RTI पर चुप्पी: बीते वर्षों,ITI मंझनपुर ने नहीं दिया जवाब, उठे भ्रष्टाचार के सवाल
👉 सूचना दबाने का आरोप, पारदर्शिता पर ताला—अब होगी कानूनी लड़ाई…
कौशाम्बी जिले में सूचना के अधिकार (RTI) कानून को खुलेआम ठेंगा दिखाने का मामला सामने आया है। ITI मंझनपुर से जुड़ी अहम जानकारियां मांगने वाले आवेदक को निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया गया। यह न सिर्फ लापरवाही है, बल्कि RTI अधिनियम 2005 का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
आवेदक ने अपने आवेदन में 1 जनवरी 2020 से 5 अक्टूबर 2023 तक संस्थान में हुए खर्च, सामग्री खरीद, टेंडर प्रक्रिया, ठेकेदारों के नाम, भुगतान का पूरा ब्यौरा, ट्रेडवार छात्रों की संख्या, ड्रॉपआउट, प्लेसमेंट और अन्य प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी विस्तृत जानकारी मांगी थी। ये सभी बिंदु सीधे तौर पर सरकारी धन और संस्थान की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं, जिनका खुलासा होना बेहद जरूरी है।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर और जनहित से जुड़े सवालों के बावजूद विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे बैठा है। RTI कानून के तहत 30 दिनों के भीतर जवाब देना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां कई साल बीतने के बाद भी सूचना नहीं दी गई। इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं कुछ छिपाने की कोशिश की जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि संस्थान में खरीद-फरोख्त और ठेकों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में RTI के जरिए मांगी गई जानकारी न देना संदेह को और गहरा करता है। यह मामला अब सिर्फ एक आवेदन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

आवेदक ने साफ कर दिया है कि अगर जल्द जवाब नहीं मिला तो वह प्रथम अपील के साथ-साथ राज्य सूचना आयोग में शिकायत दर्ज कराएगा। साथ ही संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगाने और विभागीय कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।
“जब जानकारी देने से बचा जा रहा है, तो जाहिर है कि कुछ गड़बड़ जरूर है। आवेदक अब इस मामले को अंत तक ले जाएंगे।”
RTI कानून आम जनता को अधिकार देता है कि वह सरकारी कामकाज का हिसाब मांगे, लेकिन जब जिम्मेदार अधिकारी ही इससे मुंह मोड़ लें, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है या फिर यह भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
Amarnath jha kaushambi -8318977396
