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कोरोना के नाम पर रेलवे के चिकित्सा विभाग में मची लूट ,रेलवे के लैब में नहीं हो रही है क्यों कोरोना की जांच

रेलवे के चिकित्सा विभाग में फिजूलखर्ची पर नहीं लग रही है रोक ।

👉 स्वास्थ्य विभाग में की जाती है भारी-भरकम रकम की डिमांड ,कोरोना के नाम पर है लूटपाट जारी

👉 मेडिकल परीक्षण में किया जा रहा है खेल

प्रयागराज । रेलवे में अधिकारियों द्वारा फिजूलखर्ची पर रोक नहीं लग पा रहा है । जहां एक और सरकार इस कोरोना कार्य में सरकारी खर्चों में कटौती और बचत की बात करती है तथा आर्थिक तंगी का हवाला देती है वहीं फिजूलखर्ची पर कोई लगाम नहीं लगा पा रही है । जहां एक ओर नई भर्ती पर रोक एवं पदों को समाप्त करना एवं स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति करना जैसे कार्यक्रम चल रहे हैं वहीं इन सब परिस्थितियों को देखते हुए कोरोना के नाम पर चिकित्सा विभाग में तथा अन्य विभागों में लूटपाट जारी है । चाहे वह सेनीटाइजर की खरीद  या मामला हो या मास्क की खरीद हो अथवा दवाइयों की खरीद हो ,इन सब में लूटपाट जारी है ।

रेलवे के चिकित्सा विभाग के पास सबसे ज्यादा लैब होने के बावजूद आज तक अपने कर्मचारियों का कोरोना वायरस की जांच नहीं कराया है । जिसके कारण अधिकांश कर्मचारियो की यदि जांंच कराई जाए तो कोरोना वायरस से कर्मचारियों इस समस्या का समाधान हो सकता है लेकिन रेलवे के उच्च अधिकारियों की उदासीनता से कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के साथ जान का खिलवाड़ किया जा रहा है । चिकित्सा विभाग कोरोना के नाम पर भर्तियां, दवाइयों का पानी और अन्य सामानों की लगातार बजट की मांग भारी-भरकम करता चला आ रहा है ,जिस पर कोई अंकुश नहीं लगाया जा रहा है । रेल को खोखला करने में चिकित्सा विभाग कैंसर की तरह खा रहा है ।

बता दें कि कुछ दिन तक मेडिकल बोर्ड में एवं चिकित्सा परीक्षण में लगाम लगी हुई थी लेकिन वर्तमान समय में पुनः फिर लंबी-लंबी रकम लेकर मेडिकल बोर्ड में डी-कैटराज किया जा रहा है । ऐसे कई मामले हैं जिनकी यदि जांच कराई गई तो चिकित्सा अधिकारियों का फंसना तय है । अब देखना यह है कि कौशांबी वॉइस की खबर का संज्ञान लेने के बाद रेलवे के उच्च अधिकारी इस मामले पर जांच करते हैं या सब कुछ यूं ही चलता रहेगा यह जांच का विषय है ।

।। अमरनाथ झा पत्रकार ।।

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