RTI पर जेल प्रशासन का यू-टर्न: पहले चुप्पी, अब “सूचना व्यापक” बताकर झाड़ा पल्ला
👉 2020 से 2026 का मांगा था रिकॉर्ड ,2000 से जोड़कर बना दिया 26 साल का मामला ।
👉 6 साल की सूचना को “अत्यधिक व्यापक” बताकर इनकार , RTI पढ़ने में लापरवाही या जानबूझकर खेल?
👉 जेल अधीक्षक कार्यालय पर उठे गंभीर सवाल ,पारदर्शिता के दावों की खुली पोल ।
कौशाम्बी। जिला कारागार कौशाम्बी में सूचना के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 18 मार्च 2026 को दायर आरटीआई पर पहले निर्धारित समय तक कोई जवाब नहीं दिया गया, और अब 01 अप्रैल 2026 को जेल प्रशासन ने सूचना देने से साफ इनकार कर दिया है।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आवेदक पत्रकार अमरनाथ झा ने वर्ष 01 अप्रैल 2020 से 14 मार्च 2026 तक की जानकारी मांगी थी, लेकिन जेल प्रशासन ने इसे 2000 से 2026 तक का रिकॉर्ड मानते हुए “अत्यधिक व्यापक” बताकर खारिज कर दिया। यानी 6 साल की सूचना को 26 साल का बताकर टालने की कोशिश की गई।
आरटीआई में बंदियों की संख्या, बजट खर्च, भोजन व्यवस्था, निर्माण कार्य, सामग्री खरीद, टेंडर प्रक्रिया और शिकायतों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मांगी गई थी, जो सीधे तौर पर जेल प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली से जुड़ी है।
पहले समयसीमा के भीतर कोई उत्तर न देकर प्रशासन ने चुप्पी साधे रखी, जिससे नियमों के पालन पर सवाल उठे। इसके बाद दिए गए जवाब में जन सूचना अधिकारी एवं जेल अधीक्षक ने सूचना को “अत्यधिक व्यापक” बताते हुए देने से मना कर दिया और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 व उत्तर प्रदेश आरटीआई नियमावली 2015 का हवाला दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आरटीआई आवेदन को सही तरीके से पढ़ा गया या जानबूझकर गलत व्याख्या कर सूचना देने से बचा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह “सूचना व्यापक है” का तर्क अक्सर जवाबदेही से बचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
पत्र में अपील का विकल्प देते हुए उप महानिरीक्षक कारागार, प्रयागराज परिक्षेत्र को अपीलीय अधिकारी बताया गया है। आवेदक ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को प्रथम अपील में ले जाएंगे।
यह मामला एक बार फिर सरकारी विभागों की कार्यशैली और आरटीआई कानून की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
Amarnath jha Kaushambi – 8318977396
