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कौशांबी में भूदान जमीन घोटाला: सस्पेंड लेखपाल को क्लीन चिट की तैयारी, 12 लाख की डील की चर्चा,खतौनी 1382 में दर्ज है भूदान,1391 में दर्ज हुआ ईशा के नाम

👉 3 करोड़ में भूदान जमीन बेचकर तमाम अवैध प्लाटिंग का आरोप,कई लोग इस ग्रुप में हैं शामिल ..
प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता, अवैध कमाई से खरीदी कई संपत्तियां
👉 जनता में आक्रोश, डीएम से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग ,मामले में लीपापोती का प्रयास, भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी

👉 सदर तहसील के भेलखा गांव का है मामला ,1994 के बाद भूदान कमेटी की जमीन को कैसे किया गया ईशा के नाम

👉 भूदान कमेटी की जमीन को भूमधारी कराने के बाद जिले में कई जगह मोटी रकम में की गई है रजिस्ट्री ,जांच का विषय 

कौशांबी । जिले में भूदान की जमीन घोटाले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। डीएम के आदेश पर भूदान की जमीन में हुए बड़े घोटाले में सस्पेंड किए गए लेखपाल सुल्तान को नायब तहसीलदार द्वारा क्लीन चिट देने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, क्लीन चिट देने के बदले 12 लाख रुपये की डील होने की चर्चा है, जिससे प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

आरोप है कि भूदान की जमीन का बड़ा हिस्सा करीब 3 करोड़ रुपये में बेचकर अवैध प्लाटिंग की गई। इस जमीन पर प्लॉट बनाकर बेचे जाने से भारी मुनाफा कमाया गया। बताया जा रहा है कि इस अवैध प्लाटिंग में कई प्रभावशाली और रसूखदार लोगों की संलिप्तता भी है। प्लाटिंग से मिले धन का उपयोग कर विभिन्न स्थानों पर जमीनें खरीदी गईं, जिससे घोटाले की परतें और गहरी होती जा रही हैं। इन काली कमाई की सम्मति से कई जगह करोड़ो में जमीन कई लोगों के नाम अलग अलग जगहों पर अलग अलग नाम से खरीदी गई है। यदि जांच हुई तो इस मामले में भूमाफिया सहित अतीक गैंग के लोगों का शामिल होना भी बताया जा रहा है जो जांच के बाद खुलासा होना तय है ।

घोटाले के उजागर होने के बाद जिले में अवैध प्लाटिंग का मुद्दा चर्चा का केंद्र बन गया है। जनता में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन द्वारा मामले को दबाने और दोषियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। घोटाले में संलिप्त अन्य लोगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग जोर पकड़ रही है। जनता का कहना है कि भूदान की जमीन को गरीबों और भूमिहीनों के लिए आवंटित किया जाना था, लेकिन अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों ने मिलीभगत कर पूरे जिले में करोड़ों रुपये का घोटाला कर दिया है ।

जनता ने डीएम से मांग की है कि मामले में संलिप्त सभी लोगों की गहन जांच कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही क्लीन चिट देने की डील में शामिल अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

रिपोर्ट – अमरनाथ झा पत्रकार  – 9415254415

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