कौशाम्बी में ‘रोजगार मेले’ बने सवालों के घेरे में, फर्जी नियुक्तियों और सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा खेल? जांच की उठी मांग
कौशाम्बी जनपद में जिला सेवायोजन विभाग द्वारा आयोजित किए जा रहे रोजगार मेलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि युवाओं को रोजगार दिलाने के नाम पर कागजी आंकड़ों का खेल खेला जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। मामले को लेकर अब सूचना का अधिकार (RTI) के जरिए विस्तृत जानकारी मांगी गई है, जिससे संभावित घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है।
सूत्रों और अभ्यर्थियों के अनुसार, रोजगार मेलों में सैकड़ों युवाओं के चयन का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तविकता में बहुत कम अभ्यर्थियों को नौकरी मिलती है। कई मामलों में चयन सूची जारी कर दी जाती है, लेकिन संबंधित कंपनियों में जॉइनिंग ही नहीं होती। इससे यह आशंका मजबूत होती है कि आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर विभाग अपनी उपलब्धियां दिखा रहा है।
सबसे गंभीर आरोप सरकारी धन के उपयोग को लेकर है। रोजगार मेलों के नाम पर प्रचार-प्रसार, टेंट, भोजन और अन्य व्यवस्थाओं में लाखों रुपये खर्च दिखाए जाते हैं, लेकिन इन खर्चों की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। यह भी आरोप है कि कई बार कंपनियों की उपस्थिति केवल कागजों तक सीमित रहती है, जिससे पूरा आयोजन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें रोजगार मेले में बुलाया तो जाता है, लेकिन वहां न तो पर्याप्त कंपनियां होती हैं और न ही स्पष्ट चयन प्रक्रिया। कई युवाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें “चयनित” दिखाया गया, लेकिन बाद में नौकरी का कोई अता-पता नहीं चला। इससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
मामले में यह भी सामने आया है कि रोजगार मेलों में शामिल कंपनियों का सत्यापन और चयनित अभ्यर्थियों की जॉइनिंग की जांच ठीक से नहीं की जाती। यदि ऐसा है, तो यह सीधे तौर पर सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग और संभावित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले 3-5 वर्षों में आयोजित सभी रोजगार मेलों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और चयनित अभ्यर्थियों की वास्तविक जॉइनिंग का फिजिकल सत्यापन किया जाए, तो बड़ा खुलासा हो सकता है।
अब स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन और उच्च अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं। साथ ही दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और फर्जी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि सरकारी धन की बर्बादी रुके और युवाओं के साथ हो रहे कथित धोखे पर लगाम लग सके।
फिलहाल, RTI के जरिए मांगी गई जानकारी के जवाब का इंतजार है। यदि विभाग पारदर्शिता से जवाब देता है, तो यह मामला जिले में एक बड़े घोटाले का रूप ले सकता है।
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