Wed. Nov 20th, 2019

गवाँर होना बुरा नहीं ,गवाँर होके अर्थशास्त्री हो जाना खतरनाक है

(1) जेट एयरवेज मामला –

पिछले साल तक जेट एयरवेज एक लक्ज़री और कम्फर्टेबले फ्लाइट सेवा देने वाली कम्पनी के रूप में जानी जाती रही थी।
मेरे नजरिये में वो बेस्ट थी,मैंने इंडिगो,स्पाइस,एयर इंडिया,इत्तिहाद में सफर किया है और इत्तिहाद एयरवेज के बाद सबसे बेहतर जेट एयरवेज ही दिखी।
फिर भी जेट डूब रही है ,अंतरास्ट्रीय उड़ाने बंद हो चुकी है और कम्पनी अपना फाइनल हिसाब तैयार कर रही है।हजारो बेरोजगार होंगे , अभी आटा और गीला होगा।

(2)  बीएसएनएल का मामला-

सरकार को कर्ज देने वाली बीएसएनएल खुद घाटे में डूबी हुई है! चुनाव के बाद 57000 कर्मचारियों की छटनी करने का प्रस्ताव मंत्रालय के मेज पर पड़ा हुआ है ,चुनाव ख़त्म होते ही इस पर निर्णय भी हो जायेगा। सोचना पड़ेगा कि आखिर देश की एक मात्र सरकारी टेलिकॉम कंपनी और सिर्फ इसी के पास लैंडलाइन और ब्रॉडबैंड सुविधा देने की क्षमता है वो कैसे डूब सकती है ? जी डूब सकती है ,जब देश का प्रधानमंत्री नीले कोट में प्राइवेट कंपनियों का प्रचार करे तो सरकारी संस्थाए ऐसे ही डूब कर मरती है।

(3) HAL vs अनिल अम्बानी-

भारतीय वायु सेना को एक से बढ़कर एक लड़ाकू विमान बना कर देने वाली हिंदुस्तान ऐरोमेटिक लिमिटेड कंपनी ऐसे हालत में है कि अपने कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ है। ऐसा भला कैसे हो सकता है कि देश की एकमात्र जेट बनाने वाली कम्पनी डूब जाये जिसका य कोई प्रतिद्धंदी भी ना हो ? जी डूब सकता है,मोदी जैसा प्रधानमंत्री है तो मुमकिन है। जब देश का प्रधानमंत्री एक दो परिवारों का चौकीदार बन जाये तो मुमकिन है। जब देश की संस्था (HAL) का नाम खुद प्रधानमंत्री कटवा दे और 10 दिन पहले बनी अनिल अम्बानी की कंपनी का नाम डलवा दे ,जो खुद ही अदालत में दिवालिया घोषित होने के लिए खड़ा हो तो देश की संस्थाए ऐसे ही बर्बाद होती है।

(4) इंडिया पोस्ट सर्विस –

दुनिया की सबसे बड़ी पोस्टल सर्विस 15000 करोड़ के घाटे में है। देश की आधी आबादी को नहीं मालूम होगा कि देश के संचार मंत्रालय को कौन से मंत्री जी देख रहे है। कभी दिखे ही नहीं ,अपने विभाग की तरफ से कोई सन्देश देने,कोई कामयाबी दिखाने नजर नहीं आये। ऐसे में इतनी बड़ी संस्था का डूब जाना आम बात है।

(5) डूबते बैंक भागते करोड़ पति –

एक तरफ बैंक करोड़पतियों के डूबते कर्ज के तले दब रहे है तो सरकार उन्ही पूंजीपतियों के कर्ज माफ़ करने में लगी हुई है ,मोदी सरकार ने 5.5 लाख करोड़ रूपये का कर्ज जो पूंजीपतियों को दिया गया था उसे राईट ऑफ कर दिया है यानि उनका लोन माफ़ कर दिया है। ये उस अमाउंट का चार गुना है जितना कि मोदी जी बिहार में बिहारियों के सामने बोली लगाकर आये थे कि विधानसभा में सरकार बनने पर वो बिहार को सवा सौ करोड़ का पैकेज देंगे ,जो आज तक नहीं दिया।
36 अरबपति व्यापारी जिनका व्यापार इंडिया ही नहीं विदेशो में भी फैला हुआ था ,वो बैंको का लोन लेकर भाग गए या भगा दिए गए। ऐसे में बैंको की हालत खराब होनी ही थी ,ठीक ठाक चल रहे बैंक को भिखारी हो चुके बैंक के साथ मर्ज कराया जा रहा है ,डर ये है की कही ठीक ठीक वाले भी भिखारी ना बन जाये।

(6 ) विश्व की चौथी सबसे बड़ी इकॉनमी बनाने का दंभ – श्रीमान मोदी महान मुट्ठी भींच कर बड़े बड़े शो में ये शो कर रहे है कि उन्होंने भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकॉनामी बना दिया है। अच्छा जी! क्या करना पड़ता है इतनी बड़ी इकॉनामी बनाने के लिए ? जोर शोर से भाषण देना होता होगा ? विज्ञापन कराने होते होंगे ? अच्छा चलिए मान लेते है आपने बनाया और आपसे पहले इस देश की अर्थव्यवस्था सोडे की बोतल में बंद थी ,आप आये फिस्सस करके बोतल खोली और लीजिये इकॉनामी बड़ी हो गयी। ये कैसी बड़ी इकॉनामी है कि जिसमे रोजगार नहीं है ? हालत इतने बुरे है कि अपने ही सांख्यिकी विभाग का डाटा छुपाते फिर रहे है ? अपने मुंह मियां मिट्ठू बनना हमेशा से ही आसान काम रहा है।

(7) रिजर्व बैंक की अनदेखी

देश में तीन लोग सबसे महत्पूर्ण पदों पर है। पहले प्रधानमंत्री दूसरे राष्ट्रपति और तीसरे RBI के गवर्नर। RBI के निणर्य समान्यतः केंद्रीय सरकारों से प्रभावित नहीं होते या केंद्र सरकार RBI पर दबाव नहीं बनाती ,लेकिन नोटबंदी जैसे घातक फैसले बिना RBI की रजामंदी के लिए गए ,जिसकी वजह से रघुराम राजन जैसे काबिल गवर्नर समय से पूर्व पद से हट गए।
उसके बाद प्रधानमंत्री के सबसे विश्वसपात्र अम्बानी परिवार के नजदीकी उर्जित पटेल को RBI का गवर्नर बनाया गया। शुरू में सब ठीक चला ,नोटबंदी का भी उन्होंने बचाव किया मगर धीरे धीरे वो भी केंद्र सरकार की मनमानियों से तंग आ गए। सरकार ने रिजर्व बैंक का रिजर्व ही छीन लिया।इससे पहले उर्जित पटेल इस्तीफा देकर चले गए।
वो रिजर्व जिसका प्रयोग चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के समय नहीं किया गया , स्व अटल जी ने देश से चंदा देने की अपील की मगर इस रिजर्व पर हाथ नहीं डाला मगर मोदी जी ने १/३ हिस्से को ले लिया। वो भी ऐसे हालत में जब वो डींगे हाकते फिर रहे है कि उन्होंने देश को बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था बना दिया है। हद है की नहीं।

(8 ) चाटुकारो की सरकार

बीजेपी में योग्य लोगो की कमी नहीं है ,ऐसे लोग मौजूद है जो बेहतर तरीके से देश चला सकते है। लेकिन प्रधानमंत्री को वो लोग ज्यादा भाते है जो उनका गुणगान करे। भले ही देश का भट्टा बैठ जाये।
उदाहरण के लिए स्मृति ईरानी ,संबित पात्रा ,अरुण जेटली इत्यादि को ही देख लीजिए। स्मृति ईरानी हारी हुई उम्मीदवार है ,इंटर पास है और उन्हें आईआईएम IIT और तमाम शिक्षण संस्थाओ को चलाने की जिम्मेदारी दे दी गयी ,अरुण जेटली हारे हुए उम्मीदवार और वकील है उन्हें देश की अर्थव्यवस्था सँभालने की जिम्मेदारी दे दी गयी। संबित पात्रा प्रवक्ता है और बड़ी मेहनत करते है बीजेपी के लिए ,उन्हें ONGC का स्वतंत्र निदेशक बना दिया गया।
लेकिन जो काबिल लोग है उनके साथ दिक्कत ये है कि वो परम् भक्त किस्म के नहीं है। सुब्रमन्यम स्वामी ,अर्थशास्त्र के बड़े ज्ञाता हैं, उन्हें वित्त मंत्री बना देते लेकिन उन्हें वकील बनाया हुआ है ,वो सुप्रीम कोर्ट में ही नजर 8आते है ,20 -20 सालो से लगातर सांसद आज भी सांसद है लेकिन हारे हुए लोग 2-2 विभाग संभाल रहे हैं।

ऐसे में भी क्या आप ये सोचते हो कि देश आगे बढ़ रहा है ?

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