कौशाम्बी में 134 प्राइवेट अस्पतालों का ‘हेल्थ सिंडिकेट’! मानक ताक पर, मरीजों की जान जोखिम में?

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👉 कौशाम्बी में 134 अस्पतालों का ‘हेल्थ सिंडिकेट’, मानकों की खुली धज्जियां…जिला अस्पताल के सामने कई दर्जन प्राइवेट अस्पताल है संचालित…
👉 बिना लाइसेंस और सुविधाओं के चल रहे अस्पताल, जोखिम में है मरीजों की जान…RTI से खुलेगा बड़ा राज—कितने अस्पताल वैध, कितने अवैध ?

कौशाम्बी। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लिनिकों की एक विस्तृत सूची सामने आई है, जिसमें कुल 134 संस्थान चिन्हित किए गए हैं। इस सूची ने यह संकेत दिया है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है, जिसकी निगरानी और वैधता दोनों ही संदेह के घेरे में हैं।
मंझनपुर, सिराथू, करारी, मूरतगंज, भरवारी और आसपास के कस्बों में फैले इन संस्थानों में जनता हॉस्पिटल, लाइफ लाइन हॉस्पिटल, फॉर्च्यून हॉस्पिटल, अपोलो हॉस्पिटल, मैक्स हॉस्पिटल, सुमित्रा मेमोरियल हॉस्पिटल जैसे नाम शामिल हैं। लेकिन सूची का गहराई से विश्लेषण करने पर यह सामने आता है कि बड़ी संख्या में छोटे क्लिनिक, पाली क्लिनिक और पैथोलॉजी सेंटर भी बिना स्पष्ट श्रेणीकरण के संचालित हो रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये सभी संस्थान क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट और स्वास्थ्य विभाग के मानकों पर खरे उतरते हैं? नियमों के अनुसार किसी भी अस्पताल को संचालित करने के लिए पंजीकरण, प्रशिक्षित डॉक्टर, पर्याप्त स्टाफ, इमरजेंसी सुविधा और आवश्यक उपकरण अनिवार्य हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर इससे अलग नजर आती है।
स्थानीय सूत्रों और पूर्व में आई शिकायतों के मुताबिक कई अस्पतालों में:
बिना MBBS/स्पेशलिस्ट डॉक्टर के इलाज
ऑक्सीजन, ICU या बेसिक इमरजेंसी सुविधा का अभाव
अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा मरीजों का उपचार
नियमों के विपरीत भर्ती और ऑपरेशन
जैसी गंभीर अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। कुछ मामलों में तो मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद भी बड़े शहरों के लिए रेफर कर दिया जाता है, जिससे समय और जान दोनों का जोखिम बढ़ जाता है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतनी बड़ी संख्या में संस्थानों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की निरीक्षण प्रक्रिया पर पारदर्शिता नहीं दिखती। यदि नियमित जांच होती, तो क्या इतने बड़े पैमाने पर अनियमितताएं संभव थीं? यही सवाल अब आम जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
इस पूरे मामले में अब सूचना का अधिकार (RTI) एक अहम हथियार बनकर उभर रहा है। RTI के माध्यम से यह जानने की कोशिश की जा रही है कि:
कितने अस्पताल विधिवत पंजीकृत हैं
किन-किन का हाल में निरीक्षण हुआ
कितनों पर कार्रवाई की गई
कितने बिना लाइसेंस संचालित हैं
यदि इन सवालों के जवाब सामने आते हैं, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की असल तस्वीर उजागर हो सकती है।

प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल चुप्पी बनी हुई है, लेकिन जानकार मानते हैं कि यदि निष्पक्ष जांच होती है, तो कई अस्पतालों पर कार्रवाई तय है। यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर जनता के जीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच शुरू करता है, या फिर यह सूची भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।
कौशाम्बी में 134 अस्पतालों की यह सूची अब सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल बन चुकी है—क्या इलाज के नाम पर कहीं ‘खेल’ तो नहीं चल रहा?

Amarnath jha Kaushambi – 9415254415

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