बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के खिलाफ विजिलेंस जांच शुरू, आय से अधिक संपत्ति का मामला, इन्हीं को मिला है कौशाम्बी से एयरपोर्ट तक बनाने का ठेका,PWD अधिकारियों पर मिलीभगत के गंभीर आरोप
👉 बसपा विधायक उमाशंकर सिंह पर विजिलेंस का शिकंजा ,आय से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच शुरू
👉 विधायक के परिवार की संपत्तियों की होगी गहन जांच, 464 करोड़ की सड़क परियोजना में गड़बड़ी के आरोप
👉 सरकारी सख्ती के बीच विजिलेंस जांच तेज ,भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख: बड़े खुलासों की उम्मीद
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विजिलेंस जांच शुरू हो गई है। सतर्कता विभाग ने प्रयागराज के महानिरीक्षक (IG) को पत्र लिखकर विधायक, उनकी पत्नी पुष्पा सिंह, बेटा युकेश सिंह और बेटी यामिनी सिंह के नाम पर खरीदी गई जमीन, मकान, फ्लैट, व्यवसायिक और कृषि संपत्तियों की पूरी जानकारी मांगी है। इसके साथ ही, जांच अधिकारी का नाम, पद और संपर्क नंबर भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
संपत्तियों की जांच के आदेश…
महानिरीक्षक प्रयागराज ने सभी उप निबंधन कार्यालयों (रजिस्ट्री कार्यालयों) को निर्देश जारी किया है कि वे विधायक और उनके परिवार के नाम पर पंजीकृत संपत्तियों की सूची तैयार करें और उसे सतर्कता विभाग को सौंपें। इस आदेश के बाद प्रदेश के विभिन्न जिलों में संपत्तियों के दस्तावेजों की गहन जांच शुरू हो गई है। खासकर बनारस के उप निबंधन कार्यालयों में इस जांच को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि सभी विवरण जल्द से जल्द जुटाए जा सकें।
464 करोड़ से ज्यादा की सड़क परियोजना में गड़बड़ी के आरोप
इसके अलावा, प्रयागराज एयरपोर्ट से कौशांबी तक बनने वाली 464.97 करोड़ रुपये की सड़क परियोजना को लेकर भी विधायक पर गंभीर आरोप लगे हैं। यह टेंडर छात्रशक्ति संगठन को दिया गया था, जिसके ठेकेदार स्वयं उमाशंकर सिंह हैं। इस सड़क निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की खबरें सामने आई हैं। कौशाम्बी वाइस ने पहले भी इस पर खबर चलाई थी।
PWD विभाग की मिलीभगत और लापरवाही
इस निर्माण कार्य में PWD विभाग के अधिकारियों और एक्सईएन (XEN) की मिलीभगत के आरोप भी लगे हैं। सूत्रों के मुताबिक, निर्माण के दौरान विभागीय जूनियर इंजीनियर (JE) और अन्य अधिकारी साइट पर मौजूद नहीं रहते, जिससे ठेकेदार को मनमाने तरीके से सड़क बनाने की छूट मिल जाती है। इस गड़बड़ी की कई बार शिकायतें और समाचार रिपोर्टें प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी।
सरकारी निर्देश और अगली कार्रवाई – अब इस मामले में प्रदेश सरकार और सतर्कता विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। स्थानीय स्तर पर भी सतर्कता विभाग को निर्देश जारी किए गए हैं, जिससे संपत्ति से जुड़े सभी दस्तावेज आसानी से एकत्र किए जा सकें। उम्मीद है कि जल्द ही इस जांच से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आएंगे।
क्या हो सकता है आगे?
अगर विजिलेंस जांच में आय से अधिक संपत्ति के आरोप साबित होते हैं, तो विधायक उमाशंकर सिंह पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में आमतौर पर अवैध संपत्ति को जब्त किया जाता है और आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमे का सामना करना पड़ता है।
सरकार और सतर्कता विभाग की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या खुलासे होते हैं और विधायक उमाशंकर सिंह पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।