सरकारी वाहनों के ठेके में घोटाला: नियमों की अनदेखी ,कमर्शियल गाड़ियों की जगह प्राइवेट वाहनों का इस्तेमाल

👉 ड्राइवरों की नियुक्ति में अनियमितता: लाइसेंस और अनुमति पर सवाल ,मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन: कानूनी प्रावधान और सजा
👉 जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने की निष्पक्ष जांच की मांग ,प्रशासन की चुप्पी पर सवाल: जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष अधूरा
कौशांबी । जिले में सरकारी वाहनों के ठेके में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जिले में डीएम के स्कॉर्ट वाहन सहित तीनों तहसीलों चायल, मंझनपुर और सिराथू में एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार के उपयोग के लिए 10 वाहनों का ठेका उर्मिला ट्रैवल एजेंसी को दिया गया था। ठेका लगभग 24,000 रुपये प्रति माह प्रति वाहन की दर से हुआ था, जिसमें कमर्शियल बुलेरो गाड़ियां उपलब्ध कराने का प्रावधान था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने ठेके की शर्तों का पालन नहीं किया है। कमर्शियल वाहनों के स्थान पर निजी (प्राइवेट) गाड़ियां लगाई गई हैं। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत सरकारी और व्यावसायिक उपयोग के लिए केवल कमर्शियल पंजीकरण वाली गाड़ियां ही मान्य होती हैं। निजी वाहनों का उपयोग न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि राजस्व हानि का कारण भी बनता है।
इसके अतिरिक्त, ठेके की शर्तों के अनुसार ड्राइवरों की नियुक्ति भी नियमानुसार नहीं की गई है। ड्राइवरों के पास व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस होना चाहिए और उन्हें परिवहन विभाग द्वारा अधिकृत होना चाहिए। लेकिन कई ड्राइवरों के पास इन आवश्यक दस्तावेजों की कमी पाई गई है
मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 66 और 192 के तहत निजी वाहन का व्यावसायिक उपयोग करने पर वाहन को जब्त किया जा सकता है और जुर्माना या कारावास का प्रावधान है। इसके अलावा, अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन पर ठेके को रद्द किया जा सकता है और एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस मामले की जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस प्रकरण में निष्पक्ष जांच कराए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई औपचारिक बयान प्राप्त नहीं हो सका। मामले की गंभीरता को देखते हुए उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगा।
रिपोर्ट – अमरनाथ झा पत्रकार