रक्षाबंधन पर बाबा विश्वनाथ को सबसे पहले बांधी गई राखी:महादेव स्वरूप का फूलों के रक्षाबंधन से श्रृंगार, भगवान को राखी बांधने पहुंच रहीं महिलाएं
सावन पूर्णिमा पर आज रक्षाबंधन का महापर्व मनाया जा रहा है। विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती के दौरान बाबा विश्वनाथ को सबसे पहले राखी बांधी गई। बाबा विश्वनाथ को महादेव स्वरूप का रक्षाबंधन मंगला आरती में बांधा गया। इसके अलावा फूलों से बने रक्षाबंधन से उनका श्रृंगार किया गया। इसके बाद बाबा को राखी चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर पहुंचीं। श्रद्धालुओं को गर्भगृह के बाहर निर्धारित व्यवस्था के तहत जलाभिषेक और दर्शन कराया जा रहा है। शुक्रवार शाम बाबा विश्वनाथ सपरिवार झूले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत आवास से बाबा की पंचबदन चल रजत प्रतिमा की पालकी यात्रा निकलेगी। गाजे-बाजे और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच प्रतिमा को काशी विश्वनाथ धाम ले जाया जाएगा। यहां बाबा के साथ माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय भी झूले पर विराजमान होंगे। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभूशरण ने बताया कि रक्षाबंधन के दिन सप्तऋषि आरती से पहले बाबा की चल रजत प्रतिमा का झूलनोत्सव कराया जाएगा। बाबा सपरिवार झूले पर विराजमान होकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। यह विशेष दर्शन शयन आरती तक जारी रहेगा। करीब छह घंटे तक भक्तों को बाबा के सपरिवार झूले वाले स्वरूप के दर्शन का अवसर मिलेगा। परंपरा के अनुसार टेढ़ी नीम स्थित पूर्व महंत आवास पर बाबा की पंचबदन प्रतिमा का पूजन और शृंगार किया जाता है। इसके बाद पालकी यात्रा धाम की ओर रवाना होती है। मंदिर पहुंचने पर बाबा की चल प्रतिमा को झूले पर विराजमान कर पूजा-अर्चना की जाती है। अतीत में भी इस अवसर पर बाबा के सपरिवार झांकी दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। वहीं सावन के अंतिम दिन रक्षाबंधन के चलते काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई है। मंदिर क्षेत्र में प्रवेश और निकास के लिए निर्धारित व्यवस्था लागू है। पंचद्वार से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा है। भीड़ को नियंत्रित करने के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पूरे क्षेत्र की ड्रोन से निगरानी की जा रही है। 2 तस्वीरें देखिए…
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