्ट्री से 50 मीटर दूर रहने वाले शिवम गुप्ता बताते हैं- सुबह करीब 11:35 बजे मैं नहा रहा था। पहले बिजली चली गई। मुझे लगा कि फॉल्ट होगा। इसके बाद धमाके शुरू हो गए, लेकिन हमें पता ही नहीं चला। पीछे मेरा मकान भी गिर गया, लेकिन मुझे इसका पता नहीं चला। इसके बाद जैसे ही मुझे पता चला, मैं अपने घर में मौजूद 2 भांजियों, भाभी और बहन को लेकर बाहर की तरफ भागा। इससे हम लोग बच गए। बाकी आसपास के मकानों में रहने वाले लोग चपेट में आ गए। उस फैक्ट्री में 6-7 महीने से पटाखे बन रहे थे। पहले सामने वाली फैक्ट्री में पटाखे बनते थे। उसे सील कर दिया गया, तो इधर बनाने लगे थे। बुजुर्ग बोला- सब कुछ बर्बाद हो गया एक बुजुर्ग मुनीश कुमार पांडे ने बताया- पटाखा फैक्ट्री के अगल-बगल जितने मकान थे, सब गिर चुके हैं। यहीं मेरा मकान था। उसमें ट्यूबवेल भी था, लेकिन सब बर्बाद हो गया। वहीं, अजय सिंह ने बताया- मुझे जैसे ही पता चला कि जहां मेरे भाई काम कर रहे हैं, वहां विस्फोट हो गया, तो हम भागकर यहां आए। यहां पता चला कि भाई की मौत हो गई है। मेरे भाई का नाम ज्ञान सिंह है। बगल में बूंदी बनाने का काम हो रहा था। वह वहीं काम कर रहा था। महिला बोली- पूरी बस्ती-बच्चों का नाश कर दिया प्रयागराज में स्वरूप रानी अस्पताल पहुंची रानी ने बताया- बिजली का खंभा गिरने के बाद फैक्ट्री में रखे बारूद में तेज धमाका हुआ। वहां पटाखा बनाने या बम बनाने की कोई फैक्ट्री थी। बताया जा रहा है कि बिजली का खंभा वहां गिरा। चिंगारी से पूरा ब्लास्ट हुआ है। उसने पूरी बस्ती और हमारे बच्चे लोग का नाश कर दिया है। आसपास के लोगों ने फैक्ट्री चलाने से मना किया था प्रत्यक्षदर्शी महेंद्र सिंह भारती ने बताया कि यहां कोई पटाखा का कारखाना था। बगल में जो गद्दे का गोदाम था, उसी में वे कारखाना चलाते थे। वो रात में चलाते थे या दिन में, हम लोगों को इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इसके बावजूद कई बार मना किया गया और हर व्यक्ति ने बोला कि यहां यह काम न किया जाए। फिर भी जान-बूझकर यह काम यहां चलाया जा रहा था। प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप इसमें प्रशासन की भी मिलीभगत थी। 2024 में भी ऐसा ही एक मामला हुआ था, तब भी यह पकड़ा गया था और इसका चालान हुआ था। इसके बावजूद उसने यहां इतना बड़ा गोदाम बनवा रखा था। धमाके से पूरा गोदाम फट गया। हादसे के बाद हमारे गांव के करीब 10 लोगों ने मिलकर समझदारी दिखाई और 10 शवों को बाहर निकाला। घटना के 2 घंटे बाद प्रशासन जेसीबी बुला पाया। 2024 में 12 लोगों की मौत से दहल उठा था भरवारी
25 फरवरी 2024 को भरवारी कस्बे के खल्लाबाद मोहल्ले में पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट से पूरा इलाका दहल उठा था। सुबह करीब 11 बजे हुए धमाके में फैक्ट्री मालिक समेत सात लोगों की मौके पर मौत हो गई थी। गंभीर रूप से झुलसे पांच अन्य मजदूरों ने प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस हादसे में कुल 12 लोगों की जान गई थी। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि कई मजदूरों के चीथड़े उड़ गए। शव और शरीर के अंग करीब 200 मीटर दूर खेतों तक बिखरे मिले थे। हादसे के बाद फैक्टरी में करीब चार घंटे तक रुक-रुक कर धमाके होते रहे। आग बुझाने और अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए कौशांबी, फतेहपुर और प्रयागराज की दमकल टीमें कई घंटे तक जुटी रहीं। इतनी बड़ी घटना के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया और दोबारा वैसी ही घटना हो गई। पटाखा फैक्ट्री विस्फोट की दिल दहला देने वाली 5 तस्वीरें देखिए- ——————– यह खबर भी पढ़ें… कौशांबी में 11 मौतों का जिम्मेदार कौन?:2 साल पहले लाइसेंस सस्पेंड, जेल गया था मालिक; फिर कैसे चलती रही पटाखा फैक्ट्री कौशांबी में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 11 लोगों की मौत हो गई। इन मौतों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए। सबसे बड़ा सवाल है, आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? जिस फैक्ट्री में धमाका हुआ, उसका लाइसेंस 2 साल पहले ही सस्पेंड हो चुका था। तब मालिक को अवैध विस्फोटक रखने के आरोप में जेल भी भेजा गया था। पढ़ें पूरी खबर…

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