Thu. Oct 22nd, 2020

रेलवे एनसीआर में विज्ञापन एजेंसियों को फाइनल करने में हुआ लंबा खेल, एनसीआर में बना पीआरओ मनीष सिंह का आज तक नहीं हुआ आगरा में ट्रांसफर, इलाहाबाद में बैठकर होता है लंबा खेल, विजिलेंस विभाग भी आंख मूंद कर बैठा

 प्रयागराज / इलाहाबाद रेलवे मे ब्याप्त भ्रष्टाचार….

लगभग 100 अखबारों के विज्ञापन का कमीशन खुद खाता हैं पीआरओ,खुद कई बडे अखबारों का खाता है कमीशन, एवं विज्ञापन प्रतिनिधियो का देखता है काम ।

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👉 पीआरओ मनीष सिंह ने कमीशन खोरी में कमाई करोड़ों की संपत्ति, यदि विजिलेंस विभाग ने कराई जांच तो आय से अधिक संपत्ति एवं बेनामी संपत्ति के मामले में फंसना तय….

रेलवे इलाहाबाद में मनीष कुमार सिंह रेलवे में काली कमाई से कमाया करोड़ों, बनाया आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति ।

सूत्रो की माने तो पीआरओ का सिर्फ होटल सिपचैट में लगा है लगभग 50 लाख, यात्रिक होटल के बगल में है होटल ,तीसरे तल पर लगता है जमाकडा । रात मे सुख, सुविधा, ऐसोआराम का है पूरा इंतजाम । सूत्रो की माने तो आठ विज्ञापन एजेंसियों को किया गया लिस्ट में सूचीबद्ध । जिसमें पुराने तीन एजेंसियों को किया गया बाहर और 5 नई एजेंसियों को मोटी रकम लेकर किया गया अंदर ।

सूत्रों की माने तो मनीष सिंह जीआरपी सिपाही से बना फर्जी तरीके से पीआरआई से पीआरओ । अगर जांच हुई तो होंगे कई चौंकाने वाले खुलासे , करोड़ों की बना रखी है आय से अधिक संपत्ति । विज्ञापन की काली कमाई व कमीशन खोरी मे कमाया जमकर रुपए । यही वजह है इलाहाबाद में है कई वर्षों से जमा ,जबकि आगरा में पीआरओ के पद पर प्रमोशन करके हुआ था चयन । इसकी की गई है आगरा पोस्टिंग लेकिन सेटिंग के तहत आज तक है प्रयागराज एनसीआर में है जमा । अधिकारियों को सारी सुख सुविधा मुहैया कराने की वजह से प्रयागराज में है अडा ।

सूत्रों की माने तो पूर्व सीपीआरओ आर0डी बाजपेई जो वर्तमान में जनसंपर्क निदेशक रेलवे बोर्ड के संरक्षण में फल फूल रहा है मनीष सिंह । उसके आगे सीपीआरओ अजीत सिंह भी साबित हो रहे हैं बौने । यही वजह है कि ऐसे तमाम लोगों की वजह से मोदी सरकार की छवि धूमिल हो रही है और वर्षों से दीमक की तरह 15 साल से जमे इलाहाबाद में भ्रष्ट अधिकारी रेलवे को दीमक की तरह चाट रहे हैं । लोगों में इस बात की चर्चा है कि मनीष सिंह को पीआरआई से पीआरओरों बनाया गया तो आखिर आगरा क्यों नहीं भेजा गया। आखिर किस अधिकारी के संरक्षण में आज तक इसको आगरा नहीं भेजा गया है यह जांच का विषय है ।

रेलवे के विजिलेंस विभाग को भी पहुंचाता है मोटी रकम, इसलिए यह विभाग भी आंख मूंद कर बैठा है । पूर्व में भी दिनांक 3 सितंबर 2015 को पीआरआई मनीष सिंह के खिलाफ मामला मीडिया के सुर्खियों में छाया था। यदि उच्च अधिकारियों ने संज्ञान लिया तो मनीष सिंह पर कार्रवाई होना तय है । अब देखना यह है कि इस मामले में कार्रवाई होती है या फिर अंधेर नगरी चौपट राजा की तरह सब चलता रहेगा यह जांच का विषय है ।

अमरनाथ झा पत्रकार ,हिंदी खबर

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