Thu. Oct 22nd, 2020

इलाहाबाद रेलवे मंडलीय कार्यालय से भ्रष्टाचार का हुआ अंत, डीआरएम अमिताभ अग्रवाल का हुआ ट्रांसफर, मोहित चंद्र होंगे अब नए डीआरएम,डिवीजन में 15-20 वर्षों से जमे लोगों का होगा सफाया

नए आगंतुक डीआरएम मोहित चंद्रा की शिक्षा एवं कार्य करने का अनुभव इलाहाबाद रेलवे मंडल के विकास को लगाएगा चार चांद ।

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👉 डीआरएम अमिताभ अग्रवाल ने अपने कार्यकाल मे बनवाए तमाम ऐतिहासिक पुल और प्लेटफार्मो के ऊपर लगवाए पत्थर जिसमें जमकर हुई कमीशन बाजी ।

👉 कोरोना काल में सैनिटाइजर के नाम पर ब्लीचिंग पाउडर के घोल का करवाया छिड़काव..

👉  सुजातपुर, बिंंदकी रोड, बम्हरौली ,विंध्याचल छिवकी और नैनी आदि की रेलवे स्टेशन पर बना हावड़ा जैसे पुल ,इन स्टेशनों पर नहीं है रेलवे राजस्व की कमाई , लेकिन डीआरएम ने कमीशनबाजी में खूब की है कमाई ।

👉 क्यों ना हो अमिताभ अग्रवाल द्वारा बनवाए गए इन सभी पुलों की सीबीआई द्वारा जांच । अमिताभ अग्रवाल को लगेगा झटका, मनेगी काली दिवाली ।

👉 डिवीजन कार्यालय में डीआरएम से लेकर एडीआरएम एवं एमडी की थी लंबी सांठगांठ, जातिवाद को जोड़कर इन लोगों ने डिवीजन में जमकर मचाई लूट ।

👉एमडी ने 2 लाख का पीपी किट, 12 लाख में खरीदा, कोरोना काल में करोड़ों की दवाओं की किया खरीद एवं जांच के नाम पर लाखों का खाया कमीशन ।

👉 क्या वजह है की एमडी को कम दिखाई देने के बावजूद भी 20 वर्षों से इलाहाबाद में है जमा, दवाइयों के नाम पर किया लंबी लूट ।

👉एडीआरएम परिचालन अनुराग गुप्ता मालगाड़ी ट्रेनों में करा रहे हैं वह ओवरलोडिंग कोयले का संचालन

प्रयागराज /इलाहाबाद । एनसीआर के मंडलीय रेलवे कार्यालय इलाहाबाद में डीआरएम अमिताभ अग्रवाल के कार्यकाल में जमकर जहां लूट का घसूट हुई है वही इनके जातिवाद का गठजोड़ भी लोगों की सुर्खियों में रहा है ।चर्चाओं पर जाएं तो डीआरएम अमिताभ अग्रवाल एवं एडीआरएम अनुराग अग्रवाल तथा एमडी विनीत अग्रवाल की सांठगांठ की वजह से डिवीजन में मनमानी ट्रांसफर पोस्टिंग एवं काले कारनामे को अंजाम दिया गया है ।

बता दें कि इस डिवीजन के अंतर्गत 15-20 वर्षों से लोग एक ही जगह पर जमे हुए हैं और इनकी सांठगांठ की वजह से यदि लोगों का कभी कबार यदि ट्रांसफर भी हुआ तो अपनी ऊंची पहुंच के कारण लोग ट्रांसफर रुकवा कर इलाहाबाद में ही जमे रहे हैं । यही वजह है कि एनसीआर के इस डिवीजन में भ्रष्टाचार चरम पर है । हमेशा महिलाओं को लेकर सुर्खियों में इलाहाबाद का डीआरएम कार्यालय रहा है और कहीं ना कहीं उत्पीड़न और शोषण की आवाज रह -रह कर उठती रही है । डीआरएम अमिताभ अग्रवाल के कार्यकाल में कई स्टेशनों पर ऐसे करोड़ों के पुल बनाए गए हैं जिनका कोई प्रयोग नहीं है और ना ही इस बनाए गए करोड़ों के पुल से रेलवे को राजस्व का फायदा ही हुआ है । लेकिन इस तरह के बने तमाम पुलों में जमकर कमीशन बाजी हुई है । इतना ही नहीं रेलवे स्टेशनों पर जो प्लेटफार्म बनाए जा रहे हैं उन पर जो पत्थर लगाए जा रहे है उसमे भी खूब कमीशन बाजी हुई है । इसकी वजह से यह अधिकारी खूब मालामाल हुए हैं लेकिन रेलवे राजस्व को चूना लगाया गया है ।

सूत्रों की माने तो इस डीआरएम से कर्मचारी अंदर ही अंदर बहुत व्यथित थे जो अब इनके ट्रांसफर होने के बाद राहत महसूस कर रहे हैं और लोगों में खुशी भी है । यदि देखा जाए तो इस डीआरएम की मनमानी कार्यप्रणाली हमेशा चर्चाओं में रही है । इनके कार्यकाल में किसी को एक या डेढ़ वर्ष में ही प्रमोशन कर दिया गया है तो किसी को कई- कई सालों तक प्रमोशन नहीं मिला है जो चर्चा का विषय रहा है । इन्होंने अपने पावर का दुरुपयोग भी जमकर किया है और एक एक लाख के डी-कैट्राइज वाले बाबू को लाकर डीआरएम ऑफिस में बैठा दिया गया है जिससे जो वास्तविक एवं अनुभवी बाबू विभाग में कार्यरत है उनकी सीनियरिटी को भी बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है जो रेलवे बोर्ड के मास्टर 25 का उल्लंघन किया गया है जिसकी जांच होना आवश्यक है । यदि इनके कार्यकाल के कारनामों की सीबीआई द्वारा जांच कराई गई तो इनके काले कारनामों तथाा आय से अधिक संपत्ति एवं बेनामी संपत्ति सहित तमाम खुलासे होना तय है जो जांच का विषय है । ऐसाा नहीं हैं कि विजिलेंस विभाग कुछ जानता नहीं है लेकिन उच्च अधिकारियों पर हाथ डालने सेे यह विभाग भी कहीं ना कहीं नजर अंदाज करता है ।

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