प्रयागराज में अपना दल (एस) विधायक वाचस्पति समेत 10 लोगों पर एफआईआर दर्ज, जमीन कब्जा और मारपीट के गंभीर आरोप

👉 अतीक अहमद के गुर्गे फहीम का भी नाम शामिल,शाह फैसल की शिकायत पर कोर्ट के आदेश से कार्रवाई ।
👉 धूमनगंज पुलिस ने जांच शुरू की, दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप,
राजनीतिक गलियारों में मचा हड़कंप,विरोधी दलों ने कानून व्यवस्था पर उठाए सवाल।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अपना दल (एस) के विधायक वाचस्पति समेत 10 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला धूमनगंज थाने में दर्ज किया गया है। आरोप है कि वाचस्पति और अन्य आरोपियों ने जबरन जमीन पर कब्जा करने और विरोध करने पर मारपीट करने का प्रयास किया। एफआईआर में माफिया अतीक अहमद के गुर्गे फहीम का भी नाम शामिल है।
शाह फैसल नामक युवक ने धूमनगंज थाने में तहरीर दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि वाचस्पति समेत अन्य आरोपियों ने अनैतिक धन कमाने की नीयत से अवैध रूप से कागजात तैयार कर जमीन का क्रय-विक्रय किया। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने गलत तथ्यों के आधार पर कागज बनाकर जमीन हड़प ली और खरीददारों का फर्जी तरीके से खतौनी में नाम दर्ज करा दिया। इस दौरान जब इसका विरोध किया गया तो मारपीट और जान से मारने की धमकी दी गई।
एफआईआर में वाचस्पति के अलावा फहीम ज़ैद, जसीम अहमद, अरविंद, प्रमोद केसरवानी, अमित शुक्ला, विकास, उदय यादव समेत एक अज्ञात व्यक्ति का नाम भी दर्ज किया गया है। शिकायत में यह भी आरोप है कि ये सभी लोग दबंग भूमाफिया और अतीक अहमद गैंग के सदस्य हैं। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है।
वाचस्पति का राजनीतिक सफर
वाचस्पति का राजनीतिक करियर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने 2004 में बीएसपी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2007 में बीएसपी से विधायक बने। बाद में वाचस्पति ने समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम लिया। 2014 में सिराथू विधानसभा उपचुनाव में सपा के टिकट पर जीत हासिल की। इससे पहले 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सोराव सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में 30 हजार से अधिक वोट प्राप्त किए थे।
2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान वाचस्पति ने सपा छोड़कर अपना दल (एस) का दामन थाम लिया और कौशांबी की सिराथू सीट से विधायक बने। हालांकि, अब ताजा मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद वाचस्पति और उनके समर्थकों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई
धूमनगंज पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर आरोपियों से पूछताछ भी की जाएगी। मामले में न्यायालय के आदेश के बाद ही एफआईआर दर्ज की गई है, जिससे स्पष्ट होता है कि आरोप गंभीर और संगीन प्रकृति के हैं।
राजनीतिक हलचल
वाचस्पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई है। विरोधी दलों ने इसे कानून व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। वहीं, समर्थकों का कहना है कि वाचस्पति को साजिश के तहत फंसाया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि सच्चाई सामने आ सके।