Fri. Feb 26th, 2021

स्वास्थ्य विभाग में फैला भ्रष्टाचार, सीएमओ एवं सीएमएस पर लगा भ्रष्टाचार का आरोप, अनियमितताओं को लेकर शासन ने बैठाई जांच, कौशांबी पहुंची जांच टीम

सीएमओ कार्यालय में पहुंची लखनऊ जांच टीम शिकायत कर्ताओं द्वारा की गई थी शासन को शिकायत ।
👉 सीएमओ कार्यालय में कई घंटों बृहस्पतिवार को जांच करती रही टीम, डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग एवं डिप्टी डायरेक्टर जी0के बाजपेई सीएमओ कार्यालय में खंगाल ते रहे रिकॉर्ड ।
👉  शिकायतकर्ता ने लगाया डिप्टी डायरेक्टर एवं पूर्व सीएमओ पर सांठगांठ का आरोप

कौशांबी । जनपद में स्वास्थ्य विभाग में घोर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार बड़े पैमाने पर व्याप्त है ,जिसकी शिकायत जिले से मुख्यमंत्री को किया गया था । जिस पर संज्ञान लेकर शासन ने डायरेक्टर वी0के सिंह एवं डिप्टी डायरेक्टर जी0के बाजपेई को जांच के लिए भेजा गया है । शिकायत कर्ताओं ने जी0के वाजपेयी जो पूर्व सीएमओ इलाहाबाद रहे हैं उन पर कौशांबी सीएमओ से सांठगांठ कर जांच प्रभावित कराने का आरोप लगाया है । क्योंकि जांच में आए अधिकारी सबसे पहले सीएमओ के आवास पर जाकर घंटों बैठे रहे हैं।

शिकायतकर्ता ने शासन को पत्र भेजकर बताया था कि जिला क्षयरोग अधिकारी कार्यालय में तैनात टीवी कोऑर्डिनेटर पंकज सिंह के द्वारा धीरज इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर के रूप में उनके खाते में लगभग 34 लाख का सरकारी फंड ट्रांसफर किया गया है । पंकज सिंह के द्वारा सीएमओ कौशांबी को इनोवा क्रिस्टा गाड़ी भी उपलब्ध कराई गई है, जिसका दुरुपयोग हो रहा है । इसी प्रकार ब्लड बैंक संयुक्त जिला चिकित्सालय में कार्यरत मनोज कुमार यादव एलटी जिसकी सीएमएस कौशांबी के द्वारा अनुपस्थिति प्रमाण पत्र देने के बाद भी सीएमओ एवं डीटीओ झा के द्वारा संयुक्त हस्ताक्षर से वेतन निकाला गया है । देखा जाए तो कौशांबी जनपद का स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार की गिरफ्त में है, लगभग 3 साल सीएमओ कौशांबी को पूरा होने वाला है । इनका ऊपर तक पहुंच होने के कारण भ्रष्टाचार की शिकायत होने के बावजूद भी कोई अब तक जांच नहीं हुई है ।

शिकायत कर्ताओं ने भ्रष्टाचार संबंधी साक्ष्य भी डीटीओ कार्यालय से उपलब्ध कराते हुए पूरा ब्यौरा उच्च अधिकारियों को दिया है फिर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है । देखा जाए तो कोविड-19 सहित लगभग करोड़ों रुपये का स्वास्थ्य विभाग में घोटाला किया गया है । इस मामले में नागेश्वर मिश्रा से 25 दिसम्बर को कई घंटों सीएमओ कार्यालय में लखनऊ से आई हुई टीम पूछताछ करती रही है । दूसरे शिकायतकर्ता मनीष कुमार के मौजूद नहीं होने पर टीम वापस प्रयागराज चली गई और 27 दिसंबर को पुनः कौशांबी आकर पूछताछ करेगी । मनीष कुमार की एजेंसी द्वारा सुरक्षा गार्ड रखे गए थे जो 6 माह बाद ही रखे गए सुरक्षाकर्मियों की सेवा समाप्त कर दिया गया और 2019 में नियुक्ति के बाद पुनः दूसरे से मोटी रकम लेकर कार्य को सौंप दिया गया है । यह आरोप सीएमओ एवं सीएमएस पर लगाया गया है ।

बता दें कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिराथू में बीपीएम के वेतन में भी फर्जीवाड़ा किया गया है । बैक डेट से बिना डीटीएच की बैठक के अनुमोदन के ही सीएमओ द्वारा बीपीएम की नियुक्ति कर दी गई है और इस मामले में कई लाख वसूल किए गए हैं । बीपीएम समायोजन मे बिना कमेटी बनाए ,बिना इंटरव्यू कराए किया गया है । मनमानी तरीके से सीमाओं के द्वारा समायोजन करके भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया गया है । इसी प्रकार पीएचसी कडा में डीटीएच की बैठक के अनुमोदन के बाद भी बीपीएम कडा की आज तक सीएमओ द्वारा सेवा समाप्त नहीं की गई है और बराबर वेतन दिया जा रहा है । जबकि डीटीएच की बैठक में निर्णय लिया गया है कि बीपीएम की सेवा समाप्त की जाए । इन्हीं सब बिंदुओं पर शासन से शिकायत पर जांच बैठाई गई है । जांच में पूर्व सीएमओ प्रयागराज एवं डिप्टी डायरेक्टर वर्तमान आए हुए हैं । जांच कमेटी की भूमिका फिलहाल संदिग्ध है क्योंकि जी0के वाजपेई का सीएमओ कौशांबी पी0एन चतुर्वेदी से संबंध है । जांच में आने से पहले उनके आवास में जाकर ए रुके थे । शिकायत कर्ताओं ने निष्पक्ष जांच में संदेह व्यक्त किया है और उन्होंने महानिदेशक से भी शिकायत करके कहा कि इनके बर्ताव में निष्पक्षता की जांच की संभावना नहीं दिख रही है । अधिकारियों द्वारा शिकायतकर्ता ऊपर दबाव डाला जा रहा है और उन्होंने जान का खतरा भी बताया है लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त सीएमओ एवं जिला अस्पताल में सीएमएस एवं इनके कर्मियों के द्वारा करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है । निष्पक्ष जांच करने के लिए शासन ने टीम भेजी है लेकिन शिकायत कर्ताओं ने इस जांच में भी गोलमाल की आशंका व्यक्त की है ।

इस मामले में जब मीडिया कौशांबी वाइस और हिंदी खबर की टीम को खबर लगी और सीएमओ कार्यालय में जांच के लिए लखनऊ से आई टीम से मुलाकात करना चाहा तो टीम ने बात करने एवं जानकारी देने से इंकार कर दिया है । इस मामले को यह कह कर टाल दिया गया कि कोई सरकारी दौड़ा या सरकारी कार्य से नहीं आए हैं वह व्यक्तिगत मामले से आए हुए हैं । इससे लगता है कि जांच को दबाने के लिए और इस मामले में लीपापोती करने के लिए कहीं ना कहीं पूरी कोशिश की जा रही है जो जांच का विषय है…..

अमरनाथ झा पत्रकार

मुख्य ख़बरें