Sat. Jan 16th, 2021

नहीं बंद हो रहा है रेलवे में भ्रष्टाचार, ठेकेदार व अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है पत्थरों के निर्माण और फिर तोड़ने का खेल, ठेकेदारो के कार्यों की अधिकारी नहीं करते कोई जांच, एसी में बैठ कर अधिकारी ठेकेदारों का पैसा करते हैं पास

👉 रेलवे एनसीआर के इंजीनियरिंग विभाग में पत्थर और लोहे का हो रहा है खेल रेलवे राजश्व को जमके लगाया जा रहा है चूना, खुल्लम-खुल्ला विकास के नाम पर हो रही है लूट ।
👉 ठेकेदार और अधिकारी मिलकर रेलवे को बना रहे कंगाल और खुद हो रहे मालामाल , आखिर उच्च अधिकारी एवं विजिलेंस विभाग कब लेंगे इस मामले का संज्ञान ….
👉 ठेकेदारों द्वारा कराए जा रहे कार्यो कि नहीं है कोई गुणवत्ता और ना ही सुपरवाइजर करता है कार्यों के जांच, कराए गए कार्योंं का नहीं है कोई टाइम लिमिट

प्रयागराज । एनसीआर के इंजीनियरिंग विभाग में जिस तरह से 2015 से पत्थरों और लोहे का खेल शुरू हुआ है उसकी कहानी व क्रियाकलाप देखने से ही पता चलता है । देखा जाए तो हमेशा कुछ महीनों में ही पत्थरों को लगाया जाता है और फिर उसकी रूपरेखा बदल दी जाती है । इसके बावजूद भी पत्थर टूट जाते हैं और उसका लेबल कहीं भी कोई अधिकारी निरीक्षण नहीं करता है ,जिसमे पत्थरों के टूटने का मुख्य कारण सही ढंग से फिटिंग का ना होना पाया गया है । यह खेल भी खूब किया गया है । इस मामले में छोटे से छोटे स्टेशनों पर जहां पर कमाई का कोई स्रोत नहीं है वहां पर भी लोहे का भरपूर इस्तेमाल करके पुल बनाया गया है ,जहां कोई यात्री या माल चढ़ने उतरने का आवागमन नहीं होता है । केवल इस मामले में अधिकारियों और ठेकेदारों ने कमाई का जरिया बनाया है ।

इस मामले में बोर्ड की ओर से एक टीम गठित करके इन पुलों के और स्टेशनों पर लगाए जाने वाले पत्थरों के तोड़ने और लगाने के मामले में जांच होनी चाहिए । लोगों की माने तो छोटे-छोटे स्टेशनों पर बनाए गए पुलों का क्या औचित्य बनता है यह चर्चा का विषय बना हुआ है । इससे रेलवे राजस्व का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है जबकि इसमे कितनी आमदनी की बढ़ोतरी हुई है इसका कोई आकलन करने वाला नहीं है ।

रेल मंत्रालय रेलवे के कर्मियों के ऊपर अधिक वेतन का बोझ व कटौती की बात करता है लेकिन इस तरह के तमाम हुए कार्यों पर जो अधिकारियों द्वारा कमीशन बाजी के चक्कर में कार्य कराए गए हैं उन पर आकलन क्यों नहीं करता है यह एक बड़ा सवाल है । इन मामलों में तो यहां तक पाया गया है कि ठेकेदारों का कार्य रेल कर्मचारियों से कराया गया है और उसका भुगतान अधिकारियों एवं ठेकेदारों के बीच में पैसे का बंदरबांट किया गया है, सूत्रों की माने तो ठेकेदार के द्वारा कहीं भी उसके लेबरों से काम नहीं लिया गया है । दुर्भाग्यवश रेल के मान्यता प्राप्त संगठनों के लोगों की चुप्पी साधन के कारण कर्मचारियों का शोषण जमकर हो रहा है, जिस पर कोई आवाज उठाने वाला नहीं है ।

यदि देखा जाए तो आज भी रेलवे स्टेशन प्रयागराज के सिविल लाइन साइड रोड पर टूटे हुए पत्थरों का अंबार लगा हुआ है और उन पत्थरों की स्थिति आकलन की जाए तो यह पता लगेगा कि कितने समय पहले यह पत्थर लगाए गए थे और वर्तमान में पांच नंबर प्लेटफार्म पर आज भी एक गड्ढे के रूप में इंजीनियरिंग विभाग के कारनामा पोल खोल रहा है । यदि उसका निरीक्षण किया जाए तो पता लगेगा कि कोई भी एसएसई ऐसी साइट पर निरीक्षण करने नहीं जाता है और चेंबर में बैठकर ठेकेदार से शाम को शवाब और कबाब में मशगूल रहते हैं और उन्हें खुल्लम-खुल्ला रेलवे राजस्व को लूटने की छूट दे रखे हैं यह जांच का विषय है ।

मुख्य ख़बरें