जिला अस्पताल के सामने “किराये की काली कमाई” का जाल, हॉस्पिटल, अल्ट्रासाउंड सेंटर व मेडिकल स्टोर निशाने पर, RTI से खुलासा

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👉 जिला अस्पताल के सामने काली कमाई का खेल उजागर, RTI में खुलासा…
👉 हॉस्पिटल, अल्ट्रासाउंड और मेडिकल स्टोर पर शिकंजा, किराये के नाम पर खेल…
👉 स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: अस्पताल के बाहर अवैध कमाई का जाल बेनकाब…

कौशाम्बी। जिला मुख्यालय स्थित जिला अस्पताल के सामने किराये के नाम पर चल रहे कथित “लूट के खेल” ने अब गंभीर रूप ले लिया है। आरोप है कि इस इलाके में संचालित प्राइवेट हॉस्पिटल, अल्ट्रासाउंड सेंटर, मेडिकल स्टोर समेत कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान हर महीने 60 हजार से 80 हजार रुपये तक का भारी-भरकम किराया दे रहे हैं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
इस पूरे मामले को लेकर 19 मार्च 2026 को सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के तहत एक विस्तृत आवेदन दायर किया गया है। आवेदक अमरनाथ झा ने आरटीआई के माध्यम से इन प्रतिष्ठानों से जुड़े मकान मालिकों और संचालकों की आय, आयकर रिटर्न (ITR) और संपत्ति का ब्यौरा मांगा है। आवेदन में यह स्पष्ट पूछा गया है कि क्या इतने बड़े स्तर पर हो रही किराये की आमदनी को आयकर विभाग में घोषित किया जा रहा है या नहीं।

आरटीआई में वर्ष 2023 से 2026 तक की आय का विवरण, किराये से अर्जित धन का स्रोत और संबंधित लोगों द्वारा दाखिल आयकर रिटर्न की स्थिति की जानकारी मांगी गई है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि विभाग के पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, तो निगरानी और कार्रवाई का अभाव क्यों है।
सबसे अहम बात यह है कि जिन संस्थानों का इस मामले में जिक्र है, वे सीधे तौर पर आम जनता से जुड़े हैं—जैसे निजी हॉस्पिटल, अल्ट्रासाउंड सेंटर और मेडिकल स्टोर। ऐसे में किराये के नाम पर हो रही भारी वसूली का सीधा असर इलाज की लागत पर भी पड़ सकता है, जिससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
यह आरटीआई डिप्टी कलेक्टर, कौशाम्बी को संबोधित की गई है, जिसके बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से इस क्षेत्र में किराये की दरें मनमाने ढंग से बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि RTI के बाद प्रशासन क्या रुख अपनाता है। क्या इस कथित “किराया नेटवर्क” की जांच होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण ने न सिर्फ किराये की व्यवस्था बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

Amarnath jha Kaushambi – 9415254415

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