Sat. Jan 16th, 2021

जिला अस्पताल में बढ़ा भ्रष्टाचार, आउटसोर्सिंग पर रखे कर्मचारियों से वसूले करोड़ों, जीत सिक्योरिटी के लोगों ने वसूला गरीबों से रुपया, कुछ माह के बाद आरोप लगाकर दिखाते हैं बाहर का रास्ता

जीत सिक्योरिटी को 142 आउटसोर्सिंग कर्मी रखने का है टेंडर, जिसमें दो ड्राइवर पद है रिक्त ,119 लोग पिछले एजेंसी के माध्यम से हुए हैं समायोजित, जीत सिक्योरिटी के रंजीत दुबे ने दी जानकारी ।

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👉 सीएमओ और सीएमएस बने अनजान, कैसेे होगा गरीबों का कल्याण, पीड़ित अनिल कुमार सफाई कर्मी ने की शिकायत तो उसे भी दिखायाा बाहर का रास्ता ।
👉 वसूली का पैसा विभागीय उच्च अधिकारियों में हुआ बंदरबांट.. क्या होगी इसकी जांच……

👉 नहीं रुक रहा है जिला अस्पताल में आउटसोर्सिंग पर रखे कर्मचारियों का शोषण । आरपी एजेंसी और मार्च मे सिक्योरिटी एजेंसी नामक कंपनी को मिला है आउटसोर्सिंग पर रखने का टेंडर । सरकारी नौकरी देने के नाम पर आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों से वसूले करोड़ों ।

खबर का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी अमित कुमार सिंह ने किया 3 दिन अस्पताल का दौरा, अधिकारियों में मचा रहा हड़कंप…..

कौशाम्बी । जिला अस्पताल में गरीबों से आउटसोर्सिंग के नाम पर सरकारी नौकरी करा देने के नाम पर कर्मियों पर हो रहे भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है । इन आउटसोर्सिंग कर्मियों को रखने के लिए और बाद में सरकारी नौकरी करा देने के नाम पर 50 से ₹60 हजार वसूले गए हैं । ऐसा कोई भी कर्मी नहीं है जिससे पैसा वसूला न गया हो लेकिन उसे धमकी देकर उसका मुंह बंद करा दिया गया है । जिससे वह कर्मी पैसा देकर फंसे हुए हैं और उनसे बेइंतेहा मनमाना काम लिया जा रहा है । जिन लोगों ने पैसा दिया है अब वह जब अपना पैसा मांगते हैं तो उन्हें कहा जाता है कि पैसा कहां दिए हो अगर कोई सबूत हो तो दिखाओ ।  ऐसे में आउटसोर्सिंग  के कर्मचारियों के पास अपना धन डूबता दिख रहा है और उनसे मनमाना काम भी लिया जा रहा है । सुबह 6:30 बजे से जिला अस्पताल बुलाया जाता है और 2:00 बजे छुट्टी दी जाती है, शाम को फिर फोन करके उनको बुला कर काम लिया जाता है ध करता है और जब जाते हैं उसे रजिस्टर में अब्सेंट दिखा देते हैं और उससे काम भी दिन भर लेते तो यह दोहरा शोषण हो रहा है यह सब कार्य को अंजाम देने वाले कंपनी के सुपरवाइजर का काम देखने वाला और कर्मचारियों पर रोग झाड़ने वाला जितेंद्र पांडे, देवेश और शशांक मिलकर बाहर का रास्ता दिखा देते हैं । यह सिलसिला कई माह से जिला अस्पताल में चल रहा है । अब तक देखा जाए तो जो इस मनमानी का शिकार हुुए हैं उनको बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है और उनका पैसा भी वापस नहीं किया गया है ।

सूत्रों की माने तो हर आउटसोर्सिंग पर रखे गए कर्मचारियों से लिया गया है 50 से ₹60 हजार.। जितेंद्र पांडे और शशांक सिंह व देवेश नामक सुपरवाइजर का काम देख रहे मॉनिटरिंग कर रहे लोगों ने वसूला है पैसा ।कर्मचारियों को धमकी दे रखा है – यदि पैसे की शिकायत किसी अधिकारी से किया गया तो चली जाएगी नौकरी। कर्मी पैसा फंसने के बाद ना तो किसी से शिकायत कर पा रहा है और ना ही अपनी पीड़ा बता पा रहा है ।

इसी प्रकार संगीता नामक महिला को भी इन लोगों ने आगे करके सदाकत पर कराया था रिपोर्ट दर्ज और उसको निकालने के बाद में संगीता को भी दिखाया बाहर का रास्ता । सदाकत जो सुरक्षा गार्ड के जगह पर था उसकी जगह 70 हजार लेकर दूसरे व्यक्ति रखा । जिला अस्पताल में आउटसोर्सिंग में व्याप्त है भ्रष्टाचार । कर्मचारियों से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर वसूले करोड़ों । यदि जांच हुई तो जितेंद्र पांडे शशांक बाबू व देवेश का फंसना तय है । सूत्र तो यह भी बताते हैं कि लाक डाउन पीरियड में गलत तरीके से मार्च मे जीत सि0 को दिया गया है टेंडर ।

बता दें कि कौशांबी जनपद के जिला अस्पताल में जीत सिक्योरिटी और आर0पी इंटरप्राइजेज को आउटसोर्सिंग पर रखने का टेंडर मिला हुआ है ,जिसके तहत यह कंपनी वाले जितने भी आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी को रखे हैं उनसे 50 से ₹60 हजार वसूली की है । सफाई कर्मी के पद पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को तीन-चार माह के बाद कोई ना कोई आरोप लगाकर को अस्पताल से निकाल दिया जाता है और उनकी जगह पर दूसरी लोगों से पैसा लेकर भर्ती कर लिया जाता है । इस कार्य में सुपरवाइजर का काम देख रहे जितेंद्र पांडे, देवेश और शशांक कार्य को पूरा अंजाम दे रहे हैं । जीत सिक्योरिटीी के मालिक जितेंद्र दुबे नेे बताया जिला उनका सुपरवाइजर का काम देखने वाला कोई नहीं है, कंपनी ने  टेंडर लिया और 79 लोगों को समायोजित कर काम पर लगा दिया है ,जिसकी देखरेख करने का कोई व्यक्ति नही है ,अधिकारी जो लेटर देंगेे उसका जबाब देेेगे । अभी हाल ही मे 1 सप्ताह पहलेे खबर का संज्ञान लेकर जिलाधिकारी ने लगातार 3 दिन किया था अस्पताल का दौरा ।

सूत्रों की माने तो इस मामले में कर्मचारियों को शोषण इतना जबरदस्त हो रहा है कि उनकी से दिए गए पैसे भी पूरे नहीं निकल पा रहे हैं और जितने दिनों तक वह काम किए हैं वह बेगारी में ही हुआ है । ऐसे में यदि जांच कराई जाए तो ऐसा कोई भी कर्मचारी नहीं है जिससे पैसा नहीं लिया गया है । इस मामले में लोग सीएमएस व सीएमओ को शिकायत करते हैं फिर भी लोगों को न्याय नहीं मिला है ।
यदि जिलाधिकारी ने इस मामले में जांच कराई तो इस कंपनी में ऐसा कोई भी व्यक्त नहीं है जिनसे पैसा ना लिया गया हो । करोड़ों वसूलने के बाद इन लोगों को कोई ना कोई आरोप लगाकर या दो तीन दिन अबसेंट दिखा करके बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है । इसी प्रकार अनिल कुमार नामक एक एक सफाई कर्मी को 29 और 30 अक्टूबर को अब्सेंट दिखाकर उसको भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है । 1 नवंबर के बाद से बनाए गए नए अटेंडेंस रजिस्टर में उसका नाम नहीं चढ़ाया गया है और उसे यह कहकर बाहर कर दिया गया है कि डीएम महोदय ने अबसेंट किया है जबकि वह अस्पताल में मौजूद था । उस दिन से वह अस्पताल जाता है लेकिन घूम टहल के वापस चलाता है । इसी प्रकार बबुरा गांव की संगीता देवी ने  बताया कि वह ₹40000 दी थी और उस पर भी चोरी का आरोप लगा कर 6 माह बाद बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है । इसी प्रकार से सैदनपुर गांव सहित दर्जनो लोग हैं जिनको पैसा लेने के बाद चार – 5 माह के बाद उनको भी बाहर का रास्ता दिखा गया और उनकी जगह पर दूसरे- दूसरे लोगों को 50 से 60 हजार लेकर पुन: भर्ती कर लेते हैं ।

यदि देखा जाए तो जो लोग पैसा देकर आउटसोर्सिंग पर काम करते हैं उनका पूरा पैसा भी नहीं निकलता है और जितने दिन तक वह काम करते हैं वह बेगारी में ही चला जाता है । उनका मुंह इसलिए बंद करा दिया जाता है कि यदि कोई शिकायत करोगे तो तुमको नौकरी से निकाल दिया जाएगा । इस तरह से आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों का डर बस मुंह बंद है क्योंकि पैसा देने के बाद वह इस तरह से फंस गए हैं कि ना तो उनका पैसा ही निकल पाया है और ना ही वह नौकरी पर रह पा रहे हैं । इस स्थिति में कर्मचारियों का उत्पीड़न चरम पर है ,उनसे मनमाना काम लिया जा रहा है । दो शिफ्ट में लोगों को बुला बुला के नौकरी कराई जा रही है । इन टेंडर मिले कंपनियों ने मानक के मुताबिक कर्मचारी भी नहीं रखा है । एक एक व्यक्ति से दो शिफ्ट में काम लिया जा रहा है और पैसा 7525रू0 से ज्यादा उनको नहीं मिलता है । इस तरह से देखा जाए तो लोगों का जिला अस्पताल में सोशण हो रहा है और उच्च अधिकारी इस मामले में अनजान है ।

लोगों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जीत सिक्योरिटी और आर0पी सिक्योरिटी पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के ऊपर हो रहे शोषण से बचाने और निकाले गए लोगों के बारे में विचार करने एवं जितेंद्र पांडे ,देवेश और सशांक के साथ-साथ जीत सिक्योरिटी एवं आरपी एजेंसी नामक कंपनी के द्वारा वसूली किए करोड़ों रुपए की जांच हो । जिला अस्पताल में आउटसोर्सिंग पर किसी भी कर्मचारी को रखने और निकालने का ठेका ले रखने वालो के बारे में जांच कराने की मांग की है । और लॉकडाउन पीरियड में मार्च माह में जीत सिक्योरिटी को अधिकारियों की मिली भागत सेे कैसेे टेंडर मिला यह भी जांच का विषय है ।

 

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