जबरन प्रीपेड मीटर पर घमासान, केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग
👉 जबरन प्रीपेड मीटर पर बवाल, केंद्र से कार्रवाई की मांग
👉 करोड़ों उपभोक्ताओं में नाराजगी, बिना सहमति बदले जा रहे मीटर…
👉 उपभोक्ता परिषद की चेतावनी—नहीं रुका तो होगा प्रदेशव्यापी आंदोलन…
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिना सहमति के प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने का मामला अब बड़ा विवाद बन गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार तक पहुंचाते हुए ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय ऊर्जा सचिव से सख्त कार्रवाई की मांग की है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि उपभोक्ताओं की अनुमति के बिना प्रीपेड मीटर लगाना कानून के खिलाफ है। उन्होंने बताया कि विद्युत अधिनियम 2003 में साफ है कि प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की इच्छा पर ही लगाए जा सकते हैं, इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता।
करोड़ों उपभोक्ताओं पर असर, बढ़ा गुस्सा..
परिषद के अनुसार, प्रदेश में आरडीएसएस योजना के तहत करीब 3.8 करोड़ मीटर बदले जा रहे हैं। इनमें से लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना पूछे ही प्रीपेड कर दिए गए हैं।
इतना ही नहीं, नए बिजली कनेक्शन भी सीधे प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं। इससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और कई जगह विरोध भी शुरू हो चुका है।
संसद में साफ बात, फिर भी अनदेखी…
अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि 2 अप्रैल 2026 को संसद में स्पष्ट कहा गया कि प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक हैं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश की बिजली कंपनियां इस नियम को नजरअंदाज कर रही हैं।
क्या हैं परिषद की मांगें ?..
परिषद ने केंद्र सरकार से मांग की है कि—
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
कानून का सख्ती से पालन कराया जाए
जिन उपभोक्ताओं के मीटर जबरन बदले गए हैं, उन्हें फिर से पहले जैसा किया जाए
नए कनेक्शन में प्रीपेड मीटर की जबरदस्ती बंद हो
दोषी अधिकारियों और कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई हो
आंदोलन की चेतावनी….
परिषद ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे प्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
साफ है कि यह मामला अब सिर्फ मीटर बदलने का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकारों की लड़ाई बन चुका है।
Amarnath jha Kaushambi – 9415254415
