Sun. Nov 17th, 2019

Jio कंपनी के मालिक मुकेश अम्बानी ने सरकार को लगाया चूना

Amar nath jha

BSNL और Jio का पूरा मामला केवल सस्ती कॉल दरों और सस्ते नेट पैक का भर नहीं है… बल्कि यह भारत के पूरे टेलीकॉम मार्केट को धराशायी करके एकल राज कायम करने की दीर्घकालीन नीति है. Jio के आने से पहले भारत के मार्केट में कुल 12 टेलीकॉम कम्पनियाँ थीं, अब केवल पाँच (Jio, Vodafone, Airtel, Idea and BSNL) ही बची हैं. बाकी की सात कंपनियां जैसे RCom, Aircel, Shyam Telecom वगैरा जियो का मुकाबला नहीं कर पाने की वजह से बन्द हो गईं. इन बन्द हुई कंपनियों के कारण बैंकों (यानी सरकार) के माथे पर 6 लाख करोड़ का NPA चिपक गया. ज़ाहिर है कि आज नहीं तो कल ये छः लाख करोड़ करदाताओं की (यानी हमारी) जेब से ही जाने हैं।

Jio कम्पनी ने अपनी सेवाएँ(??) सितम्बर 2016 से शुरू की हैं, और आज की तारीख तक सरकार को स्पेक्ट्रम / इनकम टैक्स के रूप में एक पैसा भी नहीं दिया है, क्योंकि अभी तक Jio कम्पनी ने कागजों पर खुद को “घाटे में चल रही” कंपनी दर्शाया है. स्पेक्ट्रम / आयकर केवल प्रॉफिट पर लगाया जाता है.

दूसरी बात… Jio कम्पनी के मुकेश मोटा भाई ने आम जनता को लगभग चालीस करोड़ मोबाईल हैंडसेट बाँटे हैं, जो कि उन्होंने “सुरक्षा निधी” लेकर दिए हैं, “बेचे” नहीं हैं. ज़ाहिर है कि सुरक्षा निधि पर GST नहीं लगता, केवल बेचने पर लगता है. इस हिसाब से सरकार को हुआ संभावित और अनुमानित नुक्सान इस प्रकार है :- Rs. 1500/- प्रति हैंडसेट X 40 करोड़ हैंडसेट x 18% GST = Rs. 10,800 करोड़. (अर्थात सरकार को यह “चूना”, नियमों के तहत, पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाकर लगाया गया है).

जो सात टेलीकॉम कम्पनियाँ बन्द हुई हैं, उनके कारण टेलीकॉम सेक्टर में भीषण बेरोजगारी फ़ैली है. लगभग दो लाख प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष इंजीनियर और तकनीशियन अपनी नौकरी खो चुके. Jio की “सस्ता बेचो” नीति के कारण वोडाफोन, एयरटेल, आइडिया और BSNL भीषण घाटे में चले गए हैं, इसलिए ज़ाहिर है कि ये चारों कंपनियां भी Jio की तरह स्पेक्ट्रम शुल्क एवं आयकर नहीं भर रही हैं…. यह बोझ भी सरकार के (यानी हमारे माथे) ही है.

अब आप स्वयं हिसाब लगा लीजिए, कि “सस्ता Jio” (जिसे एक आक्रामक बाज़ार रणनीति के तहत जानबूझकर आपको सस्ता बेचा जा रहा है) आप की जेब पर… और खासकर अप्रत्यक्ष रूप से भविष्य में आपकी जेब पर… कितना डाका डाल चुका होगा, कितना चूना लगा चुका होगा… यह भी विचार कीजिए कि जब टेलीकॉम मार्केट में “अकेला जियो” रह जाएगा, तब उसकी कॉल/इंटरनेट दरें क्या होंगी??

यह भी विचार कीजिएगा कि लंबे समय से लगातार माँग किए जाने के बावजूद BSNL जैसी सरकारी कंपनी को 4G का लाईसेंस और बड़ा स्पेक्ट्रम क्यों नहीं दिया जा रहा है??

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