एक साल बाद भी नहीं मिला जवाब, दलित उत्पीड़न मामलों पर दायर RTI को पुलिस ने किया नजरअंदाज
👉 दलित उत्पीड़न पर RTI से पुलिस क्यों खामोश?
👉 23 फरवरी 2025 को मांगी जानकारी, एक साल बाद भी नहीं मिला जवाब , S.P. कार्यालय की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
कौशाम्बी । जिले में सूचना का अधिकार अधिनियम की अनदेखी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पत्रकार अमरनाथ झा द्वारा 23 फरवरी 2025 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ऑनलाइन दाखिल की गई आरटीआई का जवाब एक साल बीत जाने के बाद भी नहीं दिया गया। जबकि कानून के अनुसार किसी भी आरटीआई आवेदन का जवाब अधिकतम 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य है।
इस आरटीआई में जनवरी 2010 से 20 फरवरी 2025 तक जिले के सभी थानों में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के खिलाफ दर्ज अपराधों का पूरा ब्योरा मांगा गया था। आवेदन में हत्या, दुष्कर्म, छेड़छाड़, मारपीट, चोरी, डकैती और सामूहिक हिंसा जैसे मामलों की संख्या, पीड़ितों का नाम-पता, अपराध संख्या और संबंधित थानों की जानकारी देने की मांग की गई थी।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मुद्दे पर पुलिस विभाग की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया। ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन लंबित दिख रहा है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों की जानकारी देने में पुलिस प्रशासन क्यों बच रहा है।
सूचना के अधिकार के जानकारों का कहना है कि यदि 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई जाती तो इसे कानून का सीधा उल्लंघन माना जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित लोक सूचना अधिकारी पर प्रतिदिन 250 रुपये के हिसाब से अधिकतम 25 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
इस पूरे मामले ने जिले में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब कानून आम नागरिक को जानकारी लेने का अधिकार देता है तो फिर जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से क्यों बच रहे हैं।
अब इस मामले को लेकर राज्य सूचना आयोग में अपील की तैयारी की जा रही है। यदि मामला आयोग तक पहुंचता है तो संबंधित अधिकारियों को जवाब देना पड़ सकता है और विभाग की कार्यप्रणाली भी कठघरे में आ सकती है।
जिले में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर दलित उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मुद्दे पर मांगी गई जानकारी को एक साल तक दबाकर रखने के पीछे असली वजह क्या है।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
