Thu. Oct 22nd, 2020

रेलवे एनसीआर में नहीं रुक रहा है भ्रष्टाचार, रेलवे राजस्व को लगाया जाता है करोड़ों का चूना, विजिलेंस विभाग ने साधी चुप्पी, दंड पाए एवं भ्रष्ट लोगों की विजिलेंस डिपार्टमेंट में भरमार

रेल में अभी भी कुछ विभागों में नहीं हो पा रही है कटौती, रेल के कुछ विभागों के डीपों में लगे हैं ट्रक। 
👉 ट्रको का आता है ₹75000 महीना इम्प्रेस, इसके अतिरिक्त ₹8000 अलग से आता है इंप्रेस …
👉 कुछ विभागों में सीआर एवं ओडीयार कर्मचारियों को दिया जाता है जबरदस्त , कर्मचारियों की पूरी छुट्टी खाते में रहती है मौजूद ….
👉 एसएससी करते हैं अपने पावर का दुरुपयोग और बाबू को नीचा दिखाने का करते हैं काम ,दबाव में लेकर बाबू को कराते हैं नियम विरुद्ध कार्य ।

प्रयागराज । रेलवे एनसीआर में कुछ विभाग ऐसे हैं जहां पर डीपो में ट्रक एवं टावर वैगन इस्तेमाल किए जाते हैं और उनमें डीजल का इम्प्रेस ₹75000 प्रति माह आता है । इसके अलावा भी ₹8000 प्रतिमाह अलग से पैसा इंप्रेस दिया जाता है ,जिसमें अनाप-शनाप मनमानी तरीके से सामानों की खरीदारी की जाती है । इसके अलावा कर्मचारियों को सीआर एवं ओडीआर देकर मनमानी तरीके से नियमों को ताक पर रखकर छुट्टी दी जाती है और कर्मचारियों के खाते में पूरी की पूरी छुट्टी बचाई जाती है यह सिलसिला रेलवे में वर्षो से चल रहा है ।

बता दें कि रेलवे मे कुछ विभाग ऐसे हैं जहां कर्मचारी ड्यूटी पर आते ही नहीं हैं और उनकी छुट्टियां पूरी की पूरी खाते में मौजूद रहती है । यदि बुकिंग रजिस्टर और हाजिरी रजिस्टर तथा मास्टर रोल की जांच कराई जाए तो सभी में मनमानी तरीके से गड़बड़ियां मिलना तय है ।

सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि मुख्यालय के निर्माण विभाग में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को दूसरे की आईडी पर वेतन बनाते हैं और मनमानी तरीके से महीनों गायब रहते हैं तथा वापस लौट कर इकट्ठा हाजिरी भर देते हैं और टी0ए का भी क्लेम करते हैं । टी0ए ,डी0के के कर्मचारियों के साथ मनमानी छूट दी जाती है और उनको अधिकारियों ने इतना मुंह लगा रखा है कि यह लोग मनमानी तरीके से आते हैं और जब देखो गायब रहते हैं तथा गांव में जाकर अधिकारियों की खेती बारी का कार्य भी करते हैं ।

यह सारा काम विजिलेंस डिपार्टमेंट के नाक के नीचे हो रहा है और ऑडिट विभाग भी सफेद हाथी की तरह साबित हो रहा है । इन सब चीजों की कोई जांच नहीं की जाती है ,सिर्फ रेलवे राजस्व को चूना लगाया जा रहा है । जबकि प्रधानमंत्री बराबर खर्चों में कटौती की बात करते चले आ रहे हैं लेकिन अधिकारी अपने मनमानी रवैया पर उतारू है और रेलवे का संचालन बाधित होने का बहाना बनाते हैं ।

सूत्रों की माने तो रेलवे डिपार्टमेंट के विजिलेंस विभाग में 15- 20 साल पहले वे लोग जाते थे जिनका चरित्र एवं कार्यशैली साफ-सुथरी होती थी जिनका रिकॉर्ड देखकर बिजलेंस डिपार्टमेंट में उनका चयन होता था । लेकिन इधर कुछ वर्षों से सारे पैमाने धराशाई हो गए हैं और दंड पाए लोगों का चयन विजिलेंस डिपार्टमेंट में किया जा रहा है । ऐसे में इस डिपार्टमेंट में भी भ्रष्टाचार चरम पर है ।,देखा जाए तो एक ही स्थान पर 15- 20 वर्षों से लोग जमे हुए हैं । जिन लोगों ने अपने कार्यकाल में अकूत संपत्ति और भ्रष्टाचार के तमाम कृत्य किए हैं उनको भी बिजलेंस डिपार्टमेंट ने संरक्षण दे रखा है । काफी समय से यह देखा जा रहा है कि पूर्व बिजलेंस इंस्पेक्टर जो.अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं उनके पास अकूत संपत्ति है । वर्तमान समय में एनसीआर के बिजलेंस डिपार्ट में ऐसे कई विजिलेंस इंस्पेक्टर है जो पहले डिपार्टमेंट में रहकर भ्रष्टाचार एवं काले कारनामे मे लिप्त थे लेकिन किसी तरह सेटिंग करके वह विजिलेंस डिपार्टमेंट में नियुक्ति पा गए और अपने काले कारनामों को अंजाम दे रह हैं । यही वजह है कि एनसीआर में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत मजबूत है और इन पर काबू पाना आसान नहीं दिख रहा है ।

इसी प्रकार रेलवे मे इलाहाबाद सूरजकुंड में आरडीआई में महीने में लगभग 25 लाख रुपए की डीजल चोरी धड़ल्ले से होती थी । जिसे कौशांबी वाइस ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित किया था और इस मामले में विभागीय लोगों ने लिखित शिकायत पत्र भी आरडीआई इंचार्ज सूरजकुंड गिरवर धारी श्रीवास्तव के खिलाफ दिया था । जिसमें जांच के नाम पर सीनियर डीएमई एवं रेलवे के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत करके मामले को खत्म कर दिया है और आज तक इस मामले में भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है । सिर्फ आरडीआई इंचार्ज गिरिवर्धारी श्रीवास्तव को सूरजकुंड से हटाकर छिवकी स्टेशन में ट्रांसफर कर दिया और उसके बाद भी वह सूरजकुंड स्थित गोदाम में ही बैठता है । आज भी तेल चोरी का सिलसिला निरंतर चल रहा है, इस मामले में आरपीएफ व अन्य अधिकारियों ने जांच करके झूठी रिपोर्ट लगाते हुए डीजल चोरी के मामले में क्लीन चिट दे दिया गया है । जबकि डिपो में रात में तेल की गाड़ी का लोड उतरना गलत है और एक ही कर्मचारी का प्रतिदिन ड्यूटी पर लगना तथा कंप्यूटर में सारे साक्ष्य मौजूद होने के बावजूद सीसीटीवी के फुटेज गवाह के बावजूद भी मामले में लीपापोती करके भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों को क्लीन चिट दी गई है- जो फिर से जांच का विषय है ।

अब देखना यह है कि कौशाम्बी वाइस खबर का संज्ञान लेकर उच्च अधिकारी एवं रेलवे बोर्ड में बैठे अधिकारी व  रेल मंत्री संज्ञान लेकर इस मामले में कोई कार्रवाई करते हैं या फिर सब कुछ यूं ही अंधेर नगरी चौपट राजा की तरह चलता रहेगा यह जांच का विषय है….

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