कौशाम्बी में भूदान जमीनों पर सवाल: मंझनपुर व सिराथू , चायल तहसीलों के कई गांवों में रिकॉर्ड, पट्टा और दुरुपयोग की जांच की मांग

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भूदान जमीनों पर फिर घमासान…..
👉 कौशांबी में भूदान समिति की जमीनों पर खड़ा हो गया है बड़ा विवाद
👉 मंझनपुर और सिराथू तहसील के कई गांव जांच के घेरे में आए हैं।
👉 चर्चा में है भैला मकदुमपुर, बबुरा, पाता, भेलखा, कादिराबाद और बिछौरा ।
👉 खतौनी में दर्ज नामों की वैधता पर उठे गंभीर सवाल, भूमिहीनों के लिए छोड़ी गई जमीन के दुरुपयोग के आरोप।

👉 बिना अनुमति बिक्री और नामांतरण की शिकायतें सामने आईं,राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी की जांच की मांग तेज।

👉 प्रशासन से विशेष सर्वे और सत्यापन की अपील,पहले भी कुछ प्रविष्टियां निरस्त कर जमीन भूदान खाते में की गई थी दर्ज ,भूदान की मूल भावना बचाने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग 

कौशांबी (उत्तर प्रदेश)। जिले की कौशांबी की मंझनपुर व सिराथू तहसीलों के कई गांवों—भैला मकदुमपुर, बबुरा, पाता, भेलखा, कादिराबाद तथा सिराथू तहसील के बिछौरा—में भूदान समिति की जमीनों को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भूदान आंदोलन के तहत गरीबों और भूमिहीनों के लिए छोड़ी गई जमीन का रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है, जबकि कुछ स्थानों पर नामांतरण और खतौनी प्रविष्टियों में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पूर्व में कुछ मामलों में जांच भी हुई और रिकॉर्ड दुरुस्त किए गए, परंतु व्यापक सत्यापन अब भी आवश्यक है।
भूदान आंदोलन की शुरुआत आचार्य विनोबा भावे ने 1951 में की थी, जिसका उद्देश्य स्वेच्छा से दान की गई भूमि को भूमिहीनों में बांटना था। उत्तर प्रदेश में ऐसी जमीनों का प्रबंधन राजस्व अभिलेखों के माध्यम से होता है और संबंधित प्रावधान उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950 तथा अन्य राजस्व नियमों के अधीन आते हैं। सामान्यतः भूदान या ग्राम समाज की जमीन को बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति बेचना वैध नहीं माना जाता। यदि किसी भूदान भूमि पर वैध पट्टा जारी हुआ है, तो भी हस्तांतरण पर शर्तें लागू हो सकती हैं। ऐसे मामलों में खतौनी, खाता-खेसरा और पट्टा अभिलेखों की जांच अनिवार्य है।
मंझनपुर तहसील के भेलखा सहित अन्य गांवों में अतीत में यह आरोप लगे कि भूदान खाते की जमीन को कुछ व्यक्तियों के नाम दर्ज करा लिया गया। प्रशासन द्वारा जांच के बाद कुछ प्रविष्टियां निरस्त कर भूमि को पुनः भूदान खाते में दर्ज करने की कार्रवाई भी की गई थी। इसी प्रकार बबुरा, पाता, भैला मकदुमपुर और कादिराबाद में भी रिकॉर्ड की पारदर्शिता पर प्रश्न उठे हैं। सिराथू तहसील के बिछौरा गांव में भी यह मांग उठी है कि भूदान से संबंधित सभी खातों का सार्वजनिक सत्यापन कराया जाए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भूदान की जमीन आज भी “भूदान” या “ग्राम समाज” खाते में दर्ज है, तो उसका निजी विक्रय दंडनीय हो सकता है। फर्जी नामांतरण, कूटरचित दस्तावेज या अवैध कब्जे की स्थिति में राजस्व व आपराधिक कार्रवाई संभव है। इसलिए प्रशासन से मांग की जा रही है कि सभी संबंधित गांवों में विशेष सर्वे कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि भूदान की मूल भावना—भूमिहीनों का कल्याण—सुरक्षित रह सके और दुरुपयोग पर रोक लगाई जा सके।

🔴 कौशांबी में भूदान जमीनों पर बड़ा खेल? जांच और सख्त कार्रवाई की उठी मांग,नहीं है जिले में भूदान जमीनों का कोई रिकॉर्ड
कौशांबी के मंझनपुर और सिराथू तहसीलों में भूदान समिति की जमीनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भैला मकदुमपुर, बबुरा, पाता, भेलखा, कादिराबाद और सिराथू तहसील के बिछौरा गांव में भूदान के नाम पर छोड़ी गई जमीनों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों की शिकायतों ने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। आरोप है कि भूमिहीनों के हित में दी गई जमीन पर प्रभावशाली लोगों ने फर्जी नामांतरण, संदिग्ध प्रविष्टियां और अवैध कब्जे कर लाभ उठाया।
ग्रामीणों का कहना है कि कई जगह खतौनी में ऐसे नाम दर्ज हैं जिनकी पात्रता पर सवाल है। यदि भूदान या ग्राम समाज खाते की भूमि को बिना सक्षम अनुमति बेचा या हस्तांतरित किया गया है तो यह राजस्व नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में फर्जी दस्तावेज, कूटरचना और राजस्व हेरफेर पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई, नाम निरस्तीकरण और आपराधिक मुकदमा तक दर्ज हो सकता है।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सभी संबंधित गांवों में विशेष राजस्व सर्वे कराया जाए, पिछले 20–30 वर्षों की खतौनी प्रविष्टियों का ऑडिट हो, और जिन अधिकारियों या व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध पाई जाए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि भूदान की मूल भावना—भूमिहीनों को भूमि—को बचाने के लिए पारदर्शी जांच कर दोषियों पर सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि सार्वजनिक भूमि का दुरुपयोग रुक सके और जनविश्वास बहाल हो।

अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी – 8318977396 ,9415254415

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